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विज्ञान एवं रक्षा तकनीकि

दिल्ली में एक सप्ताह एक प्रयोगशाला की शुरूआत

आकाश श्रीवास्तव

थर्ड आई वर्ल्ड न्यूज़ नेटवर्क

नई दिल्ली, 7 जनवरी 2023

केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), डॉ जितेंद्र सिंह ने नई दिल्ली में "एक सप्ताह एक प्रयोगशाला (वन वीक वन लैब)" अभियान शुरू किया।  देश भर में फैली 37 वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की प्रयोगशालाओं में से प्रत्येक अपने कार्य के एक अलग विशिष्ट क्षेत्र के लिए समर्पित है और 'एक सप्ताह एक प्रयोगशाला (वन वीक वन लैब)" अभियान उनमें से प्रत्येक को अपने कार्य प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान करेगा, ताकि अन्य लोग इसका लाभ उठा सकें और हितधारक इसके बारे में सीख सकें। कालान्तर में ये प्रयोगशालाएं विशेषज्ञता के अपने संबंधित क्षेत्रों में अनुसंधान और नवाचार के वैश्विक केंद्रों में बदल जाएंगी।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि मई 2014 से सभी वैज्ञानिक प्रयासों के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र7 मोदी के सक्रिय और निरंतर समर्थन के साथ भारत, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार पारिस्थितिकी तन्त्र  में हर दिन नई ऊंचाइयों को छू रहा है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस मंगलवार से नागपुर में आयोजित हो रही 108वीं भारतीय विज्ञान कांग्रेस में प्रधानमंत्री के संबोधन का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कहा था, “हम उस वैज्ञानिक दृष्टिकोण के परिणाम भी देख रहे हं  जिसके साथ आज का भारत आगे बढ़ रहा है। भारत तेजी से विज्ञान के क्षेत्र में दुनिया के शीर्ष देशों में से एक बन रहा है। 130 देशों में हम 2015 तक वैश्विक नवाचार सूचकांक (ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स) में 81वें स्थान पर थे, लेकिन 2022 में हम 40वें स्थान पर पहुंच गए हैं। आज भारत शोधकार्यों (पीएचडी) के क्षेत्र में विश्व के शीर्ष तीन देशों में है। आज भारत स्टार्ट-अप पारिस्थितिक के मामले में दुनिया के शीर्ष तीन देशों में शामिल है।''

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि "वन वीक वन लैब" अभियान में, देश भर में फैली इसकी 37 घटक प्रयोगशालाओं में से प्रत्येक अपनी विरासत, विशेष नवाचारों और तकनीकी सफलताओं को हर सप्ताह प्रदर्शित करेगी। इस दौरान प्रयोगशालाएं सप्ताह भर चलने वाले कार्यक्रमों का आयोजन करेंगी जिनमें उद्योग और स्टार्ट-अप्स गोष्ठियां, छात्रों से परस्पर सम्पर्क (स्टूडेंट्स कनेक्ट), समाज के विभिन्न वर्गों से सम्पर्क (सोसाइटी कनेक्ट) तथा प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन आदि शामिल है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि पिछले एक दशक में, वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) ने देश को अपनी पहली जैव ईंधन-संचालित उड़ान, भारतीय निर्देशक द्रव्य,  हींग (ऐस्फोटिडा) की खेती, दंत प्रत्यारोपण के स्वदेशी विकास, सेल बस, स्टील स्लैग के साथ सड़क निर्माण, सीएसआईआर- टेक्नोएस रमन स्पेक्ट्रोमीटर का विकास, ट्रेनर विमान हंसा-एनजी और विभिन्न सीएसआईआर प्रयोगशालाओं में विकसित कई अन्य प्रौद्योगिकियां उच्च-रिज़ॉल्यूशन एक्विफर मैपिंग की तकनीक, स्वदेशी रूप से विकसित हाइड्रोजन ईंधन की सुविधा प्रदान की है।

डॉ. जितेंद्र सिंह को यह जानकर प्रसन्नता हुई कि 37 सीएसआईआर प्रयोगशालाओं में से प्रत्येक अद्वितीय है और उन्हें जीनोम से भूविज्ञान, भोजन से ईंधन, खनिज से सामग्री आदि जैसे विविध क्षेत्रों में उत्कृष्टता प्राप्त है। वैगानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद ने पिछले 80 वर्षों से पथप्रदर्शक तकनीकों और नवाचारों के साथ राष्ट्र में अपनी छाप छोड़ी है, उनमें से कुछ में अमिट स्याही, समानांतर कंप्यूटर फ़्लोसोल्वर, स्वराज ट्रैक्टर्स, सेंटक्रोमन, डीएनए फ़िंगरप्रिंटिंग, अरोमा मिशन और कई अन्य उपलब्धियां शामिल हैं।









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