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धर्म/तीज़-त्यौहार

योग ध्यान ही गीता का सार मर्म़ है’’- डा नागेन्द्र
भगवत गीता पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारम्भ हुआ

थर्ड आई वर्ल्ड न्यूज़

१० जुलाई २०१७

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के स्थानीय पटौदी रोड पर स्थित ओमशान्ति रीट्रिट सेन्टर में दो दिवसीय राष्ट्रीय भगवत गीता सम्मेलन का आज शुभारम्भ करते हुए योग गुरू डा नागेन्द्र ने कहा कि योग और ध्यान ही भगवत गीता के सार मर्म है। उन्होंने कहा कि भगवत गीता एक योग शास्त्र है न की हिंसक युद्ध की शास्त्र। वास्तव में गीता में वर्णित युद्ध मनुष्य के अन्दर के विकारों और अवगुणों के विरूद्ध आन्तरिक लड़ाई है जो दैवी गुणों की आसुरी अवगुणों पर विजय का सूचक है।


उन्होंने आगे कहा कि इस योग शिक्षा को स्कूल स्तर से विश्वविद्यालय स्तर तक लागू करने का प्रयास भारत सरकार कर रही है और इसी से ही एक सकारात्मक और स्वस्थ परिवर्तन बच्चों, व्यक्तियों एवं समाज में आ सकता है। इस सम्मेलन के मुख्य संयोजक राजयोगी बी0के0ब्रजमोहन ने सम्मेलन के मुख्य उद्देश्य के बारे में अवगत कराया तथा ब्रह्माकुमारी संस्था, माउण्ट आबू से पधारे गीता स्काॅलर राजयोगिनी ऊषा तथा जबलपुर से पधारे भगवत गीता व्याख्याकार डाॅ0 पुष्पा पाण्डेय ने भगवत गीता और अहिंसा परमोधर्म पर भारत के विभिन्न प्रान्तों से आये हुए गीता विशेषज्ञ एवं उपकुलपति आदियों के साथ सवाल-जवाब किया।

निष्कर्ष में सबने सहमति व्यक्त की कि गीता में वर्णित युद्ध आन्तरिक विकारों के विरूद्ध अहिंसक युद्ध है और ये गीता ज्ञान जो निराकार परमपिता परमात्मा के द्वारा वर्तमान कलयुग रूपी अति धर्मग्लानी के समय पर एक सभ्य एवं सुसंस्कृत समाज अर्थात सतयुग की स्थापना के लिये दिया गया था। सभी ने ब्रह्माकुमारी संस्था द्वारा दी जा रही आध्यात्मिक शिक्षा एवं राजयोग ध्यान को परमात्मा के द्वारा दी जा रहे वास्तविक गीता ज्ञान व योग का व्यवहारिक रूप कहा। 





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