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मीडिया को धमकाने पर कांग्रेस ने गंभीर मुद्दा बताया

नई दिल्ली

29 सितंबर 2017

कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने गुरुवार को वरिष्ठ पत्रकारों को सोशल मीडिया पर धमकाए जाने पर गहरी चिंता प्रकट की। जाने माने पत्रकार राजदीप सरदेसाई और रवीश कुमार ने कुछ लोगों द्वारा सोशल मीडिया पर धमकी दिए जाने संबधी अलग-अलग पत्र केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह, महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष अशोक चव्हाण और राकांपा की वरिष्ठ नेता सुप्रिया सुले-पवार को भेजे हैं। चव्हाण ने कहा, "सीधा लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला किया जाना बेहद खतरनाक चलन है।


प्रतीकात्मक फोटो उपयोग के लिए।

विशेष रूप से तर्कवादी लेखकों व पत्रकारों जैसे नरेंद्र दाभोलकर, एम.एम. कलबुर्गी, गोविंद पनसारे और हाल ही में गौरी लंकेश की हत्या को देखते हुए।" उन्होंने राजनाथ सिंह को बताया कि ये हत्याएं भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे शर्मनाक अध्याय है। वहीं, सुप्रिया सुले ने केंद्रीय मंत्री से आग्रह किया, "हमारे लोकतंत्र में, संविधान में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनी हुई है, राजदीप सरदेसाई और रवीश कुमार लोकतांत्रिक तरीके से अपना काम कर रहे हैं। उनकी आवाज को धमकियों के सहारे चुप कराना अस्वीकार्य है, सभी दलों को पार्टी लाइन से आगे आकर इसका मुकाबला करना चाहिए।" चव्हाण और सुप्रिया ने राजनाथ से अपील की है कि यह सुनिश्चित किया जाए कि सरदेसाई और कुमार को इन खतरों से कोई शारीरिक हानि न पहुंचे और धमकी देने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं। नेताओं ने कहा, केंद्रीय गृहमंत्री की ओर से अगर त्वरित कार्रवाई की जाए तो वे लोग हतोत्साहित होंगे, जो हिंसा करते हैं या करने की इच्छा रखते हैं और देश में धर्मनिरपेक्ष समाज के तानेबाने को नष्ट करने का इरादा रखते हैं।

पत्रकारों ने नई दिल्ली और नोएडा में पुलिस से शिकायत की है कि उन्हें नरेंद्र मोदी सरकार, भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की आलोचना करने पर गंभीर नतीजे भुगतने की धमकी दी गई है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में काम कर रहे पत्रकारों को पिछले एक सप्ताह से सोशल मीडिया पर धमकियां दी जा रही हैं। इनकी असहिष्णुता को देखते हुए वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम खुला पत्र भी लिखा। उन्होंने मोदी से कहा है, "दुख की बात है कि अभद्र भाषा और धमकी देने वाले कुछ लोगों को आप ट्विटर पर फॉलो करते हैं। सार्वजनिक रूप से उजागर होने, विवाद होने के बाद भी फॉलो करते हैं। भारत के प्रधानमंत्री की सोहबत में ऐसे लोग हों, यह न तो आपको शोभा देता है और न आपके पद की गरिमा को।"





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