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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी में इतिहास बदलने की क्षमता है - मेजर जनरल (रि) जे के एस परिहार

आकाश श्रीवास्तव

थर्ड आई वर्ल्ड न्यूज़

नई दिल्ली, १० अगस्त २०१९

सेना के एक पूर्व वरिष्ठ अधिकारी मेजर जनरल (रि) जितेंद्र कुमार सिंह परिहार ने कहा है कि राष्ट्रपति द्वारा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 के समस्त प्रावधानों तथा अनुच्छेद के खंड 3 के अंतर्गत निहित प्रावधानों का प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्री मंडल  द्वारा प्रेषित अनुसंशा को अनुमति प्रदान करते हुए अनुच्छेद 370 को निरस्त करने का अभूत पूर्व निर्णय भारतीय इतिहास का एक स्वर्णिम, परिपक्व एवं अत्यंत दूर दृष्टि पूर्ण निर्णय है जो  नवीन शक्ति शाली भारत के श्रेष्ठ नेतृत्व की परिकाष्ठा है. कश्मीर  की मूलभूत समस्या के लिए अनुच्छेद 370, कश्मीर का अलग संविधान तथा अन्य प्रावधान उतने ही उत्तरदायी हैं जितने कि  विगत 70 वर्षो से पाक प्रायोजित आतंकवाद, लगातार होने वाली घुसपैठ तथा अलगाव वादियों को  दिये जाने वाला पाक  सहयोग.


मेजर जनरल जे.के.एस. परिहार, सेना मेडल, विशिष्ट सेवा मेडल (पुनः मान्यता) (सेवानिवृत्त) पूर्व, अपर महा निदेशक, सशस्त्र सेना चिकित्सा सेवा।

उन्होंने कहा कि निस्संदेह वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी न केवल इतिहास  को बदलने की क्षमता रखते हैं बल्कि अपनी दृढ़ संकल्प शक्ति, निहित और दलगत हितों के ऊपर राष्ट्र हितों को सर्वोपरी रखते हुए चिरकालीन एवं अद्वितीय निर्णय ले  कर भारत  राष्ट्र की सपूर्ण जन आकांक्षाओं पर खरे उतरें हैं. 5 अगस्त 2019 की तारीख़ एवं मोदीजी अनंत -अनंत काल तक भारत के स्वर्णिम अध्याय की अमिट लेखनी रहेंगे. सही अर्थों में अनुच्छेद 370 का प्रावधान होना ही सम्पूर्ण विश्व को कश्मीर को एक विवादित क्षेत्र मानने का एक प्रमुख कारण है. अनुच्छेद 370  का प्रावधान संविधान में राष्ट्रपति द्वारा एक आदेश के द्वारा संविधान के भाग XXI में अस्थायी, संक्रमणकालीन और विशेष प्रावधान के रूप में शामिल किया गया था.  अनुच्छेद 370  जम्मू और कश्मीर राज्य को स्वायत्तता का दर्जा देता है. अनुच्छेद 370 और भारतीय संविधान के अन्य प्रावधानों को  जम्मू और कश्मीर  संविधान में शामिल करने की अनुसंशा का अधिकार जम्मू और कश्मीर  संविधान सभा को इसकी स्थापना के बाद दिया गया था जिन्हें राज्य में लागू किया जाना चाहिए या अनुच्छेद 370 को पूरी तरह से प्रावधानों  निरस्त करना चाहिए.यद्यपि जम्मू-कश्मीर संविधान सभा ने राज्य के संविधान का निर्माण किया परंतु अनुच्छेद 370 को निरस्त करने बिना कोई निर्णय लिए  स्वत : निष्क्रिय कर दिया. अत: अनुच्छेद 370  को भारतीय संविधान की एक अस्थायी विशेषता माना गया  था जिसे निरस्त करने के लिए संविधान  संशोधन की प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं है. केंद्र शासन द्वारा लिया गया निर्णय पूर्ण रुपेण संविधान संवत्त है.
जम्मू और कश्मीर भौगोलिक और सांस्कृतिक रूप से विशिष्ट क्षेत्र हैं: हिंदू बहुसंख्यक जम्मू प्रभाग (कुल क्षेत्र का 25.9%), मुस्लिम बहुसंख्यक कश्मीर घाटी (कुल क्षेत्र का 15.7%) और लद्दाख (कुल क्षेत्र का 58.4%) है जिसमें बौद्ध-हिंदू  बहुसंख्यक हैं. पाक अधिकृत कश्मीर का  कुल क्षेत्रफल 85,846 किमी  है जिसमें उत्तरी लद्दाख का गिलगित बालिस्तान का क्षेत्र फल 72,971 वर्ग किलोमीटर  तथा इसकी अनुमानित आबादी तकरीबन 10 लाख है. पाक अधिकृत कश्मीर घाटी का क्षेत्र फल 28,174 वर्ग मीटर हैं और इसकी अनुमानित आबादी 45 लाख है.अक्साइ चिन का 37,555  वर्ग किमी क्षेत्र पर चीन का अनाधिकृत अतिक्रमण है. 

जम्मू कश्मीर का 101387 वर्ग किलो मीटर  का क्षेत्र भारतीय प्रशासनिक संगठन में है जिसकी कुल जनसंख्या तकरीबन 1 करोड़ 40 लाख है.  जम्मू डिविजन की कुल जनसंख्या अनुमानतया 65 लाख तथा क्षेत्र फल 26,293 वर्ग किलोमीटर है ,वर्तमान में जम्मू डिविजन से 37 विधायक चुने जाते हैं. कश्मीर डिविजन  का क्षेत्र फल  15,948 वर्ग किलोमीटर  तथा अनुमानित जनसंख्या 72 लाख तथा 46 विधायक चुने जाते हैं. लद्दाख  से 4 विधायक चुने जाते हैं जबकि इसका क्षेत्र फल 59146 वर्ग किलोमीटर तथा अनुमानित जनसंख्या 3 लाख 60 हजार है. जम्मू कश्मीर विधान सभा में  विधायकों की अधिकतम संख्या 111 निर्धारित हैं.वर्तमान में 87 विधायक निर्वाचित किए जाते हैं जबकि शेष 24 स्थान पाक और चीन के द्वारा अतिक्रमित क्षेत्रों के लिए आरक्षित हैं. नवीन प्रावधानों के अनुसार जम्मू और काश्मीर डिविजन संयुक्त प्रस्तावित केंद्र शासित प्रदेश का हिस्सा होंगें.


आज की यह जोड़ी विश्व की नंबर एक की जोडी है।

दिल्ली तथा पुद्दिचेरी की तरह नवीन राज्य के विधायी प्रमुख उप राज्यपाल होंगे.राज्य विधानसभा में विधायकों की अनुमानित संख्या 70 होगी .राज्य में मुख्य मंत्री तथा मंत्री मण्डल का प्रावधान किया गया है.हालांकि राज्य पुलिस,स्थानीय प्रशासन अधिकारियों की नियुक्ति ,भूमि आवंटन तथा वित्तीय संसाधनों का  निर्धारण उपराज्यपाल द्वारा केंद्र शासन की अनुमति से  ही होगा.विधानसभा द्वारा पारित सभी विधायी कार्यों के क्रियावन के लिये राष्ट्रपति की पूर्व संतुति आवश्यक है.लद्दाख – कारगिल केंद्र शासित प्रदेश का प्रशासन  पूर्ण विधायी एवं कार्यपालिका की शक्तियाँ उप राज्यपाल  संस्थान के द्वारा केन्द्रीय शासन द्वारा संचालित होगा तथा इस राज्य में विधानसभा अथवा मुख्य मंत्री का प्रावधान नहीं होगा. हालांकि लोकसभा ,राज्य सभा तथा राष्ट्रपति के चुनाव की प्रक्रिया दोनों प्रस्तावित केंद्र शासित प्रदेशों के मतदाताओं को दिल्ली ,पुद्दुचेरी और चंडीगढ़ के समान ही अधिकार प्राप्त होंगे. इस प्रकार सम्पूर्ण  जम्मू और काश्मीर राज्य के प्रशासन पूर्णरूपेण भारतीय संविधान के अनुरूप केंद्र शासन द्वारा संचालित होगा.


जब धारा 370 को सदन में पेश किया गृहमंत्री ने।

अतः इस अति महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील राज्य के समग्र एवं सम्पूर्ण विकास का अविरल एवं सतत स्त्रोत निर्विवाद बहेगा. दोहरी नागरिकता के जटिल प्रावधानों से मुक्त होने से उच्च शिक्षा ,स्वास्थ्य सेवाओं,उद्योग, गृह एवं सड़क निर्माण में भारत के अन्य राज्यों के समान ही प्रगति संभावित है.
जम्मू और कश्मीर प्रवासी अचल संपत्ति (संरक्षण, संरक्षण और संकट बिक्री पर संयम) अधिनियम, 1997 (1997 के अधिनियम संख्या Xvi) में  प्रवासी की संपत्ति के संरक्षण  के प्रावधान  हैं. हालांकि इस अधिनियम का वास्तविक कार्यान्वयन भूमि संपत्ति के रिकॉर्ड को जानबूझकर नष्ट करने, शक्तिशाली स्थानीय लोगों और आतंकवादियों द्वारा संपत्तियों के अवैध कब्जे के साथ-साथ इस पर स्थानीय प्रशासन की पूर्ण विफलता और अनिच्छा के कारण अप्रभावी रहा.पाक अधिकृत कश्मीर से 1947 के बाद विस्थापित  हुए और 1965 और 71 युद्ध के बाद  छंब से विस्थापित 36384  परिवारों के तथा  62000 कश्मीरी पंडितों के परिवारों के  पुनर्वास उनकी संपत्ति को सरकारी नियंत्रण में वापस लाने तथा कश्मीरी पंडितों को उनकी संपत्ति वापस  करने के लिए एक व्यापक तथा सार्थक प्रयास संभव हो सकेगें.

हालांकि इस तथ्य से इंकार नहीं किया जा सकता है की अलगाव वादी शक्तियाँ तथा पाकिस्तान द्वारा केंद्र शासन की इस त्वरित कार्यवाही का हर संभव मुद्धे विरोध करेंगें. अंतराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र संघ और अन्य संस्थाओं में लगातार विरोध करेगा. अमेरिका और चीन द्वारा सांकेतिक विरोध संभव है.परन्तु प्रधान मंत्री की दृढ़ इक्षा शक्ति ,वर्तमान में भारत की शक्तिशाली सामरिक और आर्थिक स्थिति में कोई भी राष्ट्र भारत की अनदेखी नहीं कर सकता है. यह सर्वथा उचित समय है  जब भारत को पाक द्वारा कश्मीर के भाग के अनधिकृत अतिक्रमण तथा वहाँ की आबादी के मानव अधिकारों के दमन के विरुद्ध कठोर प्रयास कर पूर्ण कश्मीर को अतिशीघ्र भारतीय संविधान ,न्याय तथा  कार्य पालिका के  प्रावधानों के अंतर्गत समाहित किया जाना चाहिये.


प्रतीकात्मक तस्वीर।

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