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पर्यटन-संस्कृति

भारतीय पुरातत्व विभाग की नई इमारत धरोहर का उद्घाटन किया प्रधानमंत्री मोदी ने

थर्ड आई वर्ल्ड न्यूज़

नई दिल्ली

12 जुलाई 2018

भारतीय पुरातत्व विभाग को अपनी नई शानदार इमारत जिसका नाम धरोहर रखा गया है मिल गया है। जी हां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के नए मुख्यालय भवन का औपचारिक रूप स उद्घाटन किया। 24 तिलक मार्ग पर स्थित इस भवन का नाम धरोहर भवन रखा गया है। उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता केंद्रीय संस्कृति मंत्री डॉ महेश शर्मा ने किया। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने 150 पूरे कर लिए हैं।


40 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से तैयार इस इमारत का निर्माण केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) ने किया है। यह दो चरणों में तैयार की गई। निर्माण कार्य पहले बहुत धीमी गति से चला। केंद्र में भाजपा की सरकार आने के बाद कार्य में तेजी आई। इसमें साज-सज्जा के रूप में महत्वपूर्ण धरोहरों की प्रतिकृतियों (रेप्लिका) का उपयोग किया गया है। इमारत की डिजाइन हाउसिंग एंड अर्बन कारपोरेशन (हुडको) ने तैयार की है। आंतरिक साज-सज्जा की जिम्मेदारी भी हुडको के पास थी, लेकिन कुछ विवाद हो जाने पर एएसआइ ने हुडको को वर्ष 2016 में इस कार्य से हटा दिया था। इसके बाद सीपीडब्ल्यूडी ने ही आंतरिक साज-सज्जा और निर्माण का कार्य पूरा किया। पुरातत्व विभाग की यह आलीशान इमारत 24 तिलक मार्ग पर है। यहां पिछले वर्ष दिसंबर में ही मुख्यालय स्थानांतरित हो चुका है। एएसआइ की पुस्तकालय भी स्थानांतरित की गई है, जोकि पहले शास्त्री भवन में थी।

मुख्यालय पहले जनपथ रोड पर था। केंद्रीय सांस्कृतिक मंत्री डॉ. महेश शर्मा पिछले कई माह से प्रयास में थे, लेकिन प्रधानमंत्री का समय नहीं मिल सका था। बेसमेंट की दो मंजिलों को मिलाकर सात मंजिला इस इमारत की आधारशिला 20 दिसंबर 2011 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने रखी थी। यह संगठन खुद में एतिहासिक संगठन हो गया है। आधुनिक तकनीक से पुरातात्विक के क्षेत्र में बहुत काम हुआ है। इसी की मदद से आज माना जाने लगा है कि सरस्वती नदी की बात काल्पिक नहीं है, आज कई बातें सामने आ रही हैं। पुरातात्विक के क्षेत्र में काम करने वाला व्यक्ति बहुत बड़ा बदलाव करता है।


पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया में जहां ऐतिहासिक धरोहर नही हैं वे लोग उसका महत्व अधिक समझते हैं। आजाद होने के बाद से आज तक देश को एक ऐसी सोच ने जकड़ रखा है, जिन्हें देश की पुरातन धरोहर से कोई लगाव नही रहा है। उन्होंने कहा कि हमें अपनी पुरातन धरोहर पर गर्व होना चाहिए। पुरातात्विक धरोहर को बचाने के लिए जन भागीदारी बहुत जरूरी है। दूसरे देशों में सीनियर सिटीजन क्लब बना कर धरोहर को बचाने में मदद करते हैं। यहां भी इस तरह की सोच बनाने की जरूरत है।




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