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पर्यटन-संस्कृति

जुर्माने के साथ श्री श्री के विश्व सांस्कृतिक महोत्सव समारोह की इजाजत

थर्ड आई वर्ल्ड न्यूज़ टीम

नई दिल्ली

१० मार्च २०१६

राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने बुधवार को श्री श्री रविशंकर के नेतृत्व वाले आर्ट ऑफ लिविंग के यमुना खादर इलाके में होनेवाले विश्व सांस्कृतिक महोत्सव पर रोक लगाने से इंकार कर दिया, लेकिन संस्था पर पांच करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। साथ ही न्यायाधिकरण ने सरकार की खिंचाई करते हुए कहा कि अधिकारी अपना कर्तव्य निभाने में नाकाम रहे हैं। न्यायाधिकरण ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) पर पांच लाख रुपये तथा दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।


न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार के नेतृत्व वाले एनजीटी ने डीपीसीसी को अक्षम करार देते हुए कहा कि वह अपने कर्तव्यों के निर्वहन में नाकाम रहा। एनजीटी ने समारोह के बाद यमुना खादर क्षेत्र को हुए नुकसान का आकलन करने का आदेश देते हुए कहा कि जुर्माना कई गुना बढ़ाया जा सकता है। न्यायमूर्ति ने कहा, "पर्यावरण के उद्धार के लिए आपको कीमत चुकानी पड़ेगी। नदी को हुए किसी भी प्रकार के नुकसान के लिए जुर्माना अदा करना होगा।" एनजीटी की चार सदस्यों वाली खंडपीठ ने कहा कि आर्ट ऑफ लिविंग को इलाके में जैव विविधता पार्क स्थापित करने के लिए कहा जा सकता है। न्यायाधिकरण ने पर्यावरण मंत्रालय की खिंचाई करते हुए कहा, "आपका प्राथमिक कर्तव्य क्या है? आपको विश्वास है कि आर्ट ऑफ लिविंग ने पर्यावरण को किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचाया है?" पर्यावरण मंत्रालय के वकील ने कहा, "हम इस बारे में अध्ययन के बाद ही कुछ कह सकते हैं।"

इसके बाद न्यायाधिकरण ने कहा कि आप मजाक कर रहे हैं क्या। पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के बाद आप अध्ययन करेंगे? न्यायाधिकरण ने कहा कि सभी सरकारी अधिकारी अपने कर्तव्यों के निर्वहन में नाकाम रहे हैं। एनजीटी का यह कदम 11 मार्च से 13 मार्च तक आर्ट ऑफ लिविंग के एक कार्यक्रम के मद्देनजर, कथित तौर पर पर्यावरण कानूनों का उल्लंघन व यमुना नदी के प्रदूषण को लेकर सामने आया है। आर्ट ऑफ लिविंग ने ट्रिब्यूनल से कहा कि 155 देशों के लगभग तीन लाख लोग समारोह में शिरकत करेंगे। प्रचार में हालांकि दावा किया गया है कि समारोह में 35 लाख लोग शिरकत करेंगे। कार्यक्रम के खिलाफ याचिका दायर करने वाले पर्यावरणविद् कार्यकर्ता मनोज मिश्रा ने जोर दिया था कि न केवल समारोह को रोका जाए, बल्कि इसके आयोजकों पर जुर्माना भी लगाया जाए।


फैसले के बाद मिश्रा ने संवाददाताओं से कहा, "अदालत ने हमारी याचिका को स्वीकार कर लिया है। हम अपनी प्राथमिक चिंता को सामने लाने में सफल रहे हैं।" उन्होंने कहा कि आर्ट ऑफ लिविंग पर किया गया जुर्माना केवल प्रारंभिक कदम है। वहीं, आर्ट ऑफ लिविंग ने अदालत में यह स्वीकार किया कि उसने समारोह के लिए 25.63 करोड़ रुपये खर्च किए, जिनमें से 15.63 करोड़ रुपये मंच व शामियाने के निर्माण में, जबकि 10 करोड़ रुपये सजावट व प्रकाश के मद में खर्च किए गए हैं। समारोह में कई केंद्रीय मंत्रियों के शिरकत करने की संभावना है। यह अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है कि समारोह में प्रधानमंत्री शामिल होंगे या नहीं। राष्ट्रपति भवन के अधिकारियों ने सोमवार को ही साफ कर दिया था कि इस समारोह में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी शिरकत नहीं कर रहे हैं।




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