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प्रधानमंत्री कार्यालय के निर्देश के बाद ईरानी को वापस लेना पड़ा फैसला

थर्ड आई वर्ल्ड न्यूज़

नई दिल्ली

४ अप्रैल २०१८

फेक न्यूज देने पर पत्रकारों की मान्यता रद्द करने की सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के फरमान को प्रधानमंत्री कार्यालय ने वापस लेने को कहा है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने पूरे मामले में दखल देते हुए स्मृति इरानी के मंत्रालय से कहा कि फेक न्यूज को लेकर जारी की गई प्रेस रिलीज को वापस लिया जाना चाहिए। पीएमओ ने कहा कि यह पूरा मसला प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया और प्रेस संगठनों पर छोड़ देना चाहिए। पीएमओ ने कहा कि ऐसे मामलों में सिर्फ प्रेस काउंसिल को ही सुनवाई का अधिकार है।


इससे पहले सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ओर से जारी किए गए नोटिफिकेश की विपक्षी दलों के नेताओं ने यह कहते हुए निंदा की थी कि सेंसरशिप गलत है। वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद केटीएस तुलसी ने कहा था कि यह कोई गाइडलाइंस नहीं है बल्कि नई बोतल में पुरानी शराब की तर्ज पर सेंसरशिप लगाने जैसा है। हम बता दें कि सोमवार को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ओर से कहा गया था किअगर कोई पत्रकार फर्जी खबरें करता हुआ या इनका दुष्प्रचार करते हुए पाया जाता है तो उसकी मान्यता स्थाई रूप से रद्द की जा सकती है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने एक विज्ञप्ति में कहा था कि पत्रकारों की मान्यता के लिये संशोधित दिशानिर्देशों के मुताबिक अगर फर्जी खबर के प्रकाशन या प्रसारण की पुष्टि होती है तो पहली बार ऐसा करते पाये जाने पर पत्रकार की मान्यता छह महीने के लिये निलंबित की जाएगी। दूसरी बार फेक न्यूज करते पाये जाने पर उसकी मान्यता एक साल के लिए निलंबित की जाएगी। इसके अनुसार, तीसरी बार उल्लंघन करते पाये जाने पर पत्रकार (महिला/ पुरूष) की मान्यता स्थाई रूप से रद्द कर दी जाएगी। मंत्रालय ने कहा कि अगर फर्जी खबर के मामले प्रिंट मीडिया से संबद्ध हैं तो इसकी कोई भी शिकायत भारतीय प्रेस परिषद( पीसीआई) को भेजी जाएगी।

सरकार लगता है फेक न्यूज से परेशान हो गई है। तभी लिया है एक बड़ा फैसला, अगर फेक न्यूज पाई गई तो खबर लिखने वाले पत्रकार की मान्यता रद्द की जा सकती है। इनफॉरमेशन एंड ब्रॉकास्टिंग मिनिस्ट्री ने एक प्रेस रिलीज के जरिए फेक न्यूज पर नई गाइडलाइंस के बारे में जानकारी दी है। इन नई गाइडलाइंस के मुताबिक अगर फेक न्यूज की पहली घटना होती है तो खबर लिखने वाले पत्रकार की 6 महीने के लिए मान्यता निलम्बित कर दी जाएगी। अगर दोबारा उसी पत्रकार ने फिर कोई फेक न्यूज लिखी तो 1 साल के लिए मान्यता निलम्बित होगी और अगर ऐसी तीसरी घटना उसी पत्रकार के साथ पाई जाती है तो उसकी मान्यता हमेशा के लिए रद्द कर दी जाएगी।


सरकार ने तय किया है कि फेक न्यूज की शिकायतें प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (प्रिंट के लिए) और न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन से की जा सकेगी। 15 दिन के लिए इन दोनों संस्थाओं के तय करना होगा कि खबर फेक है या नहीं। उसके बाद प्रेस इनफॉरमेशन ब्यूरो (पीआईबी) की एक्रिडेशन कमेटी इन संस्थाओं की रिपोर्ट के आधार पर एक्शन लेगी। इसी रिलीज में ये भी लिखा है कि दोनों संस्थाओं को 'नॉर्म्स ऑफ जर्नलिस्टिक कंडक्ट' और 'कोड ऑफ इथिक्स एंड ब्रॉडकास्टिंग स्टैंडर्ड' का भी पालन सुनिश्चित करना होगा।


दिलचस्प बात ये है कि मान्यता सरकार उन्हीं की रद्द या निलम्बित कर सकती है, जिनकी पीआईबी मान्यता है, लेकिन ज्यादातर खबरें तो वो लिख रहे हैं इन दिनों, जिनको कोई मान्यता ही नहीं है। फेक न्यूज का सबसे बड़ा सोर्स और जनरेटर वेब मीडिया, जिसकी कोई मान्यता सरकार देता नहीं और उस पर कोई गाइडलाइंस तक तो सरकार बना नहीं पाई है। ये जरूर है कि इसके जरिए सरकार पीआईबी मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकारों के लिए मुश्किलें पैदा कर सकती है। ऐसें में सूचना-प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी फिर से विवादों में आ सकती हैं। फिलहाल इस मामले में अब पीएमओ के हस्ताक्षेप के बाद मामला ठंडे बस्ते में जाता दिख रहा है।



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