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कुलभूषण की मौत की सज़ा पर लगी रोक

नई दिल्ली

१९ मई २०१७

कुलभूषण जाधव मामले में भारत को गुरुवार को अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) में बेहद अहम कूटनीतिक, नैतिक व कानूनी सफलता मिली। अदालत ने पाकिस्तान से मामले में अंतिम फैसला आने तक कथित जासूस कुलभूषण जाधव को फांसी न देने का आदेश दिया और आदेश के क्रियान्वयन को लेकर उठाए गए कदमों से अदालत को अवगत कराने को कहा, वहीं पाकिस्तान ने फैसले को खारिज करते हुए कहा कि मामले में आईसीजे को दखलंदाजी का अधिकार नहीं है। एकमत से लिए गए बाध्यकारी फैसले में संयुक्त राष्ट्र की शीर्ष अदालत ने कहा कि मामले में अंतिम फैसला आने तक यथास्थिति बरकरार रहेगी।


आईसीजे के अध्यक्ष रॉनी अब्राहम ने अपने आदेश में कहा, "इस अदालत ने एकमत से फैसला किया है कि मामले में अदालत का अंतिम फैसला आने तक कुलभूषण जाधव को फांसी न देने के लिए पाकिस्तान हर उपाय करेगा। साथ ही अदालत ने एकमत से यह भी फैसला किया है कि इस आदेश के क्रियान्वयन को लेकर उठाए गए कदमों से पाकिस्तान अदालत को अवगत कराएगा।" उन्होंने कहा, "अदालत ने यह भी फैसला किया है कि मामले में जब तक उसका अंतिम फैसला नहीं आ जाता, इस पर कहीं और सुनवाई नहीं होगी।" पीठ में अध्यक्ष के अलावा 10 और न्यायाधीश हैं, जिनमें भारत के दलबीर भंडारी भी शामिल हैं। पाकिस्तान ने दावा किया है कि जाधव को अशांत बलूचिस्तान में तीन मार्च, 2016 को गिरफ्तार किया गया। साथ ही इस्लामाबाद ने दावा किया कि एक वीडियो में भारतीय नौ सेना के पूर्व अधिकारी ने बलूचिस्तान में आतंकवाद तथा आतंकवादियों में लिप्त होने की बात स्वीकार की। जबकि इन आरोपों को भारत ने खारिज करते हुए कहा कि है कि जाधव को ईरान से अगवा किया गया था। जाधव को पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने मौत की सजा सुनाई है।

भारत ने सोमवार को अंतर्राष्ट्रीय अदालत (आईसीजे) से मांग की कि भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी कुलभूषण जाधव की मौत की सजा को पाकिस्तान रद्द करे और वह इस पर गौर करे कि उन्हें फांसी नहीं होनी चाहिए, क्योंकि उनके मामले की सुनवाई विएना संधि का उल्लंघन करते हुए 'हास्यास्पद' तरीके से की गई है। अंतरिम आदेश में न्यायाधीश भंडारी ने कहा, "..राजनयिक संबंधों के मुद्दों के अलावा, तथ्यों की प्राथमिक जांच में यह साामने आना बेहद खेदजनक है कि कुलभूषण जाधव की गिरफ्तारी के बाद तथा पाकिस्तान में उनके खिलाफ आपराधिक मामले की सुनवाई के दौरान उन्हें राजनयिक संपर्क प्रदान करने के भारत के अनुरोध को खारिज कर उनके बुनियादी मानवाधिकारों का उल्लंघन किया गया।"


फैसले को भारत के विदेश मंत्रालय ने सर्वसम्मत, अनुकूल तथा स्पष्ट करार दिया, वहीं पाकिस्तान ने कहा कि आईसीजे के पास राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मामलों की सुनवाई करने का अधिकार नहीं है। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि अदालत का फैसला कुलभूषण जाधव के परिवार तथा भारतीयों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नफीस जकारिया ने कहा कि कथित जासूस कुलभूषण जाधव मामले की सुनवाई अंतर्राष्ट्रीय अदालत (आईसीजे) के अधिकार क्षेत्र में नहीं है। पाकिस्तान के महान्यायवादी अशरफ असफ अली के कार्यालय ने एक बयान में यह संकेत दिया कि वह अदालत के फैसले को मानने के लिए बाध्य है, लेकिन कहा कि मामले के अंतरिम निर्णय का अंतिम फैसले पर कोई फर्क नहीं पड़ता।


मामले की सुनवाई में अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के अधिकार क्षेत्र के मुद्दे पर अदालत ने कहा कि उसने भारत की उन दलीलों पर गौर किया, जिसके मुताबिक पाकिस्तान जाधव की गिरफ्तारी तथा हिरासत को लेकर दूतावास को सूचना प्रदान करने में कथित तौर पर नाकाम रहा और जाधव को राजनयिक संपर्क प्रदान करने में कथित तौर पर असफल रहा। भारत की इन दलीलों से साफ हो जाता है कि यह मुद्दा वियना संधि के दायरे में है। आदेश के मुताबिक, "अदालत की नजर में, ये मुद्दे यह स्थापित करने के लिए पर्याप्त है कि वियना संधि के अनुच्छेद एक के तहत मामले में अंतर्राष्ट्रीय अदालत को हस्तक्षेप का अधिकार है। अदालत ने इस बात पर भी गौर किया कि राजनयिक संबंधों को लेकर पक्षों के बीच 2008 में हुआ एक द्विपक्षीय समझौता अधिकार क्षेत्र पर उसके नतीजे में कोई परिवर्तन नहीं लाता है।"

आदेश में यह भी कहा गया, "अदालत ने गौर किया है कि दूतावास को सूचना प्रदान करने तथा एक देश व उसके नागरिकों के बीच राजनयिक संपर्क प्रदान करने का अधिकार वियना संधि के अनुच्छेद 36 के पहले पैराग्राफ में दर्ज है। अदालत की नजर में ऐसा प्रतीत होता है कि भारत ने जिन अधिकारों का दावा किया है, वह विश्वसनीय है।" अदालत ने कहा कि उसने पाया है कि भारत ने जिन अधिकारों की मांग की है और अदालत जिन तात्कालिक कदमों को उठा सकती है, इन दोनों के बीच एक वैध संबंध है। न्यायाधीश अब्राहम ने उल्लेख किया कि पाकिस्तान के वकील ने यह दलील दी है कि जाधव को अगस्त तक फांसी नहीं दी जाएगी, लेकिन यह आश्वासन नहीं दिया है कि उसके बाद उसे फांसी नहीं दी जाएगी। इन हालात में अदालत इस बात को लेकर संतुष्ट है कि यह मामला 'अर्जेट' है। अदालत ने यह भी कहा कि जाधव तक राजनयिक पहुंच प्रदान की जानी चाहिए, जिसकी भारत ने मांग की है।



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