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उधर बुलेट की आधार शिला रखी, इधर राजधानी पटरी से उतरी!

नई दिल्ली

14 सितंबर 2017

एक तरफ देश का रेल मंत्रालय बुलेट ट्रेन चलाने की परिकल्पना को साकार करने में लगा हुआ है। वहीं दूसरी तरफ देश में आम चलने वाली गाड़ियों के परिचालन में आए दिन होने वाले हादसों को रोकने में भारतीय रेलवे पूरी तरह नाकाम होता जा रहा है। जिस समय देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे गुजरात के अहमदाबाद में बुलेट ट्रेन की नींव रख रहे थे ठीक उसी समय देश की राजधानी  नई दिल्ली में हिदुंस्तान की सबसे अच्छी माने जानी वाली गाड़ी राजधानी एक्सप्रेस पटरी से उतरकर भारतीय रेलवे की परिचालन तंत्र के निकम्मेपन की कहानी दोहरा रही थी।


जी हां गुरुवार सुबह नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर जम्मू राजधानी एक्सप्रेस का एक डिब्बा गुरुवार सुबह पटरी से उतर गया। हांलाकि इस घटना में कोई यात्री घायल नहीं हुआ है। राजधानी एक्सप्रेस रेलगाड़ी जम्मू से नई दिल्ली आ रही थी। यह घटना नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के 15 नंबर प्लेटफॉर्म की ओर आते हुए हुआ। घटना सुबह लगभग साढ़े छह बजे की जब राजधानी का डिब्बा पटरी से उतर गया।" अभी कुछ दिन पहले ही झारखंड के रांची से नई दिल्ली आ रही राजधानी एक्सप्रेस का इंजन और पावर कोच मिंटो ब्रिज स्टेशन पर पटरी से उतर गया था। फिलहाल इस घटना में कोई यात्री घायल नहीं हुआ।

मोदी के तीन साल के शासन काल में सबसे ज्यादा रेल दुर्घटनाएं हुई। एक नज़र रेलवे की निकम्मेपन की वजह से हुई रेल दुर्घटनाओं पर-


2017 अगस्त में 8 महीनों के अंदर 8 बड़ी रेल घटनाएं हुई। अगस्त माह में ही मुजफ्फरनगर के खतौली के पास हुए रेल दुर्घटना में 50 लोगों की मौत हुई जिसमें दो सौ लोग घायल हुए।


22 जनवरी, 2017: जगदलपुर-भुवनेश्वर हीराखंड एक्सप्रेस आंध्र प्रदेश के विजयानगरम जिले में पटरी से उतर गई थी। दुर्घटना में 27 यात्रियों की मौत हो गई थी और 36 लोग घायल हुए थे।

20 फरवरी, 2017 दिल्ली जा रही कालिंदी एक्सप्रेस यूपी के टुंडला जंक्शन पर पटरी से उतर गयी। हादसा इतना भयानक था कि इसमें दो गाड़ियां एक सवारी और एक मालगाड़ी की आपस में टक्कर हो गई थी। हादसे में तीन डिब्बे और इंजन पटरी से उतर गए थे।


3 मार्च, 2017- मार्च में भोपाल-उज्जैन पैसेंजर ट्रेन में कथित रूप से आतंकी धमाका हुआ। ये घटना कालापीपल और सीहोर रेलवे स्टेशन के बीच जब्दी स्टेशन के बीच हुआ। इसमें 8 लोग घायल हुए थे।

17 मार्च, 2017: बेंगलुरु के चित्रादुर्गा जिले में एक एंबुलेंस की ट्रेन से भिड़ंत होने के चलते 4 महिलाओं की मृत्यु हो गई। एंबुलेंस का ड्राइवर एक मानवरहित क्रॉसिंग को पार करने की कोशिश कर रहा था, तभी ट्रेन ने पीछे से उसे टक्कर मार दी।

30 मार्च, 2017 यूपी के कुलपहाड़ स्टेशन के करीब लाडपुर और सूपा के बीच में महाकौशल एक्सप्रेस डिरेल हो गई. इस घटना में 52 लोग घायल हो गए थे।

9 अप्रैल, 2017: बंगाल के दक्षिण पूर्वी रेलवे के हावड़ा-खड़गपुर खंड के पास एक मालगाड़ी का इंजन ही पटरी से उतर गया।

15 अप्रैल, 2017: मेरठ से लखनऊ जा रही राज्य रानी इंटरसिटी एक्सप्रेस के करीब 8 डिब्बे पटरी से उतर गए। हादसे में करीब 60 लोग घायल हो गए थे।

23 अप्रैल, 2017: बिहार में सहरसा-पटना राज्य रानी एक्सप्रेस की दो बोगियां एक रेलवे स्टेशन पर पटरी से उतर गई।

21 मई, 2017: उन्नाव रेलवे स्टेशन पर लोकमान्य तिलक सुपरफास्ट एक्सप्रेस ट्रेन पटरी से उतर गई. ट्रेन के आठ डिब्बे पटरी से उतर गए थे।

20 नवंबर 2016 उत्तर प्रदेश में कानपुर के पास पटना-इंदौर एक्‍सप्रेस ट्रेन के 14 डिब्‍बे पटरी से उतर गए। इस हादसे में कम से कम 45 लोगों की मौत हो गई। हादसे में कम से कम 150 लोग घायल हुए हैं।

5 अगस्त 2015: मध्य प्रदेश के हरदा के करीब एक ही जगह पर 10 मिनट के अंदर दो ट्रेन हादसे हुए। इटारसी-मुंबई रेलवे ट्रैक पर दो ट्रेनें मुंबई-वाराणसी कामायनी एक्सप्रेस और पटना-मुंबई जनता एक्सप्रेस पटरी से उतर गईं। दुर्घटना में लगभग 31 मौतें हुईं।

8 जनवरी, 2014: बांद्रा-देहरादून एक्सप्रेस के तीन स्लीपर कोचों में आग लगने से चार लोग झुलसे, पांच लोगों की मौत हुई। यह हादसा सूरत के पास धनाउ रोड और घोलवड स्टेशन के पास हुआ।

17 फरवरी, 2014: नासिक जिले के घोटी में निजामुद्दीन एर्नाकुलम लक्षद्वीप मंगला एक्सप्रेस के 10 डिब्बे पटरी से उतरे। तीन यात्रियों की मौत और 37 अन्य घायल हुए।

4 मई, 2014: महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में कोंकण रेलवे रूट पर एक सवारी गाड़ी का इंजन और छह डिब्बे पटरी से उतर गए। हादसे में कम से कम 18 लोगों की मौत हुई जबकि 124 लोग घायल हुए।

26 मई, 2014: उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर जिले में गोरखधाम एक्सप्रेस ने एक मालगाड़ी को उसी ट्रैक पर टक्कर मार दी। हादसे में कम से कम 22 लोगों की मौत। यह दुर्घटना चुरेन रेलवे स्टेशन के पास हुई।

28 दिसंबर, 2013: आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले में पुत्तापर्थी के पास बेंगलुरु नांदेड़ एक्सप्रेस के एक एसी कोच में आग लगने से 26 लोगों की मौत हुई, जबकि 12 अन्य लोग घायल हुए। मरने वालों में दो बच्चे भी थे। हादसा उस वक्त हुआ जब ज्यादातर मुसाफिर सो रहे थे।

जून 2012: यूपी के जौनपुर के महरावा और मानीकलां रेलवे स्टेशन के बीच हावड़ा से देहरादून के बीच चलने वाली दून एक्सप्रेस के 7 डिब्बे पटरी से उतरे। करीब 5 लोगों की मौत, 50 घायल। हादसे का कारण पटरी टूटना बताया गया।

इन हादसों से यह पता चलता है कि भारतीय रेलवे यात्रियों की सुरक्षा को लेकर कितनी गंभीर है? यह नहीं इन रेल हादसों के बात भी रेलवे ने विभागीय जांच की वो भी हमेशा की तरह ढ़ाक के तीन पत्ते ही साबित हुए। अब जबकि देश में बुलेट ट्रेन की आधार शिला रखी जा रही है तो आम जनता यह जानना जरूर चाहेगी कि वह जिस आम ट्रेन से चलता है उसकी यात्रा की सुरक्षा की गारंटी कौन लेगा? उन आम गाड़ियों की बिगड़ी दुर्व्यवस्था को कौन ठीक करेगा। क्योंकि बुलेट ट्रेन में देश की आम जनता चलने का साहस नहीं दिखा पाएगी। उसे फिलहाल परंपरागत ट्रेन से ही अपनी मंजिल पर पहुंचना होगा।


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