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राममंदिर विवाद, मध्यस्थता का मौका देते हुए फैसला सुरक्षित

थर्ड आई वर्ल्ड न्यूज़

नई दिल्ली

६ फरवरी २०१९

सर्वोच्च न्यायालय ने राम जन्मभूमि- बाबरी मस्जिद जमीन विवाद में आज फैसला सुरक्षित रख लिया। कोर्ट ने कहा इसमें मध्यस्थता की गुंजाइश है इसलिए हम मामले को सुरक्षित रखते हैं। उल्लेखनीय है अयोध्या में राम मंदिर का मामला राजनीतिक और धार्मिक, और भावनात्मक रूप से बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील है। सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीष रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 5 जजों की संवैधानिक बेंच ने साफ कहा कि हम अयोध्या जमीन विवाद और इसके प्रभाव को गंभीरता से समझते हैं और जल्दी फैसला सुनाना चाहते हैं। बेंच ने आगे कहा कि अगर पार्टियां मध्यस्थों का नाम सुझाना चाहती हैं तो दे सकती हैं।


सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि उसका मानना है कि अगर मध्यस्थता की प्रक्रिया शुरू होती है तो इसके घटनाक्रमों पर मीडिया रिपोर्टिंग पूरी तरह से बैन होनी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि यह कोई गैग ऑर्डर (न बोलने देने का आदेश) नहीं है बल्कि सुझाव है कि रिपोर्टिंग नहीं होनी चाहिए। मुस्लिम पक्षों की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन ने भी कहा कि पूरी प्रक्रिया बेहद गोपनीय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मध्यस्थता की रिपोर्टिंग होती है तो सुप्रीम कोर्ट इसे अवमानना मान सकता है।

सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि ये भावनाओं और विश्वास का टकराव है। दिल और दिमाग को पाटने का सवाल है। हमें गंभीरता पता है और हम आगे मामले को देख रहे हैं। यह उचित नहीं है कि अभी कहा जाए कि नतीजा कुछ नहीं होगा। जस्टिस बोबडे ने कहा कि आपसी बातचीत से मामले का समाधान निकलना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ जमीन का नहीं, दिल-दिमाग और भावनाओं से जुड़ा मसला है। बुधवार को सुनवाई शुरू होते ही सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि वह इस बात का फैसला करेगा कि समय बचाने के लिए केस को कोर्ट की निगरानी में मध्यस्थता के लिए भेजा जा सकता है या नहीं।


इस बीच सर्वोच्च न्यायालय में हिंदू महासभा ने अपना पक्ष साफ रखते हुए कहा कि  इस मुद्दे पर मध्यस्थता नहीं हो सकती है। महासभा ने कहा कि भगवान राम की जमीन है, उन्हें (दूसरे पक्ष को) इसका हक नहीं है इसलिए इसे मध्यस्थता के लिए न भेजा जाए। रामलला विराजमान का भी कहना था कि मध्यस्थता से मामले का हल नहीं निकल सकता है। हालांकि इस मामले में निर्मोही अखाड़े और सुन्नी वक्फ बोर्ड ने मध्यस्थता का पक्ष लिया।


हिंदू महासभा में अपना पक्ष रखते हुए मध्यस्थता का विरोध किया। महासभा ने कहा कि कोर्ट को ही फैसला करना चाहिए। जब हिंदू पक्षों ने कहा कि मध्यस्थता निरर्थक प्रयास होगा क्योंकि हिंदू इसे एक भावनात्मक और धार्मिक मामले के तौर पर लेते हैं। उन्होंने कहा कि बाबर ने मंदिर को ध्वस्त किया था। इस पर जस्टिस एस. ए. बोबडे ने कहा, 'अतीत में क्या हुआ, उस पर हमारा नियंत्रण नहीं है। किसने हमला किया, कौन राजा था, मंदिर था या मस्जिद था। हम मौजूदा विवाद के बारे में जानते हैं। हमें सिर्फ विवाद के निपटारे की चिंता है।'



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