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सेहत की बातें

सेंधा और काला नमक में आयोडीन नहीं, आयोडीन वाला ही नमक खाएं!
देश में ७६ प्रतिशत लोग आयोडीन वाला नमक खातें हैं जबकि २४ प्रतिशत लोगों में आयोडीन की कमी

आकाश श्रीवास्तव

थर्ड आई वर्ल्ड न्यूज़

नई दिल्ली, ९ सितंबर २०१९

देश के लगभग 76 प्रतिशत घरों में पर्याप्त रूप से आयोडीन युक्त नमक का सेवन किया जाता है। यानि देश के लगभग  24 प्रतिशत लोग आयोडीन वाला नमक नहीं खा रहे हैं। जो चिंता का विषय हो सकता है। यह दावा एक अध्ययन में किया गया है और आयोडीन के प्रति जागरुकता बढ़ाने के लिए और प्रयासों की जरूरत बताई गयी है। न्यूट्रिशन इंटरनेशनल नामक संस्था ने देशभर में ‘इंडिया आयोडीन सर्वे 2018- 19‘ नाम से यह अध्ययन किया जिसमें पता लगाया गया कि देश के सुदूर गांवों और अंचलों में आयोडीन युक्त नमक की कितनी मात्रा की खपत हो रही है।


एक सवाल के जवाब में बताया गया कि सेंधा नमक और काला नमक में आयोडीन नहीं होता है। इसलिए नमक वही खाया जाए जिसमें आयोडीन मिला हो। संवाददाता सम्मेलन में जब पूछा गया कि सेंधा नमक और काला नमक में आयोडीन क्यों नहीं मिलाया जा रहा है इस पर कहा गया कि इस बारे में गंभीरता से विचार किया जाएगा। हम बता दें कि आयोडीन मानव में मानसिक और शारीरिक विकास के लिए कम मात्रा में नियमित रूप से आवश्यक एक महत्वपूर्ण पोषक है। आयोडीन की कमी के कारण विकलांगता और अन्य विकार जैसे कि गण्डमाला, हाइपोथायरायडिज्म, क्रेटिनिज्म, गर्भपात, नवजात शिशु, मानसिक मंदता और साइकोमोटर दोष हो सकते हैं। आयोडीन की कमी वाले क्षेत्रों में पैदा होने वाले बच्चों में, आयोडीन पर्याप्त क्षेत्रों में पैदा होने वालों की तुलना में 13.5 आईक्यू अंक तक कम हो सकता है।

संस्था द्वारा आज यहां बताया गया कि अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली और एसोसिएशन फॉर इंडियन कॉलिशन फॉर द द कंट्रोल ऑफ आयोडीन डेफिशिएंसी डिसऑर्डर (आईसीसीआईडीडी) तथा कंटार के सहयोग से किए गए इस सर्वेक्षण से पता चला है कि देश के 76.3 प्रतिशत घरों में पर्याप्त रूप से आयोडीन युक्त नमक का सेवन किया जाता है। इसमें कहा गया है, ‘‘यह परिणाम भारत में नमक में आयोडीन की मात्रा के प्रति जागरुकता बढ़ाने की दिशा में हुई प्रगति को दर्शाता है जिसमें पर्याप्त आयोडीन युक्त नमक के साथ 90 प्रतिशत आबादी तक पहुंचने का लक्ष्य है।


दिल्ली में मीडिया को जानकारी देते हुए विशेषज्ञ!

रिपोर्ट के अनुसार यह परिणाम यह भी दर्शाता है कि इतने वर्षों से इस क्षेत्र में किये गये प्रयास से इतने घरों में आयोडीन युक्त नमक को पहुंचाने में सफलता मिली है। जिसकी मदद से लोगों को आयोडीन की कमी से होने वाले गंभीर रोगों से बचाया जा सके। इन प्रयासों को और बढ़ाने की जरूरत है।’’





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