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स्वच्छता के लिए सभी की भागीदारी जरूरी है - नरेंद्र सिंह तोमर, केंद्रीय मंत्री
पब्लिक टॉक ऑफ इंडिया ने पूरे जोश के साथ मनाया अपना तीसरा वार्षिक समारोह

आकाश श्रीवास्तव

थर्ड आई वर्ल्ड न्यूज़

नई दिल्ली। १० मई २०१७

केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती मंत्री ने कहा है कि देश की स्वच्छता की भागीदारी में सभी का सहयोग होना जरूरी है। तभी भारत को स्वच्छ बनाया जा सकता है। अकेले सरकार के बूते स्वच्छ भारत का निर्माण नहीं किया जा सकता है। इसके लिए आम भारतीयों के मन में संकल्प होना चाहिए। तभी हम देश के हर कोने को स्वच्छ बना सकते हैं। तोमर पब्लिक टॉक ऑफ इंडिया के तीसर वार्षिक सम्मेलन में बोल रहे थे। जिसका आयोजन दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में किया गया। स्वच्छ भारत अभियान और मीडिया की भूमिका को विषय पर वे बोल रहे थे।


कार्यक्रम का उद्घाटन करते केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर। साथ में पब्लिक टॉक ऑफ इंडिया के संपादक कुंदन कुमार।

इससे पूर्व पब्लिक टॉक ऑफ इंडिया के प्रधान संपादक कुंदन कुमार ने  मुख्य अतिथियो को सम्मानित किया। समारोह के मुख्य अतिथि ग्रामीण विकास, पंचायती राज, पेय जल एवं स्वच्छता मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर थे। उन्होंने कहा कि स्वच्छता अभियान का असर धीरे धीरे आ रहा है। इसमें मीडिया की भूमिका भी अहम है। इस मौके पर वरिष्ठ पत्रकार अरविन्द मोहन ने कहा कि चंपारण के पूरे ईलाके में और अन्य जगहों पर जैसै जैसे हैंड पंप का विस्तार हुआ है। इसके साथ ही पानी में आर्सेनिक की मात्रा देखी गयी है। लोग आर्सेनिक के चपेट में आ रहे हैं। जबकि पहले जो पानी की व्यवस्था थी उस लिहाज से लोगों ने काफी होशियारी दिखाई थी। लोग पानी के लिए गांवो में कुओं का इस्तेमाल करते थे। कुओं का पानी आज भी बेहतर है। हैंड पंप के बढ़ते इस्तेमाल के साथ आर्सेनिक आया है। कई ऐसे उदाहरण मिलते हैं जिसमें हमारी जो पुरानी पीढ़ी थी वो साबुन का इस्तेमाल नहीं करती थी बावजूद इसके शारीरिक साफ सफाई के लिहाज से वे काफी सजग थे।



पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के विषय में कहा जाता है कि वे केवल होली के दिन ही साबुन लगाते थे। बावजूद इसके वे शारीरिक तौर पर काफी साफ सुथरे रहते थे। साबुन के बढ़ते इस्तेमाल के साथ गंदगी बढ़ी है या कम हुई है इस सवाल पर भी विचार किया जाना चाहिए। वर्तमान सरकार ने स्वच्छता को लेकर पहल की है। प्रधानमंत्री इसे लेकर गंभीर हैं। ऐसे में मीडिया की अपनी जवाबदेही है। पत्रकार इस दिशा में लिख रहे हैं। उनका दायित्व निगरानी का भी है। वे समीक्षा करें, जहां गड़बड़ दिखे उसे उजागर करें। लेकिन साथ ही यह भी जरूरी है जहां यह अभियान समाज के अनुभव से अलग जा रहा है उस पर भी लिखा जाये। इसके साथ ही सरकार द्वारा भी राजनीतिक अभियान और स्वच्छता अभियान के बीच के फासले को पाटा जाना जरूरी है।


सरकारी स्तर पर कोशिश हो रही है लेकिन एक बार झाड़ू उठाने से बात नहीं बनेगी। जो लोग स्वच्छता अभियान को लीड कर रहे हैं वो गांधी से सीखें,परिस्थिति जन्य अनुभवों से सीखें तभी स्व्च्छाग्रह का सपना साकार होगा और देश साफ सुथरा होगा।



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