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अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि की रहस्यमयी मौत बनी एक पहेली

थर्ड आई वर्ल्ड न्यूज़ नेटवर्क

21 सितंबर 2021

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और प्रयागराज स्थित बाघंबरी मठ के महंत नरेंद्र गिरि की उनके आवास पर संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है. उनका शव प्रयागराज के अल्लापुर स्थित बांघबरी गद्दी मठ के एक कमरे में मिला है. प्रयागराज रेंज के पुलिस महानिरीक्षक केपी सिंह ने मीडिया को बताया कि ख़बर मिलते ही पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंच गए. आईजी केपी सिंह के मुताबिक, "फ़िलहाल यह आत्महत्या का मामला लग रहा है. फ़ोरेंसिक टीम को घटनास्थल पर बुलाया गया है. सभी पहलुओं से जांच की जा रही है."

पुलिस ने बताया है कि नरेंद्र गिरि के शव के पास से चार-पाँच पन्नों का एक कथित सुसाइड नोट मिला है जिसकी जाँच की जा रही है. प्रयागराज के आईजी केपी सिंह ने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि पहली नज़र में यह आत्महत्या का मामला लगता है. उन्होंने कहा, ''नरेंद्र गिरि के पास से जो सुसाइड नोट मिला है वो काफ़ी मार्मिक है. उन्होंने लिखा है कि वो आश्रम के कुछ साथियों से काफ़ी दुखी थे.'' केपी सिंह के मुताबिक नरेंद्र गिरि ने लिखा है कि वो जिस दिन से आश्रम में आए, हमेशा इसे आगे ले जाने के लिए काम किया.

सुसाइड नोट में लिखा है कि उन्होंने आश्रम का एक पैसा भी इधर-उधर नहीं किया. सुसाइड नोट के मुताबिक़ नरेंद्र गिरि ने लिखा है कि 'मैं सम्मान के लिए जीता था और सम्मान के लिए ही आत्महत्या कर रहा हूँ. पिछले दिनों उनका अपने शिष्य और योग गुरु आनंद गिरि के साथ हुआ विवाद काफ़ी सुर्ख़ियों में था. आनंद गिरि को उन्होंने अखाड़ा परिषद और बाघंबरी मठ से निष्कासित कर दिया था. उस वक़्त दोनों ने एक-दूसरे पर बेहद गंभीर आरोप लगाए थे. केपी सिंह ने बताया कि सुसाइड नोट में उन्होंने आनंद गिरि का नाम भी लिखा है. हालाँकि उन्होंने यह भी कहा कि नोट की जाँच होनी अभी बाकी है इसलिए इस बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं दी जा सकती.

आनंद गिरि ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को पत्र भेजकर अखाड़े के विवाद की जानकारी दी थी और आरोप लगाया था कि शहर मठ की ज़मीनों को निजी स्तर पर बेचा जा रहा है. उन्होंने मठ की संपत्तियों और आमदनी की जांच की भी मांग की थी. हालांकि इस मामले में देश भर के तमाम साधु संतों ने महंत नरेंद्र गिरि का ही समर्थन किया था.

बाद में आनंद गिरि ने माफ़ी भी मांग ली थी लेकिन उनका निष्कासन वापस नहीं किया गया था. अभी कुछ हफ़्ते पहले ही अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के नाम से बने फ़र्जी अकाउंट से कई विवादित ट्वीट किए गए थे जिसे लेकर महंत नरेंद्र गिरि ने दारागंज थाने में अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज कराया था.
बाघंबरी मठ के महंत के नाते स्थानीय लोगों के अलावा राजनीतिक दलों के नेताओं का भी उनके यहां आना-जाना था.

प्रयागराज आगमन पर तमाम बडे़ नेता और मशहूर लोग संगम स्थित हनुमान जी के दर्शन करने और उनसे मिलने ज़रूर आते थे. रविवार को भी उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने मंदिर जाकर उनसे आशीर्वाद लिया था. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने महंत नरेंद्र गिरि के निधन पर शोक व्यक्त किया है.
साभार-बीबीसी।



नहीे रहे महंत नरेंद्र गिरी।





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