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अपराध जगत

आयुर्विज्ञान सैफई के कुलपति प्रभाकर के खिलाफ जांच के आदेश, कहीं लीपा-पोता तो नहीं!
योगी सरकार सैफई आयुर्विज्ञान विवि के कुलपति के खिलाफ कार्रवाई करने में लचर क्यों?

अरशद जमाल

इटावा

११ फरवरी २०१७

आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई के कुलपति डॉक्टर टी प्रभाकर द्वारा विश्वविद्यालय के अधिनियम में  वास्तविक उम्र को छुपाकर लगभग डेढ़ साल से लगातार अवैध रूप से  कुलपति की कुर्सी पर बने हुए हैं।  टी प्रभाकर अपने पद पर  कार्यरत रहने के बाबजूद उनको पद से ना हटाए जाने के प्रकरण पर मुख्यमंत्री को आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत किये जाने के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसचिव ने पूरे प्रकरण पर जाँच अपर मुख्य सचिव चिकित्सा शिक्षा को अन्तरित कर कार्यवाही करने के लिए आदेश दे दिया है।


अब अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा  ने प्रकरण की जाँच महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण को सौंप कर 19 फरबरी 2018 तक अपनी आख्या सौंपने के निर्देश जारी किए हैं। महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा ने पूरे प्रकरण पर जाँच कर कार्यवाही के लिए अपनी आख्या में लिखा "कि इस प्रकरण पर शासन स्तर से निर्णय लिया जाना है"। यानि प्रभाकरन का मुद्दा अब शासन  शासन स्तर पर पहुंच गया है। इस विश्वविद्यालय के कुलाधिपति खुद मुख्यमंत्री है और फैसला भी उन्हीं को लेना है। कुलपति टी प्रभाकर की वास्तविक जन्मतिथि 20 जुलाई 1947 है और इस हिसाब से वर्तमान में कुलपति 70 साल 6 माह 13 दिन के हो चुके हैं। विश्वविद्यालय के एक्ट 2015 की धारा 50  के अनुसार कुलपति केवल 68 वर्ष की आयु तक ही पद पर रह सकता है। पदभार 65 से कम की आयु में ग्रहण कर सकता है लेकिन सैफई विश्वविद्यालय के कुलपति ने अपनी नियुक्ति में उम्र के सभी तथ्यों को छुपाकर झूठ फरेब का सहारा लेकर शासन की आँखों मे धूल झोंक कर 69 साल की उम्र में अपनी नियुक्ति करवाई और आज भी 71 साल की उम्र में कुलपति की कुर्सी पर सेवारत हैं।


सपा सरकार के करीबी कुलपति टी प्रभाकर ने सैफई विश्विद्यालय में अपनी मर्जी का हर अवैध काम किया 2015 और 2016 की स्टॉफ नर्सिंग की भर्ती हो या फिर 2015 की लेब टेक्नीशियन की भर्ती हो हर नियुक्ति में टी प्रभाकर ने भ्रस्टाचार के बीज बोए। संस्थान में अपना एकछत्र राज्य चलाने वाले कुलपति की अगर सीबीआई जाँच हो तो इनके भ्रस्टाचार के ताबूत में लगी कीले स्वतः एक-एक कर बाहर निकल आएंगी। ताज्जुब की बात है कि सत्ता परिवर्तन के बावजूद भी शासन और सरकार को सब कुछ पता होने के बाबजूद भी प्रभाकरन के खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गयी।




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