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बीट पत्रकारों के साथ सूचना अधिकारियों का सौतेला व्यवहार, पत्रकारों में रोष!

थर्ड आई वर्ल्ड न्यूज़

नई दिल्ली

भारत सरकार के पत्र सूचना कार्यालय और विभिन्न मंत्रालयों के सूचना अधिकारियों द्वारा चुनिंदा मीडिया घरानों और उनके पत्रकारों को तरजीह दिए जाने से आम पत्रकारों जो विभिन्न मंत्रालयों के बीट लंबे समय से कवर करते आ रहे हैं उनमें भारी नाराजगी और निराशा है। इस तरह से सरकार के सूचना अधिकारियों द्वारा एक नई परिपाटी का जन्म दिया जा रहा है। जिसकी वजह से बीट कवर करने वाले पत्रकारों में नराजगी और निराशा घर कर जाना लाजमी है। ख़बर के लिए रोजाना मंत्रालयों के चक्कर लगाने वाले पत्रकारों को उस समय झटका लगता है जब पता चलता है कि आज अमुक मंत्रालय के कार्यक्रम में सिर्फ चुनिंदा 8-10 पत्रकारों को ही बुलाया गया।


बाकी के बीट पत्रकारों को सूचना अधिकारियों द्वारा नकारा समझकर किनारे कर दिया जाता है। इसी तरह राजधानी से बाहर आयोजित होने वाले कार्यक्रम को कवर करने के लिए जो मीडिया टूर का आयोजन किया जाता है उनमें भी उन्हीं पत्रकारों को तरजीह दी जाती है जिनका ख़बरों से वास्ता कम होता है बल्कि उनकी महारत मंत्रालय के काम-काज की चापलूसी और दलाली करने में ज्यादा होती है। जिनका पत्रकारिता से लेना देना नहीं होता है। आश्चर्य तब होता है जब संबंधित सूचना अधिकारी पलकें बिछाए इन्हीं पत्रकारों का स्वागत करने के लिए तैयार रहते हैं। जबकि इन्हीं पत्रकारों और उनके संगठनों को मंत्रालय की तरफ से विज्ञापन भी मुहैय्या कराया जाता है। यानि दमदार आवाभगत होती है।

जबकि उन पत्रकारों को तरजीह नहीं दी जाती है जिनका चप्पल मंत्रालय के ख़बर निकालने में घिस जाती है, जो सिर्फ अपने काम से मतलब रखते हैं। सूचना अधिकारियों के इस नयी कार्य संस्कृति की वजह से मेहनतकश पत्रकारों में घोर निराशा पनप रही है। ध्यान देने वाली बात तो यह है कि जब बुक रिलीज की ख़बर होती है या फीता काटना होता है तो सभी पत्रकारों को आमंत्रित किया जाता है और जब कोई खास प्रेस कांफ्रेंस जैसे कार्यक्रमों का आयोजन होता है तो उन्हीं चापलूसों को फोन करके बुलाया जाता है जो सूचना अधिकारियों के चहेते होते हैं। उन्हीं पत्रकारों एवं उनके संगठनों को मंत्रालय के अधिकारियों द्वारा विज्ञापन दिलवाने में भी मदद की जाती है। यही नहीं सूचना अधिकारियों के मेलिंग लिस्ट में भी खास कटेगरी होती है। प्रेस रिलीज भेजनी है तो 5 सौ पत्रकारों को भेजी जाएगी। खास क्रार्यक्रम है जो 5-10 को मेल भेज दी जाती है। बाहर कवरेज से संबंधित यदि टूर का आयोजन है तो 15-20 को आमंत्रण भेजा जाता है। आखिर ऐसा क्यों किया जाता है? बीट के बाकी पत्रकारों के साथ ऐसा घिनौना खेल क्यों खेला जाता है, उनकी अहमियत को क्यों दरकिनार कर दिया जाता? 13 सितंबर 2017।





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