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गजब है देश की न्याय प्रणाली, जिंदा मुर्दा हो गया और 20 साल पहले मरे व्यक्ति को सजा मुक्त कर दिया
उ.प्र में सरकारी कर्मचारियों ने जिंदा को मुर्दा कर दिया, अधिकारी जिंदा को जिंदा मान ही नहीं रहे

थर्ड आई वर्ल्ड न्यूज़ नेटवर्क

25 जनवरी 2021

देश की सिस्टम प्रणाली से सताया जहां आम आदमी का अंतिम सहारा और उम्मीद न्यायालय से होती है वहीं एक समय ऐसे आता है जब आम आदमी सिस्टम और न्यायालय की कार्य प्रणाली से बेदम हो जाता है। सरकारी अधिकारियों के दफ्तर और अदालतों की चौखट पर आते-जाते उसके पैरों की चप्पल घिसकर खत्म हो जाती है। और न्याय उचित समय में नहीं मिल पाता है। देश में दो ऐसे मामले सामने आए हैं, जो सभी तो हैरान करने वाले हैं। एक केस मुंबई का है जहां एक दोषी के मरने के 20 साल बाद कोर्ट ने उन्हें बरी किया है। दूसरा केस उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद का है, जहां एक 80 साल की बुजुर्ग को मरा बताकर उसकी पेंशन बंद कर दी गई। अब वह खुद को जिंदा साबित करने के लिए धक्के खा रही हैं।


सांकेतिक तस्वीर। सिर्फ फाइल उपयोग के लिए।

1985 के एक षडयंत्र के मामले में आरोपी सेल्स टैक्स ऑफिसर को कोर्ट ने 25 साल पहले दोषी मान लिया था। ऑफिसर को 18 महीने की जेल और 26000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। बीस साल पहले उनकी मौत हो गई। दोषी अफसर के मरने के 20 साल बाद कोर्ट ने उन्हें बरी किया है। मामला सेल्ट टैक्स के रिफंड के झूठे दावे को बनाने और हासिल करने की साजिश का था। सितंबर 1996 में सोलापुर में एक विशेष ट्रायल कोर्ट ने सुरेश कागने और दो अन्य सेल्स टैक्स अधिकारियों को दोषी ठहराया था। उन्हें सजा सुनाई थी। इस मामले में एक तिल मिल मालिक और उसक बेटा भी आरोपी था। 94 अभियोजन पक्ष के गवाहों में से 92 की गवाही के बाद इस मामले में आरोपी तेल मिल के मालिक और उसके बेटे को आरोपों से बरी कर दिया गया था। सुरेश और दो अन्य अधिकारियों ने हाई कोर्ट में अपील दायर की। हाई कोर्ट में मामला चल रहा था। बीस साल पहले अधिकारी की मौत हो गई। उनकी पत्नी और बेटे कोर्ट के चक्कर काटने लगे। 19 जनवरी को हाई कोर्ट ने अधिकारी को दोषमुक्त कर दिया।

वहीं उत्तर प्रदेश में के मुरादाबाद की रहने वाली 80 साल की महिला को सरकारी दस्तावेजों ने मरा बता दिया। अब वह खुद को जिंदा साबित करने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रही हैं। बुजुर्ग ने बताया कि उनकी पेंशन दो साल पहले बंद कर दी गई। वह हाल ही में संपूर्ण समाधान दिवस में शिकायत करने पहुंची लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। शरीफन ने बताया कि उनकी पेंशन लगभग दो साल पहले अचानक रोक दी गई। उन्होंने अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन कुछ नहीं हुआ। तमाम चक्कर काटने के बाद में पता चला कि उनका नाम विधवा पेंशन लाभार्थियों की सूची से हटा दिया गया है क्योंकि उन्हें मृत घोषित हैं। उनके रिश्तेदार और वह कई बार अधिकारियों के पास मिलने पहुंचीं। कई बार शिकायतें कीं लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। दो साल से बुजुर्ग खुद को जिंदा साबित करने के लिए तमाम दस्तावेज लेकर पहुंचीं। खुद अधिकारियों के सामने खड़े होकर कहा, 'मैं जिंदा हूं' लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई। इस मामले में मुरादाबाद के उप-विभागीय मैजिस्ट्रेट प्रशांत तिवारी ने कहा कि इस मामले में अधिकारियों की लापरवाही है उनसे भूल सुधारने के लिए कहा गया है।





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