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देश के नए गृहमंत्री की प्राथमिकताएं और चुनौतियां...?

आकाश श्रीवास्तव

थर्ड आई वर्ल्ड न्यूज़

नई दिल्ली, १ जून २०१९ नई दिल्ली, १ जून 2019

भारत के नए गृहमंत्री अमित शाह को काफी तेजतर्रार सख्त मिजाज का व्यक्ति माना जाता है। देश के नए गृहमंत्री के रूप में उनके सामने ढेर सारी चुनौतियां हैं। जिनमें धारा 307 खत्म करना, राममंदिर का बुनियादी मुद्दा, देश में आतंकवाद से निपटने की कड़ी चुनौती, नक्सवाद से लड़ने की चुनौती, अवैध घुसपैठ की समस्या से निपटने की चुनौती के साथ देश में कानून व्यवस्था को सामान्य बनाए रखने जैसी तमाम चुनौतियां उनके सामने हैं। देश के लोगों से भी उनसे काफी उम्मीदें हैं। फिलहाल आइए कुछ संवेदनशील उन मुद्दों की बात करें जिन्हें नए गृहमंत्री प्राथमिकता दे सकते हैं।


लोकसभा चुनाव के दौरान भी महाराष्ट्र में एक बड़ा नक्सली हमला हुआ था। ऐसे में अमित शाह के गृह मंत्री बनने के बाद सबसे पहले इसके निपटारे की उम्मीद की जा रही है। छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश व महाराष्ट्र के कुछ क्षेत्रों में अब भी नक्सलियों के सक्रिय होने की खबरें आती हैं। अमित शाह के गृह मंत्री बन जाने से देश के अंदर आपराधिंक घटनाओं को अंजाम देने वालों पर भी नकेल कसेगी। गुजरात में अमित शाह के गृह मंत्री रहने के दौरान प्रदेश के क्राइम रेट में काफी गिरावट आई थी। ऐसा बताया जा रहा है कि उनके गृह मंत्री पद पर आने के बाद आपराधिभक प्रवृत्ति के लोगों में डर का महौल बनेगा।
पश्चिम बंगाल समेत नॉर्थ ईस्ट में एनआरसी लगाने के बाद भी लगातर चल रही रोहिंग्या मुसलमान और घुसपैठियों के मुद्दे पर अब से और ज्यादा ठोस कदम की अपेक्षा की जा रही है। अमित शाह इस मामले में सबसे बेहतर मंत्री साबित होंगे, ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है। लोकसभा चुनाव के दौरान सबसे ज्यादा हिंसात्मक घटनाओं की खबरें पश्चिम बंगाल से आईं। इससे पहले पंचायत चुनाव के दौरान भी भारतीय जनता पार्टी और तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में हिंसक झड़पें होने की खबरें आम थीं। ऐसे माना जा रहा है कि अमित शाह के गृह मंत्री बनने से ऐसे मामलों का निपटारा तेजी से होगा।
जम्मू कश्मीर में आंतरिक सुरक्षा व घुसपैठ के चलते बढ़ृने वाले आतंकवाद व बिगड़े हालात में अब सुधार की गुंजाइश होगी। अमित शाह के गृह मंत्री बनने के बाद की सबसे बड़ी चुनौती भी उनक लिए जम्मू कश्मीर ही होगी। पिछले पांच सालों में लगातार जम्मू कश्मीर में हिंसा व पत्थलरबाजी की घटनाओं में इजाफा हुआ है। जम्मू कश्मीर समेत भारत के कई अन्य राज्यों से लगातार आतंकवादियों को सहायता और आतंकवाद के फलने-फूलने की खबरें आती रहती हैं।

ऐसा माना जा रहा है कि गृह मंत्री बनने के बाद अमित शाह सबसे पहले घर में पल रहे आतंकवाद से निपटने की योजना बनाएंगे। साथ ही सीमा पर होने वाली आतंकवादी घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए नीतियां तैयार करेंगे। गुजरात के गृह मंत्री रहने के दौरान उन्होंने पहले भी पाकिस्तानी सीमाओं से होने वाली घुसपैठ जैसे मामलों का निपटारा किया है। बतौर गृह मंत्री अमित शाह से सबसे ज्यादा उम्मीदें पाकिस्तान के साथ रिश्तों को सुधारने को लेकर की जा रही हैं। भाजपा अध्यक्ष के तौर पर अमित शाह की कूटनीतिक क्षमता का आभास पहले से देश को है।


ऐसे में माना जा रहा है कि ना केवल पाकिस्तान बल्कि वे चीन और नेपाल के साथ तल्ख हुए रिश्तों में सुधार लाएंगे। इसके अलावा म्यांमार व बंग्लादेश से होने वाली घुसपैठ पर भी दोनों देशों के सरकारों के बीच ऐसी कड़ी बनाने की कोशिश करेंगे कि ऐसे मामले सामने ना आएं। वैसे भी श्रीलंका और भूटान के साथ भारत के रिश्ते पहले से ही ठीक हैं।




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