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रेलवे ने आधुनिकता पर दिया जोर, हेड ऑन जनरेशन” प्रणाली का उपयोग!

आकाश श्रीवास्तव

थर्ड आई वर्ल्ड न्यूज़

नई दिल्ली, ३ सितंबर २०१९

उत्तर रेलवे ने 14 जोड़ी प्रीमियम और मेल/एक्सप्रेस रेलगाड़ियों को “हेड ऑन जनरेशन” प्रणाली के सफलतापूर्वक इस्तेमाल से एक अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की है। वर्तमान में इस प्रणाली से 6 जोड़ी शताब्दी, 4 जोड़ी राजधानी, 12235/36 आनंद विहार टर्मिनल-मधुपुर जंक्शन हमसफर एक्सप्रेस, 22401 दिल्ली सराय रोहिल्ला उधमपुर वातानुकूलित एक्सप्रेस और प्रतिष्ठित 12280/79 ताज एक्सप्रेस तथा 12497/98 शान-ए-पंजाब एक्सप्रेस रेलगाड़ियां चलाई जा रही हैं। इसके परिणामस्वरूप डीजल की खपत में लगने वाले लगभग 42 करोड़ रुपए सालाना की बचत हुई है। निकट भविष्य में “हेड ऑन जनरेशन” प्रणाली से और 11 जोड़ी रेलगाड़ियां, जिनमें 2 शताब्दी एक्सप्रेस, 2 दुरन्तो और 7 मेल/एक्सप्रेस रेलगाड़ियों को चलाये जाने की योजना है।


भारतीय रेलवे की कई अनेक प्रीमियम और मेल/एक्सप्रेस रेलगाड़ियों में एलएचबी डिब्बे इस्तेमाल किये जा रहे हैं। इन्टीग्रल कोच फैक्ट्री के परंपरागत डिब्बों से अलग ये एलएचबी कोच वातानुकूलन, बिजली, पंखे, चार्जिंग प्वाइंट्स और रसोई यान में लगने वाली बिजली, जिसे सामूहिक रूप से “होटल लोड” कहा जाता है, की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करते हैं। इस उद्देश्य के लिए रैक के दोनों सिरों पर प्राय: लगाये जाने वाले पावर कार में जनरेटर का इस्तेमाल “एण्ड ऑन जनरेशन” प्रणाली के रूप में किया जाता है। पावर इलैक्ट्रॉनिक्स, कन्ट्रोल सिस्टम और पावर सप्लाई सिस्टम के क्षेत्र में तकनीकी उन्नयन और निरन्तर प्रगति के चलते भारतीय रेलवे रेल डिब्बों में बिजली की आपूर्ति के लिए “हेड ऑन जनरेशन” प्रणाली को अपना रही है। इस प्रणाली में रेलगाड़ी के होटल लोड के लिए पावर कार की बजाय बिजली की आपूर्ति विद्युत लोकोमोटिव से की जाती है। इंजन के पेन्टोग्राफ से विद्युत करंट को टैप करके पहले ट्रांसफार्मर को भेजा जाता है और फिर डिब्बों की विद्युत आवश्यकताओं के लिए 750 वोल्ट, 3-फेज 50 हर्ट्ज में परिवर्तित किया जाता है।

यह प्रणाली पर्यावरण के अनुकूल, किफायती और परिचालन में लाभदायक है। उपकरणों की विफलता के कारण रेल परिचालन के दौरान होने वाली गड़बड़ियों को कम करने की दिशा में यह भरोसेमंद है। पावर कार के स्थान पर यात्री डिब्बों को लगाकर रेलवे अतिरिक्त राजस्व भी अर्जित कर सकती है। बिजली के उत्पादन के लिए डीजल का कोई उपयोग नहीं है अत: जीवाश्म ईंधन के जलने से होने वाले वायु प्रदूषण की संभावना भी समाप्त हो जाती है साथ ही पावर कार से होने वाला तेज ध्वनि प्रदूषण भी रोकने में मदद मिली है। ऐसे पर्यावरण अनुकूल उपायों को अपनाकर भारतीय रेलवे, जोकि परिवहन का एक हरित माध्यम है, अपने कार्बन फूटप्रिंट को कम करके “कार्बन क्रेडिट” अर्जित कर रही है।





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