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जल जीवन मिशन के जरिए 28 माह में 5. 44 करोड़ से अधिक घरों में नल से जलापूर्ति
सरकार हर घर जल योजना के तहत पूरे देश में जलापूर्ति करने के लिए काम में जुटी

आकाश श्रीवास्तव

थर्ड आई वर्ल्ड न्यूज़ नेटवर्क

नई दिल्ली,20 दिसंबर 2021

मोदी सरकार देश के लोगों को स्वच्छ जल पीने को मिले इसे लेकर मिशन मोड़ पर काम कर रही है। इस मिशन को जन जन तक पहुंचाने के लिए दिल्ली में यूनिसेफ के सहयोग से मीडिया की भूमिका को लेकर एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मीडिया को इस मिशन की जानकारी देते हुए राष्ट्रीय जल जीवन मिशन के अतिरिक्त सचिव एवं मिशन निदेशक भरत लाल ने कहा, "ग्रामीण घरों में नियमित और दीर्घकालिक स्वच्छ नल जल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए जल जीवन मिशन के बारे में जागरूकता पैदा करने और समुदायों को उनके स्वयं के संचालन और प्रबंधन में शामिल होने में मीडिया की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है। सरकार द्वारा नल जल उपलब्ध कराने, स्वास्थ्य में सुधार लाने और ग्रामीण जनसंख्या विशेषकर ग्रामीण भारत में महिलाओं और बच्चों को जीवन में सुगमता प्रदान करने के लिए जल जीवन मिशन को सरकार की विभिन्न इकाइयों युद्ध स्तर पर काम कर रही हैं। 

भरत लाल ने मीडिया से आग्रह किया कि वे लोगों को स्वच्छ नल जल के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराएं और जल जीवन मिशन को जन आंदोलन बनाने में मदद करें। प्रिंट, ऑनलाइन, रेडियो और टीवी के 80 से अधिक राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय मीडिया प्रतिनिधियों ने सभी ग्रामीण घरों को स्वच्छ नल का पानी की आपूर्ति प्रदान करने में मिशन की दृष्टि, उद्देश्यों, प्राथमिकताओं और उपलब्धियों पर केंद्रित 'जल जीवन मिशन पर मीडिया के साथ बातचीत' कार्यक्रम में भाग लिया। अब तक 4.5 लाख गांवों में वीडब्ल्यूएससी या पानी समिति का गठन किया गया है और 3.37 लाख गांवों के लिए ग्राम कार्य योजना तैयार की गई है।फील्ड टेस्ट किट (एफटीके) का उपयोग करके पानी की गुणवत्ता का परीक्षण करने के लिए 8.5 लाख से अधिक महिला स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित किया गया है। 

वे नमूने एकत्र करते हैं और इसकी गुणवत्ता का परीक्षण करते हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आपूर्ति किया गया जल निर्धारित मानकों के अनुसार है। एफटीके की परीक्षण रिपोर्ट जेजेएम पोर्टल पर अपलोड की जाती है। आज, देश में 2,000 से अधिक जल परीक्षण प्रयोगशालाएँ हैं जो पानी की गुणवत्ता का परीक्षण करने के लिए मामूली कीमत पर जनता के लिए कार्यरत हैं। जल जीवन मिशन के तहत, पानी की कमी वाले क्षेत्रों, गुणवत्ता प्रभावित गांवों, आकांक्षी जिलों, अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति बहुल गांवों और सांसद आदर्श ग्राम योजना (एसएजीवाई) के तहत गांवों को प्राथमिकता दी जाती है। 

जेई-एईएस प्रभावित जिलों में नल जल की आपूर्ति 8 लाख (3%) घरों से बढ़कर 1.19 करोड़ (39.38%) घरों में हो गई है और आकांक्षी जिलों में यह 24 लाख (7%) घरों से 1.28 करोड़ (38%) हो गई है। देश के स्कूलों, आश्रमशालाओं और आंगनबाडी केंद्रों में बच्चों को  सुरक्षित नल जल सुनिश्चित करने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 100 दिनों के अभियान की घोषणा की, जिसका शुभारंभ केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने 2 अक्टूबर 2020 को किया। केंद्रों का उपयोग बच्चों और शिक्षकों द्वारा पीने, मध्याह्न भोजन पकाने, हाथ धोने और शौचालयों में किया जाता है। अब तक 8.33 लाख (81.33%) स्कूलों और 8.76 लाख (78.48%) आंगनवाड़ी केंद्रों को उनके परिसरों में नल जल उपलब्ध कराया गया है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, आंध्र प्रदेश, दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव, गोवा, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, कर्नाटक, केरल, पुडुचेरी, पंजाब, सिक्किम, तमिलनाडु, तेलंगाना और उत्तराखंड राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों के सभी स्कूलों को नल जल आपूर्ति प्रदान की गई है। प्रधानमंत्री के 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास' विजन के सिद्धांत का अनुपालन करते हुए इस मिशन का आदर्श वाक्‍य है कि 'कोई भी छूटे नहीं' और प्रत्‍येक ग्रामीण परिवार को नल के पानी का कनेक्शन उपलब्‍ध कराया गया है। वर्तमान में 83 जिलों के प्रत्येक घर और 1.28 लाख से अधिक गांवों में नल से जलापूर्ति हो रही है।

कार्यक्रम में यूनिसेफ इंडिया के वाश के प्रमुख निकोलस ओस्बर्ट और यूनिसेफ इंडिया के संचार, समर्थन और भादीदारी के प्रमुख सुश्री जाफरिन चौधरी भी कार्यक्रम में उपस्थित थे। भरत लाल ने मिशन के आदर्श वाक्य कि 'कोई भी छूटे नहीं' और हर गांव में नल जल की आपूर्ति के प्रबंधन के लिए एक उत्तरदायी और जिम्मेदार नेतृत्व विकसित करने के बारे में, भरत लाल ने कहा कि इसका उद्देश्य हर गांव को 'वाश प्रबुद्ध गांव' बनाना है। जल जीवन मिशन के कार्यान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन के बारे में सभी जानकारी सार्वजनिक है।
 
मिशन के तहत सभी ग्रामीण घरों के साथ-साथ हर स्कूल, आंगनवाड़ी केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों, सीएचसी, सामुदायिक केंद्रों आदि को स्वच्छ नल जल की आपूर्ति सुनिश्चित करना है।" यूनिसेफ इंडिया के वाश के प्रमुख निकोलस ओस्बर्ट ने मीडिया को जेजेएम में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए आमंत्रित करते हुए कहा, 'हर घर में स्वच्छ नल जल की आपूर्ति प्रदान करने और इस प्रकार समुदायों को सशक्त बनाने, स्वच्छता और पर्यावरण को बढ़ावा देने के द्वारा सार्वजनिक स्वास्थ्य पर इस उत्कृष्ट निवेश के अवसर का लाभ उठाएं'।
 
2019 में मिशन की शुरुआत में, देश के 19.20 करोड़ ग्रामीण परिवारों में से केवल 3.23 करोड़ (17%) के पास नल जल की आपूर्ति थी। कोविड-19 महामारी और उसके बाद के लॉकडाउन के कारण चुनौतियों का सामना करने के बावजूद, 5.44 करोड़ (28.31%) से अधिक परिवारों को मिशन के शुभारंभ के बाद से नल जल मुहैया कराया गया। वर्तमान में, 8.67 करोड़ (45.15%) ग्रामीण परिवारों को नल जल उपलब्ध कराया गया है। गोवा, तेलंगाना, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव, पुडुचेरी और हरियाणा 'हर घर जल' बन गए हैं, यानी इन राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों के सभी ग्रामीण घरों में नल जल की पूर्ति की गई है। 









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