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देश एवं राजनीति

हिंदी को राजभाषा का दर्जा मिले - राम विलास पासवान

आकाश श्रीवास्तव

थर्ड आई वर्ल्ड न्यूज़

नई दिल्ली, १४ सितंबर २०१९

लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष और केन्द्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री रामविलास पासवान जी ने हिन्दी दिवस के अवसर पर शनिवार को कहा कि लोक जनशक्ति पार्टी सरकार से मांग करती है कि सरकार संविधान में संशोधन कर उच्चतम न्यायालय, उच्च न्यायालयों सहित सभी न्यायालयों में हिन्दी एवं अन्य क्षेत्रीय भाषाओं के प्रयोग की अनुमति दे। अंग्रेजी की अनिवार्यता को खत्म करे। साथ ही हिन्दी को राजभाषा का दर्जा देने का काम करे। संविधान सभा ने 14 सितम्बीर, 1949 को हिन्दी को संघ की राजभाषा स्वी कार करते हुए संविधान के भाग 5 एवं 6 के क्रमश: अनुच्छेकद 120 तथा 210 में तथा भाग 17 के अनुच्छे द 343, 344, 345, 346, 347, 348, 349, 350 तथा 351 में राजभाषा हिन्दी के प्रावधान किए।


फाइल फोटो।

और भारत की 22 भाषाओं को संविधान की अनुसूची-8 में मान्यता दी गई है। ये भाषाएं इस प्रकार हैं-  हिन्दी , पंजाबी, उर्दू, कश्मी री, संस्कृदत असमिया, ओड़िया, बांग्ला , गुजराती, मराठी, सिंधी, तमिल, तेलुगु, मलयालम, कन्नड़, मणिपुरी, कोंकणी, नेपाली, संथाली, मैथिली, बोडो और डोगरी। सन् 1967 में 21वें संविधान संशोधन द्वारा सिंधी भाषा 8वीं अनुसूचीमें जोड़ी गई थी। सन् 1992 में 71वें संविधान संशोधन द्वारा कोंकणी, नेपाली तथा मणिपुरी भाषाएं 8वीं अनुसूची में जोड़ी गई थीं। सन् 2003 में 92वें संविधान संशोधन द्वारा संथाली, मैथिली, बोडो तथा डोगरी भाषाएं 8वीं अनुसूची में जोड़ी गई थीं।  अनुच्छे द 120 के खंड (1) के अंतर्गत प्रावधान किया गया है कि संविधान के अनुच्छेगद 348 संसद में कार्य हिन्दी  में या अंग्रेजी में किया जायेगा, परंतु लोक सभा का अध्य क्ष या राज्यव सभा का सभापति अथवा उस रूप में कार्य करने वाला व्येक्तिा सदन में किसी सदस्य  को, जो हिन्दी  में या अंग्रेजी में अपनी पर्याप्तज अभिव्य‍क्तिं नहीं कर सकता है, तो उसे अपनी मातृभाषा में सदन को संबोधित करने की अनुमति दे सकता है।

अनुच्छेद 343 के खंड (1) के अनुसार देवनागरी लिपि में लिखित हिन्दी संघ की राजभाषा है। संघ के शासकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग होने वाले अंकों का रूप भारतीय अंकों का अंतर्राष्ट्रीअय रूप होगा। तथापि संविधान के इसी अनुच्छेहद 343 के खंड(2)  के अनुसार किसी बात के होते हुए भी इस संविधान के लागू होने के समय से पन्द्रवह वर्ष की अवधि (अथार्त 26 जनवरी, 1965) तक संघ के उन सभी राजकीय प्रयोजनों के लिए वह संविधान के लागू होने के समय से ठीक पहले प्रयोग की जाती थी। (अर्थात 26 जनवरी, 1965 तक अंग्रेजी के उन सभी प्रयोजनों के लिए प्रयोग की जाती रहेगी, जिनके लिए वह संविधान के लागू होने के समय से पूर्व प्रयोग की जाती थी।


अनुच्छेद 343 के खंड (2) के अंतर्गत यह भी प्रावधान किया गया है कि उक्त पन्द्रह वर्ष की अवधि में भी अर्थात् 26 जनवरी, 1965 से पूर्व भी राष्ट्ररपति आदेश द्वारा किसी भी राजकीय प्रयोजन के लिए अंग्रेजी के साथ-साथ देवनागरी के प्रयोग की अनुमति दे सकते हैं।  लेकिन देश के लिए शर्म की बात है कि आजादी के 72 साल के बाद भी अंग्रेजी का विस्तादर दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है। हिन्दीि एवं भारतीय भाषा की स्थिेति दयनीय होती जा रही है। आज अंग्रेजी का स्थान महारानी जैसा है तथा हिन्दी एवं अन्य भाषाओं का स्थान नौकरानी जैसा। संविधान की धारा 348 के अनुसार जब तक संसद विधि द्वारा संशोधन न करे, तब तक उच्चतम न्यायलय और सभी उच्च न्यायालयों में सभी कार्यवाहियां अंग्रेजी भाषा में होगी।


संसद या राज्य के विधान मंडल द्वारा बनाए गए सभी आदेशों, नियमों, विनियमों और उप विधियों के प्राधिकृत पाठ अंग्रेजी भाषा में होंगे। संविधान के अनुच्छेयद 348(2) खंड(1) के उपखंड (क) में किसी राज्ये का राज्यगपाल, राष्ट्रमपति की पूर्व अनुमति से उस उच्च) न्यांयालय के कार्यवाहियों में हिन्दीी भाषा या उस राज्ये के शासकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग होने वाली किसी अन्यय भाषा का प्रयोग प्राधिकृत कर सकेगा। किन्तुक इस खंड की कोई बात उच्चो न्याकयालय द्वारा दिए गए आदेश पर लागू नहीं होगी। आज की तारीख में देश के सारे कामकाज अंग्रेजी में चल रहे हैं, हिन्दीग का प्रयोग नाममात्र का है। उच्चतम न्यायालय की सभी कार्यवाहियां अंग्रेजी में हैं। हिन्दी या अन्यन भारतीय भाषाओं के उपयोग की अनुमति नहीं है।


इसी तरीके से 4 उच्च् न्याीयालय बिहार, उत्तनर प्रदेश, राजस्थान और मध्यर प्रदेश को छोड़कर अन्यत किसी भी उच्च् न्यानयालय में अंग्रेजी को छोड़कर हिन्दी या स्थानीय भाषा का प्रयोग नहीं किया जा सकता। किसी भी आजाद देश की अपनी भाषा होती है जापान, सारे यूरोपीय देश, जर्मनी, चीन आदि की अपनी भाषा है और अपनी भाषा में कामकाज करके विकसित राष्ट्रश बने हैं। भाषा का संबंध पेट से होता है इस देश में अंग्रेजी भाषा, अंग्रेजों के आने के बाद शुरू हुई। इसके पहले उर्दू और फारसी भाषा थी। हिन्दी , संस्कृकत, देवनागरी भारत की सर्वाधिक पुरानी भाषा है, लेकिन अंग्रेजी के विस्ता र का मुख्य  कारण यह है कि भाषा का संबंध पेट से होता है।



जब लोगों को लगा कि नौकरियां और खासकर बड़ी-बड़ी नौकरियां अंग्रेजी माध्याम से मिलती है तो उन्होंकने जबरदस्ती  अंग्रेजी को सीखना शुरू कर दिया। अंग्रेजी को जबरदस्तीह राजभाषा के रूप में देश पर थोपा। अपनी हिन्दीत भाषा के संबंध में राष्ट्र पिता महात्मा गांधी ने 1918 में कहा था कि “भाषा माता के समान है और माता पर जो प्रेम होना चाहिए वह हम लोगों में नहीं है। हम अंग्रेजी के मोह में फंसे हैं। हमारी प्रजा अज्ञान में डुबी है। हमें ऐसा उद्योग करना चाहिए कि एक वर्ष में राजकीय भाषाओं में, कांग्रेस में, प्रांतीय सभाओं में तथा अन्यए सभा समाज में व सम्मे्लनों में अंग्रेजी का एक भी शब्दर सुनाई न पड़े। हम अंग्रेजी का व्य वहार बिलकुल त्याग दें।


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