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आगस्ता: मिशेल के प्रत्यपर्ण के पीछे एक मजबूर महिला की कहानी.?

आकाश श्रीवास्तव

थर्ड आई वर्ल्ड न्यूज़

नई दिल्ली

इन दिनों आगस्ता हेलीकॉप्टर के मामले में मिशेल की प्रत्यपर्ण चर्चा इन दिनों भारत में तेजी से चर्चा का विषय बना हुआ है। इस प्रत्यपर्ण के पीछे एक महिला की दर्द भरी कहानी भी छिपी है। यह कहानी है उस महिला की जो दुबई की शहज़ादी थी अब है कि नहीं यह किसी को पता नहीं है। वह सोने के पिंजड़े में क़ैद से आज़ादी चाहती थी।आगस्ता वेस्टलैंड डील सौदे के कथित दलाल क्रिश्चियन मिशेल का प्रत्यर्पण क्या सामान्य प्रक्रिया के तहत हुआ है या दुबई ने इसे किसी सौदे के तहत सौंपा है, यह सवाल राजनीतिक गलियारों में सरगर्म हैं।


फाइल फोटो।

सौदा भी ऐसा जिसमें मोदी सरकार ने आज़ादी के लिए तड़प रही एक राजकुमारी को क़ैद करा दिया। हालाँकि आगस्ता वेस्टलैंड हेलीकाप्टर खरीद के दोषियों को इटली की अदालत ने बरी कर दिया है और भारत में यह सौदा मनमोहन सरकार के समय ही रद्द हो गया था, लेकिन जिस तरह प्रधानमंत्री मोदी ने मिशेल के सहारे गाँधी परिवार पर चुनावी रैलियों में हमला बोला है, वह बताता है कि सरकार को राफ़ेल का जवाब मिल गया है। ‘चौकीदार चोर है’ का जवाब – ‘किस विधवा के खाते में पैसे गए’ है।

यही नहीं आज कांग्रेस ने मोदी सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा है कि मोदी सरकार अपने राजनीतिक प्रतिद्वंदियों को परास्त करने के लिए ईडी, सीबीआई और इनकम टैक्स जैसे सरकारी एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है। सूत्रों से यह भी खबर मिली है कि सरकार अगले कुछ दिनों कांग्रेस के टॉप लेवल के ती-चार नेताओं को गिरफ्तार कर सकती है। आगस्ता मामले में मिशेल के प्रत्यपर्ण के पीछे में एक नई कहानी उभर कर सामने आयी है। सूत्रों के मुताबिक यह सब हुआ है दुबई की एक शहज़ादी की क़ीमत पर। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार ने इसके लिए सीधे मोदी सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। तो पहले शहज़ादी के बारे में जान लीजिए।


शेख लातिफ़ा, दुबई के शासक शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मकतौम की बेटी हैं। बीती 24 फ़रवरी को वे अपने देश से फरार हो गई थीं। उन्होंने एक वीडियो जारी करके दावा किया था कि उन्हें पिछले तीन साल से अस्पताल में बंधक बनाकर रखा जा रहा है। ब्रिटिश मीडिया को भेजे अपने संदेश में 33 वर्षीय शेख लातिफा ने दावा किया था उन्होंने 16 साल की उम्र में एक बार देश छोड़कर भागने की कोशिश की थी। इसलिए तब से सब उसे संदेह की निगाह से देखते हैं। उसे आजादी से जिंदगी जीने की इजाजत ही नहीं है। लातिफ़ा के मुताबिक साल 2000 के बाद से उसके देश छोड़कर बाहर जाने पर पाबंदी है।


वह गाड़ी नहीं चला सकती है। कुछ जानवरों को छोड़कर कोई उसका दोस्त नहीं है। लातिफा के मुताबिक शेख मोहम्मद की छह बीबियां और 30 बच्चे हैं। वह उनकी कम मशहूर पत्नी की तीन बेटियों में से एक है। उसका दुबई में कोई सामाजिक जीवन भी नहीं है। ख़बर थी कि लातिफा फ्रांसीसी एक जासूस की मदद से फरार हुई है। लातिफा अमेरिका में राजनीतिक शरण चाहती थी। इरादा भारत होकर अमेरिका जाना था। लेकिन जब उनकी मोटरबोट गोवा तट से करीब 50 समुद्री मील दूर थी, तो भारतीय तटरक्षक पहुँच गए। उन्होंने मोटरबोट पर कब्जा कर लिया। बाद में लातिफ़ा को दुबई के अधिकारियों को सौंप दिया गया।

10-11 मार्च को विभिन्न भारतीय समाचार माध्यमों में यह खबर छपी थी। लेकिन अंदाज़ कुछ यों था कि राजुकमारी का अपहरण हुआ था और उन्हें बचा लिया गया। भारत सरकार ने आधिकारिक रूप से ऐसी किसी घटना पर चुप्पी साधे रखी थी। बताया जाता है कि इस घटना के बाद मिशेल के प्रत्यर्पण का मामला तेज हो गया जबकि 19 महीने पहले इस संदर्भ में अर्ज़ी दी गई थी। साफ है कि यह दुबई के शासक के साथ यह ‘लेन-देन’ का मामला था।


इस घटना से भारत की साख पर गहरा धब्बा लगा है। मानवाधिकार संस्था एम्नेस्टी इंटरनेशनल ने भारत सरकार पर इस मामले में तमाम अंतरराष्ट्रीय काननों के उल्लंघन का आरोप लगाया है। एम्नेस्टी का आरोप है कि जिस नौका से शहज़ादी आई थी उसके कैप्टन और क्रू मेंबर्स की भारतीय तटरक्षकों ने जमकर पिटाई भी की थी। शाहज़ादी को वापस दुबई भेजना, नागरिक अधिकारों का हनन है। शहज़ादी की ज़िंदगी को लेकर भी संदेह जताया जा रहा है। हालाँकि इस तरह नागरिक क्षेत्र में गुपचुप काम करना भारतीय राजनय की परंपरा नहीं रही है। किसी शरणार्थी, वह भी महिला के साथ ऐसा व्यवहार तो सोचा भी नहीं जा सकता। लेकिन यह नेहरू का नहीं मोदी का भारत है। जहाँ अब विकास हो रहा है।

पुनश्च: मिशेल के प्रत्यर्पण की खबर में के दौरान समाचार चैनलों ने यह बताने पर ख़ास ज़ोर दे रहे थे कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित दोभाल की ख़ास भूमिका रही है। सीबीआई की तरफ से जारी बयान में कहा गया था कि एनएसए अजित डोभाल के ‘निर्देशन के तहत एक अभियान’ में क्रिश्चियन मिशेल को भारत प्रत्यर्पित किया जा रहा है। लेकिन इस ‘अभियान’ में एक शहज़ादी की चीखें किसी को नहीं सुनाई दी। इनपुट -ऑनलाइन एजेंसी। साभार।


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