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अपराध जगत

शिवराज के राज में नंगे किए गए पत्रकार, थानेदार का बेहूदा जवाब कपड़े नहीं उतरवाते तो फांसी लगा लेते
मध्य प्रदेश पुलिस ने वरिष्ठ आईपीएस अमित सिंह को मामले की जांच करने के लिए कहा

थर्ड आई वर्ल्ड न्यूज़ नेटवर्क

भोपाल के साथ नई दिल्ली टीम

8 अप्रैल 2022

मध्यप्रदेश के सीधी में पत्रकारों के साथ हुई अमानवीय घटना को लेकर पन्ना जिले में भी पत्रकारों ने भारी आक्रोश व्यक्त करते हुए जर्नलिस्ट यूनियन मध्य प्रदेश पन्ना इकाई द्वारा जिला कलेक्टर तथा पुलिस अधीक्षक ज्ञापन देकर संबंधित दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है तथा पुलिस कर्मियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने बर्खास्त करने की मांग की है। हम बता दें कि मध्य प्रदेश के सीधी के कोतवाली थाने में पत्रकार के कपड़े उतरवाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। रीवा ज़ोन के आईजी ने इस मामले में थाना प्रभारी और एक सब इंस्पेक्टर को लाइन अटैच कर दिया है। जो कि काफी नहीं है। वहीं कांग्रेस भी इस मामले में हमलावर हो गई है।
 
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इसे 'लॉकअप में लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का चीरहरण' बताया। इस मामले में संज्ञान लेकर मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस नरेन्द्र कुमार जैन ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) रीवा से एक सप्ताह में जवाब मांगा है। दरअसल, सीधी के कोतवाली थाने में पत्रकार कनिष्क तिवारी और अन्य लोगों पर धारा 151 के तहत केस दर्ज किया गया था। मामला भाजपा विधायक केदारनाथ सिंह से जुड़ा हुआ है। पत्रकार और रंगकर्मियों से थाने में कपड़े उतरवाए गए थे और उन्हें अंडरवियर में ही लॉकअप में बंद किया गया। इस मामले में थाना प्रभारी मनोज सोनी की सफाई भी सामने आई है। मनोज सोनी ने कहा कि पकड़े गए लोग पूरी तरह से न्यूड नहीं हैं। उन्होंने अंडरवियर पहन रखी है। हम सुरक्षा की दृष्टि से अपराधियों को हवालात में अंडरवियर में रखते हैं। पूरे कपड़े पहने होने पर अपराधी फांसी भी लगा सकते हैं। इस तरह की घटनाएं भी खूब हो रही हैं। इस वजह से हमने उनके कपड़े उतरवा लिए थे। 

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस मामले में अमर उजाला की खबर का स्क्रीनशॉट करते हुए लिखा कि 'लॉकअप में लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का चीरहरण! या तो सरकार की गोद में बैठकर उनके गुणगान गाओ, या जेल के चक्कर काटो। 'नए भारत' की सरकार, सच से डरती है।' वहीं, मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कमलनाथ ने सोशल मीडिया पर लिखा कि मध्यप्रदेश के सीधी में मीडिया से जुड़े लोगों की जिस तरह की तस्वीरें सामने आई है, वह बेहद शर्मनाक है। जिस तरह के राजनीतिक दबाव की बात सामने आ रही है, उसकी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। इस पूरे मामले में दोषियों पर जो कार्यवाही की गई है, वह नाकाफी है। जिम्मेदारों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। इससे पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं अरुण यादव, पीसी शर्मा, अजय सिंह से लेकर कई अन्य नेताओं ने इस मामले में शिवराज सरकार को घेरा था। 

कनिष्क तिवारी का वीडियो वायरल हो गया है। कनिष्क ने आरोप लगाया कि मुझे और मेरे परिवार को लगातार धमकी मिल रही है। बेवजह फर्जी मुकदमों में फंसा देंगे। हमारा पूरा परिवार डरा हुआ है। सभी से निवेदन है कि हमारे परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए। मुझे यह भी पता चला है कि मेरे ऊपर भी एक फर्जी एफआईआर करने की तैयारी की जा रही है। ताकि मुझे गिरफ्तार किया जा सके। यह षड्यंत्र किया जा रहा है। निवेदन है कि आवाज उठाइए। कोई पत्रकार सच नहीं लिख पाएगा। कभी किसी दबे-कुचले की आवाज नहीं उठाएगा। वहीं अब सीधी मामले को तूल पकड़ते देख प्रताड़ित पत्रकारों के लिए मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय ने एक टीम गठित कर वरिष्ठ  पुलिस अधिकारी आईपीएस अमित सिंह को निष्पक्षता के साथ जांच के लिए नियुक्त कर सीधी भेजा है। अमित सिंह के बारे में कहा जाता है कि वो ईमानदार और तेजतर्रार पुलिस अधिकारी है। अमित सिंह को जांच अधिकारी बनाए जाने के बाद पत्रकारों में एक निष्पक्षता की उम्मीद जगी है।  








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