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तीन साल मोदी सरकार कश्मीर सबसे बड़ी असफलता है!

आकाश श्रीवास्तव

थर्ड आई वर्ल्ड न्यूज़

१६ मई २०१७

देश में आर्थिक विकास को गति देने, उद्योगों को बढ़ावा देने, निवेश को आकर्षित करने और देश के अंदर सकारात्मक माहौल तैयार करने को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर भले संदेह न हो लेकिन जम्मू एवं कश्मीर के मौजूदा हालात में सुधार के लिए अगर जल्द ही कोई कदम नहीं उठाया गया तो यह मोदी सरकार की सबसे बड़ी असफलता बन सकती है। जो मोदी सरकार के तीन साल के शासन की सबसे बड़ी असफलता होगी। कश्मीर घाटी के ताजा हालात को देखकर ऐसा नहीं लगता कि केंद्र सरकार इस तरह का कोई कदम उठाने जा रही है। घाटी में सुरक्षा बलों की उपस्थिति पहले की अपेक्षा बढ़ी है और निर्वाचन आयोग को भी राज्य सरकार ने कहा है कि घाटी में अभूतपूर्व तनाव को देखते हुए सेना की भूमिका बढ़ने वाली है जिससे स्थिति और 'भयावह' होने वाली है।


राज्य सरकार की प्रतिक्रिया पर निर्वाचन आयोग ने अनंतनाग संसदीय उप-चुनाव को दोबारा टाल दिया है। हाल ही में श्रीनगर संसदीय उप-चुनाव में सात फीसदी से भी कम मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया, जो 2014 के बाद सबसे कम रहा। कश्मीर वासियों के मुख्यधारा की राजनीति में विश्वास कम होने का यह बेहद चेतावनीपूर्ण संकेत है। हाल ही में आतंकवादियों द्वारा भारतीय सेना के 22 वर्षीय जवान कश्मीर निवासी उमर फैयाज की दर्दनाक हत्या ने घाटी में हालात को फिर से बेपटरी कर दिया है। विवाह समारोह के दौरान फैयाज की हत्या घाटी में मौजूद आतंकवादियों की बौखलाहट और उनके दुस्साहस का संकेत भर है। सुरक्षा बलों के खिलाफ उग्र विरोध प्रदर्शनों और पत्थरबाजी में युवकों के साथ-साथ अब किशोरवय और युवा महिलाओं का शामिल होना भी बिगड़ रहे हालात को ही दर्शाता है। जो मोदी सरकार की सबसे बड़ी असफलताओं में शामिल हो रही है।

पिछले वर्ष सुरक्षा बलों के हाथों हिजबुल मुजाहिदीन के कमांडर बुरहान वानी की हत्या के बाद से ही घाटी में अस्थिरता का माहौल है, जो दिन पर दिन बिगड़ता ही जा रहा है। जिसे मोदी सरकार नियंत्रित करने में नाकाम साबित हो चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कश्मीरी युवाओं से आतंकवाद छोड़कर पर्यटन अपनाने की अपील की, लेकिन कश्मीरी युवा ने उनकी इस अपील को भी खारिज कर दिया है। कश्मीर में भाजपा के सहयोगी स्थानीय दल पीडीपी ने कुछ ही हिस्सों से सही, आफ्स्पा हटाने की बात उठाई है, लेकिन आफ्स्पा हटाने के पक्ष में दिए सर्वोच्च अदालत के फैसले को चुनौती देने के भाजपा के निर्णय और भाजपा नेता राम माधव की टिप्पणी से साफ संकेत मिल गया है कि भाजपा इस दिशा में कुछ नहीं करने वाली। राम माधव ने कहा था कि आफ्स्पा जैसे कानून मजे के लिए नहीं बल्कि इसलिए लगाए जाते हैं, क्योंकि उनकी जरूरत होती है।


इस बीच पाकिस्तान ने जिस तरह से भारतीय सैनिकों के सिर काटे हैं और दक्षिणी कश्मीर में जिस तरह से भारतीय सेना के युवा अधिकारी की निर्मम हत्या की गयी वह कश्मीर के बदतर हालात को बयां करने के लिए काफी है। सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर सरकार चंद उपद्रवी कश्मीरियों के खिलाफ कड़े निर्णय लेने में अभी तक क्यों असफल रही है। केंद्र में भाजपा की मजबूत सरकार होने के बावजूद कश्मीर के हालात निपटने में केंद्र की भाजपा सरकार और राज्य की भाजपा पीडीपी की गठबंधन वाली सरकार असफल क्यों है जिसका खामियाजा देश की सुरक्षा में लगे जवानों के परिवारों को भुगतना पड़ रहा है।




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