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'काल का पहिया यूं घूमे रे भइया'..., नीरज का जाना बहुत अख़र रहा है!

थर्ड आई वर्ल्ड न्यूज़

नई दिल्ली

२१ जुलाई २०१८

हिंदी के प्रख्यात, मूर्धन्य, कालजयी और हिंदी सिनेमा के महानतम कवि और गीतकार गोपालदास 'नीरज' का गुरुवार को निधन हो गया है। वे पिछले कई दिनों से बीमार चल रहे थे। उन्हें मंगलवार को आगरा के अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था। तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर बुधवार को उन्हें दिल्ली के एम्स अस्पताल लाया गया था, जहां उन्हें ट्रामा सेंटर के आईसीयू में भर्ती कराया गया था और यहीं उन्होंने अंतिम सांस ली।


गोपाल दास 'नीरज' के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से घोषणा की गई कि 'नीरज' की अंतिम यात्रा राजकीय सम्मान के साथ निकाली जाएगी। इसके अलावा यूपी सरकार की ओर से 'नीरज' की याद में हर वर्ष प्रदेश के पांच नवोदित कवियों को एक-एक लाख रुपये के नकद पुरस्कार, अंगवस्त्र और सम्मान पत्र दिए जाने की घोषणा की गई है।

पद्मश्री और पद्मभूषण से सम्मानित 93 वर्षीय नीरज पहले ऐसे व्यक्ति थे, जिन्हें भारत सरकार ने शिक्षा और साहित्य क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने पर दो-दो बार सम्मानित किया था। गोपाल दास नीरज को पद्मभूषण साल 2007 में मिला था, जबकि इससे पहले उन्हें 1991 में पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा यूपी की समाजवादी सरकार ने भी उन्हें यश भारती पुरस्कार से सम्मानित किया था। बताया जा रहा है कि 93 साल के कवि नीरज आगरा के बल्केश्वर में रहने वाली अपनी बेटी कुंदनिका शर्मा के घर आए थे। यहां मंगलवार को सुबह के नाश्ते के बाद तबीयत बिगड़ गई थी। हालांकि उनकी तबीयत लंबे समय से खराब चल रही थी। तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें दीवानी कचहरी के पास स्थित लोटस हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। यहां उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था। फेफड़ों में संक्रमण से बढ़ती तकलीफ ज्यादा बढ़ने से उन्हें सांस लेने में परेशानी होनी लगी थी, जिसके बाद वहां के डॉक्टरों ने उनके परिजनों को दिल्ली एम्स में ले जाने की सलाह दी थी।


हिंदी फिल्मों में कई सुपरहिट गाने लिखने वाले गोपाल दास नीरज का जन्म 4 जनवरी 1925 को यूपी के इटावा जिले के पुरवली गांव में हुआ था। गोपाल दास नीरज को हिंदी के उन कवियों में शुमार किया जाता है जिन्होंने मंच पर कविता को बेहद लोकप्रिय किया। बॉलिवुड में कई सुपरहिट गाने लिख चुके गोपालदास 'नीरज' को तीन बार फिल्म फेयर अवॉर्ड भी मिल चुका है, जिन गीतों पर उन्हें यह पुरस्कार मिला वो हैं- ‘काल का पहिया घूमे रे भइया!


(फ़िल्म: चन्दा और बिजली-1970), ‘ बस यही अपराध मैं हर बार करता हूं (फ़िल्म: पहचान-1971) और ‘ए भाई! ज़रा देख के चलो’ (फ़िल्म: मेरा नाम जोकर-1972)। 'प्रेम पुजारी' में देवानंद पर फिल्माया उनका गीत 'शोखियों में घोला जाए ..' भी उनके एक लोकप्रिय गीतों में शामिल है जो आज भी सुने जाते हैं।

गोपालदास को मुंबई से फिल्म ‘नई उमर की नई फसल’ के गीत लिखने का बुलावा आया, जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार कर लिया। पहली ही फिल्म में संगीतकार रोशन के साथ उनके लिखे कुछ गाने जैसे ‘कारवां गुजर गया गुबार देखते रहे’, और ‘देखती ही रहो आज दर्पण न तुम’, ‘प्यार का यह मुहूर्त निकल जायेगा’ बेहद लोकप्रिय हुए। उसके बाद गोपालदास का फ़िल्मों में गीत लिखने का सिलसिला शुरू हो गया जो ‘मेरा नाम जोकर’, ‘शर्मीली’ और ‘प्रेम पुजारी’ जैसी बहुतेरी चर्चित फिल्मों तक जारी रहा।



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