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आखिरकार बिक ही गया एनडीटीवी!

थर्ड आई वर्ल्ड न्यूज़

नई दिल्ली

२२ सितंबर २०१७

एक ख़बर जोरों से चल रही है कि आखिरकार एनडीटीवी बिक गया। वरिष्ठ पत्रकार ओम थानवी में अपने फेसबुक वॉल पर पोस्ट किया है, आख़िर NDTV भी क़ब्ज़े कर लिया गया। मसालों के नाम पर स्पाइस-जेट हवाई कम्पनी चलाने वाले अजय सिंह अब यह तय करेंगे कि एनडीटीवी के चैनलों पर क्या दिखाया जाए, क्या नहीं। इसका मुँह-चाहा फ़ायदा उन्हें सरकार से मिलेगा। इस हाथ दे, उस हाथ ले। एक मसाला-छाप व्यापारी को और क्या चाहिए? इस ख़रीदफ़रोख़्त के बीच कुछ पत्रकार तो पहले ही एनडीटीवी छोड़कर जा चुके हैं। कुछ चले जाएँगे। कुछ को चलता कर दिया जाएगा। फिर एक संजीदा, सच दिखाने वाले चैनल में बचा क्या रह जाएगा? हींग-जीरा, लौंग-इलायची?


मैंने कुछ ही रोज़ पहले एक विश्वविद्यालय में बोलते हुए कहा था कि यह दौर मीडिया को मैनेज करने का उतना नहीं, जितना उसे अपने लोगों द्वारा ख़रीदवा लेने का है। न रहेगा बाँस, न बजेगी बाँसुरी। ससुरी बजेगी तो बेसुरी बजेगी। जब इस सरकार के लिए इतनी पहले से बज रही हैं - Zee News, CNN-IBN, ETV, RepublicTV आदि - तो एक और सही। उन्हें भी ख़रीद कर पीछे से क़ब्ज़े किया गया था। एनडीटीवी भी उसी गति को प्राप्त हुआ। उम्मीद है अब उसे छापों आदि से शांति नसीब होगी। नए ज़माने में चैन से ज़िंदा रहना ज़रूरी है, जूझते रहने से। आगे ओम थानवी ने लिखते है एनडीटीवी को ख़रीदने वाले अजय सिंह कौन हैं?
वही जिन्होंने नारा गढ़ा था - अबकी बार मोदी सरकार। जी हाँ, अजय सिंह 2014 के चुनाव में भाजपा अभियान समिति के सदस्य थे। नारा सुझाने का श्रेय उन्हें दिया जाता है। अटलबिहारी वाजपेयी के ज़माने में अजय भाजपा के सामान्य सेवक थे, प्रमोद महाजन के क़रीबी। महाजन ने उन्हें अपना ओएसडी बनाया, नई संचार नीति बनाने का ज़िम्मा सौंपा। मोदी के पदार्पण पर वे उनके साथ हुए। सौदेबाज़ी और तकनीकी 'बुद्धि' की जितनी पहचान महाजन को थी, मोदी को उनसे कम नहीं। अजय सिंह को साथ लेकर और अब चैनल ख़रीद में आगे खड़ा उन्होंने यही साबित किया है।

एक्सप्रेस पर छपी ख़बर को पढ़ने के लिए इस लिंक को क्लिक करें --->  अजय सिंह बने एडीटीवी के नए मालिक?


फेसबुक वॉल से।




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