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धर्म/तीज़-त्यौहार

जीएसटी की मार से बाजार से दीपावली की रौनक गायब!
बाजार में नहीं आ रहे हैं ग्राहक!

आकाश श्रीवास्तव

थर्ड आई वर्ल्ड न्यूज़

नई दिल्ली, १३ अक्टूबर २०१७

अब जबकि दीवाली में केवल एक सप्ताह का समय शेष रह गया है और ख़रीदारी हर वर्ष अपनी चरम सीमा पर होती है इस वर्ष देशभर के बाज़ारों में सन्नाटा छाया हुआ है और दिवाली का त्योहारी माहौल अभी तक बन नहीं पाया है। बाज़ारों में ग्राहकों की आवाजाही बेहद कम है और व्यापारियों का अनुमान है की अभी गत वर्ष के मुक़ाबले लगभग बिक्री में 30 प्रतिशत की गिरावट है। व्यापारियों ने इस वर्ष अच्छे त्योहारी सीज़न का अनुमान लगाते हुए काफ़ी मात्रा में चीज़ों का स्टॉक कर लिया है और अब उनकी चिंता है की स्टॉक का क्या होगा।


कन्सूमर डयूरबल, एफ एम सी जी प्रॉडक्ट्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, किचन सामान, लगिज , घड़ियाँ, गिफ़्ट आइटम, मिठाइयाँ, ड्राई फ़्रूट, होम डेकोर, बिजली फ़िटिंग, रेडी मेड गारमेंट, डेकरेशन आइटम, फ़र्निशिंग फ़ैब्रिक, आदि कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जो मंदी से सीधे प्रभावित हुए हैं जबकि बाज़ारों में अन्य वस्तुओं की मानद में भी काफ़ी कमी है। रीयल एस्टेट, सोना चाँदी, बूलियन आदि में भी हाल कुछ अच्छा नहीं है। भारत में त्योहारी सीज़न पहले नवरात्र से शुरू होकर 14 दिसम्बर तक चलता है और फिर दोबारा 14 जनवरी से शुरू होकर एप्रैल तक चलता है और इसी बीच दिसम्बर में क्रिसमस और नव वर्ष का सीज़न भी आता है। कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी सी भरतिया एवं राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने बताया की क्योंकि उपभोक्ताओं की जेब में नक़द की तंगी है इस कारण से बाज़ारों में मंदी का माहौल है।

उपभोक्ता अधिकांश बेहद ज़रूरी सामान ही ख़रीद रहे हैं और दिवाली त्योहार की ख़रीद से बच रहे हैं। लोगों ने बड़ी मात्रा में रियल इस्टेट और सोने में निवेश कर रखा है और इन दोनो क्षेत्रों में मंदी के कारण से उनका पैसा ब्लाक हो गया है। दूसरी तरफ़ व्यापारियों ने अपना पैसा स्टॉक में निवेश कर दिया जिसके कारण उनका पैसा भी ब्लाक हो गया है। ई कामर्स कम्पनियों द्वारा सरकार की नीतियों की धज्जियाँ उड़ाते हुए बड़ी मात्रा में डिस्काउंट देकर सामान बेचने का भी विपरीत प्रभाव बाज़ारों के व्यापार पर पड़ा है। ऊपर से जीएसटी से उपजे भ्रम ने बाज़ारों में अफ़रा तफ़री फैला रखी है और व्यापारी परेशान है।


त्योहार से जुड़े अधिकांश सामान पर कर की दर 28 प्रतिशत होने के कारण उपभोक्ता इतनी ज़्यादा कर देना नहीं चाहता। बाज़ारों के माहौल को देखते हुए लगता ही नहीं की देश का इतना बड़ा त्योहार नज़दीक है और यदि यही हाल रहा तो इस बार व्यापारियों को बड़ा नुक़सान झेलना पड़ेगा।




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