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सामाजिक न्याय मंत्रालय गरीब अनुसूचित पिछडे वर्ग के कल्याण के लिए समर्पित - डॉ वीरेंद्र कुमार
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने पिछले आठ साल के कार्या का लेखा जोखा देश के सामने रखा

आकाश श्रीवास्तव

थर्ड आई वर्ल्ड न्यूज़ नेटवर्क

नई दिल्ली, 6 जून 2022

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिशा निर्देश में किए गए पिछले आठ साल के कार्यो का लेखा जोखा सोमवार को देश के सामने पेश किया। मंत्रालय के मंत्री डॉक्टर वीरेंद्र कुमार ने मंत्रालय की तमाम उपलब्धियों को मीडिया के सामने रखते हुए कहा कि मंत्रालय ने देश के निचले स्तर तक पहुंचने वाले कल्याणकारी योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। मंत्री ने कहा कि आजादी के 75वें वर्ष की यादगार में, आजादी का अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में तथा आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार के लिए इस शानदार यात्रा का  अवसर पर सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय सहभागी रहा।
मंत्री ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि यह विभाग सामाजिक, शैक्षिक तथा आर्थिक रूप से लाभवंचित वर्गों जैसे कि अनुसूचित जातियां, अन्य पिछड़े वर्ग, वरिष्ठ नागरिक, मद्यपान तथा नशीले पदार्थों के दुरूपयोग के पीड़ितों, ट्रांसजेंडर व्यक्तियो, भिखारियों, विमुक्त तथा घमंतू जनजातियों (डीएनटी), आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों (ईबीसी) तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्गो (ईडब्ल्यूएस) का सशक्तिकरण करके एक समावेशी समाज का निर्माण करने के सपने को साकार करने का प्रयास कर रहा है। यह विभाग उपर्युक्त लक्ष्य समूह के सदस्यों के उत्थान हेतु विभिन्न स्कीमों का कार्यान्वयन करता रहा है। अत्याचारों की रोकथाम के लिए नोडल मंत्रालय होने के नाते, इस मंत्रालय ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) {पीओए} अधिनियम, 1989 को, अन्य बातों के साथ-साथ, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सदस्यों के विरूद्ध अत्याचारों के निवारण हेतु अधिनियमित किया गया था; पूरे देश में समतावादी समाज की स्थापना करने लिए वर्ष 2018 में अधिनियम में खंड 18 (क) को अंत:स्थापित करके नियमावली में संशोधन करके इसेऔर अधिक निवारक और प्रभावी बनाया गया है।

मंत्रालय ने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों को संरक्षण प्रदान करने और उनके कल्याणार्थ "उभयलिंगी व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019" अधिनियमित किया है। ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए वर्ष 2019 में भारत के संविधान के 103वें संशोधन के माध्यम से अनुच्छेद 15(6) और अनुच्छेद 16(6) को अंत:स्थापित करके आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए 10% आरक्षण का प्रावधान किया गया है। यह विभाग समाज के लाभवंचित वर्गों को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मानिर्भर बनाने के लिए अपने निगमों के माध्यम से विभिन्न कौशल विकास और ऋण स्कीमों का कार्यान्वयन कर रहा है। वित्तीय वर्ष 2014-15 से 8286 करोड़ की राशि खर्च करके अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, डीएनटी, ईबीसी और सफाई कर्मचारियों सहित लाभवंचित वर्गों के 20 लाख से अधिक व्यक्ति लाभान्वित हुए हैं।

2016-17 में विशिष्ट दिव्यांगजन पहचान पत्र परियोजना का शुभारंभ किया गया ताकि दिव्यां6गजनों के लिए एक राष्ट्रीय डेटाबेस का सृजन किया जा सके। 01.06.2022 की स्थिति के अनुसार, सभी राज्योंर/संघ राज्य क्षेत्रों के 716 जिलों में 73.89 लाख विशिष्ट दिव्यांिगता आईडी कार्ड जनरेट किए गए हैं। वर्ष 2019 से 5 दिव्य कला शक्ति कार्यक्रमों का आयोजन किया गया (राष्ट्रीय स्तर पर 02 और क्षेत्रीय स्तर पर 03) ताकि प्रदर्शन और ललित कला में दिव्यां3ग बच्चे और युवा अपनी आंतरिक क्षमता को प्रदर्शित कर सकें। टोक्यो में आयोजित 2020 पैरालिंपिक्स‍ के प्रतिभागियों को विभाग द्वारा सम्मानित किया गया। विभाग और सीसीपीडी कार्यालय ने आरपीडब्ल्यूडी अधिनियम, 2016 के बारे में, दिव्यांडगजनों  के सशक्तिकरण और समावेशन के लिए भारत सरकार की विभिन्न पहलों और योजनाओं और कार्यक्रमों के बारे में जागरूकता सृजन हेतु केवडिया, गुजरात में 4 से 5 मार्च, 2022 को दो दिवसीय संवेदीकरण कार्यशाला का संयुक्तऔ रूप से आयोजन किया।
अनुसूचित जातियों (एससी), अन्य पिछड़े वर्गों (ओबीसी), विमुक्त तथा घुमंतू जनजातियों (डीएनटी) के शैक्षिक उत्थान हेतु विभिन्न स्कीमें कार्यान्वित की जा रही हैं। वित्तीय वर्ष 2014-15 से शुरूआत करके 36164 करोड़ रूपए की राशि व्यय की गई है तथा निम्निलिखित स्कीमों के कार्यान्वयन से 11 करोड़ से अधिक छात्र लाभान्वित हुए हैं। एससी छात्रों तथा अन्यों के लिए मैट्रिक-पूर्व छात्रवृत्ति:224.70 लाख लाभार्थी तथा लगभग 3280.07 करोड़ रूपए का व्यय का व्यय। एससी छात्रों के लिए मैट्रिकोत्तर छात्रवृत्ति 434.29 लाख लाभार्थी तथा लगभग 24968.55 करोड़ रूपए का व्यय। प्रधानमंत्री-अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (पीएम-अजय) का एक घटक: बाबू जगजीवन राम छात्रावास योजना:173 छात्रावासों के निर्माण हेतु मंजूर 342.5  करोड़ रूपए जिससे 15800 लाभार्थी छात्र लाभान्वित हुए।
एससी तथा ओबीसी छात्रों (एफसीएस) के लिए नि:शुल्क कोचिंग स्कीम- वर्ष 2014-15 से लगभग 91.37  करोड़ रूपए का व्यय करलगभग 19437 लाभार्थी लाभान्वित हुए। एससी (टीसीएस) के लिए उत्कृष्ट श्रेणी छात्रवृत्ति स्कीम –वर्ष 2014-15 से लगभग 313.48  करोड़ रूपए का व्यय तथालगभग 17817 लाभार्थी लाभान्वित हुए। एससी आदि छात्रों (एनओएस) के लिए राष्ट्रीय समुद्रपारीय छात्रवृत्ति स्कीम-वर्ष 2014-15 से लगभग 152.23 करोड़ रूपए का व्यय तथा  534 – लाभार्थी लाभान्वित हुए।
एससी के लिए राष्ट्रीय फेलोशिप स्कीम (एनएफएससी) -वर्ष 2014-15 से लगभग 1511.65  करोड़ रूपए का व्यय तथा 18036 लाभार्थीलाभान्वित हुए। लक्षित क्षेत्रों के उच्च विद्यालयों में आवासीय शिक्षा स्कीम (श्रेष्ठा) कुल 247 करोड़ रूपए का व्यय किया गया जिससे  1,55,715 एससी छात्र लाभान्वित हुए। ओबीसी, ईबीसी और डीएनटी छात्रों के लिए मैट्रिक-पूर्व छात्रवृत्ति -563.9 लाख लाभार्थी और लगभग 1195.33 करोड़ रुपए का व्यय हुआ। ओबीसी, ईबीसी और डीएनटी छात्रों के लिए मैट्रिकोत्तर छात्रवृत्ति- 302.05 लाख लाभार्थी औरलगभग 8186.56 करोड़ रूपए का व्यय हुआ।
ओबीसी, ईबीसी और डीएनटी छात्रों के लिए उत्कृष्ट श्रेणी स्कूल शिक्षा-नई पहल की गई है। ओबीसी छात्र और छात्राओं के लिए छात्रावास का निर्माण- 16870 सीटों वाले छात्रावासों के निर्माण के लिए लगभग260.70 करोड़ रुपए का व्यय हुआ। यह विभाग अनुसूचित जातियों (एससी), वरिष्ठ नागरिकों, मद्यपान तथा नशीले पदार्थ के दुरुपयोग के पीड़ितों, ट्रांसजेंडर व्यक्तियों, भिखारियों आदि के सामाजिक उत्थान के लिए स्कीमों का कार्यान्वयन कर रहा है। विभाग ने सामाजिक सुरक्षा के मोर्चे पर लगभग  10304 करोड़ रुपए खर्च किए हैं और पिछले 08 वर्षों के दौरान 42 लाख से अधिक लोग लाभान्वित हुए हैं।
 नशा मुक्त भारत अभियान (एनएमबीए) - वर्तमान में, लगभग 357 आईआरसीए, 78 ओडीआईसी, 55 सीपीएलआईऔर 35 एटीएफपूरे देश में विस्तारित हैं। जमीनी स्तर पर की गई विभिन्न कार्य कलापों के माध्यम से अब तक 2.46 करोड़ से अधिक लोगों से संपर्क किया गया है जिनमें 1.17 करोड़ युवा और 30 लाख महिलाएं शामिल हैं।









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