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शिक्षा/संस्कृति/पर्यटन

उ.प्र. के आईएएस विजय किरण आनंद के तुगलकी फरमान से हजारों शिक्षकों की रोजी रोटी संकट में!
राज्य में कई शिक्षकों और कर्मचारियों की मौत के जिम्मेदार हैं परियोजना निदेशक विजय किरण आनंद...?

रामलखन के साथ

थर्ड आई वर्ल्ड न्यूज़ नेटवर्क

24 अगस्त 2020

उत्तर प्रदेश के एक निदेशक की मनमानीपन के निर्देश से हजारों शिक्षकों की रोजी रोटी छिनने की कगार पर है। यह निदेशक महोदय हैं विजय किरण आनंद जो उ.प्र. के आईएएस अधिकारी हैं। जब से विजय किरण आनंद उत्तर प्रदेश राज्य परियोजना सर्व शिक्षा अभियान के निदेशक बनाए गए हैं इनके मनमानेपन और असंगत निर्देशों से कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय के हजारों शिक्षक और कर्मचारियों की नींदे हराम हो गयी हैं। जो मानसिक तनाव के बीच गुजर रहे हैं। कई कर्मचारियों की मौत भी हो चुकी है।


सांकेतिक तस्वीर।

हम बता दें कि कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में दो तरह के शिक्षक शिक्षकाएं कार्यरत हैं। एक पूर्णकालिक दूसरे अंशकालिक। इन्हीं दो अधारों पर अभी तक नियुक्तियों राज्य शासन की ओर से हुई हैं। विजय किरण आनंद जब से परियोजना के निदेशक बनाए गए हैं शिक्षा विभाग में उनका कोई सकारात्मक योगदान नहीं दिखाई देता। विजय किरण आनंद की नकारात्मक सोच का नजीता है कि जिन लोगों की नियुक्तियों 10-12 साल पहले पूर्णकालिक अध्यापक के तौर पर हुई थी जिसमें शारीरिक शिक्षा, गृहकार्य, और कम्पयूटर आदि की शिक्षक शिक्षकाएं शामिल हैं उन्हें अब अंशकालिक के तौर पर रखने की तैयारी है। साथ ही उनके वेतनमान  में भी लगभग 50 प्रतिशत की कटौती कर दी जाएगी। इनके इस फरमान से हजारों कर्मचारी परेशान हैं। जबकि कर्मचारियों को स्थायी करने की मांग पिछले कई सालों से की जा रही है। उस पर विजय किरण आनंद का कोई ध्यान नहीं रहा। वेतनमान बढ़ाने की भी मांग वर्षों से होती रही उस पर भी विजय किरण आनंद ने कुछ नहीं किया। सिर्फ उनका ध्यान छंटनी पर है, और लोगों को नौकरी से निकालने की है। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में कार्यरत कर्मचारियों की रोटी छीनने और नौकरी से निकालने पर ही विजय किरण आनंद का पूरा जोर है। जबकि उपरोक्त कर्मचारी 24 घंटे अपनी सेवाएं विद्यालय परिसर में दे रहे हैं।

विजय किरण आनंद जब से उत्तर प्रदेश के परियोजना निदेशक सर्वशिक्षा अभियान बनाए गए हैं कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में कार्यरत सभी कर्मचारियों की रातों की नीदें हराम हो चुकी हैं। हैं। निजी क्षेत्र में काम करने वालों का भी इतना शोषण नहीं होता जितना सरकारी संस्थानों में (कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय) संविदा पर काम करने वालों का हो रहा है। निजी क्षेत्र भी हर साल अपने कर्मचारियों को इंक्रीमेंट के साथ अन्य सुविधाएं देता है। लेकिन यहां पर शोषण के साथ लोगों की मुंह की रोटी छीनने पर विजय किरण आनंद जैसे अधिकारी उतारूं हैं। कस्तूरबा गांधी विद्यालय में कार्यरत कर्मचारियों का हर साल अप्रैल से पहले नवीनीकरण हो जाता है। इस बार विजय किरण आनंद की वजह से इस बार अभी तक लोगों का नवीनीकरण भी नही हुआ है।


सांकेतिक तस्वीर।

विजय किरण आनंद जब से उ.प्र. सर्वशिक्षा अभियान के परियोजना निदेशक बनाए गए है इनके असंगत और मनमानी निर्देशों की वजह से उत्तर प्रदेश कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय के कई कर्मचारियों और अध्यापकों की मौत हो चुकी है। जिसके जिम्मेदार विजय किरण आनंद हैं। फिलहाल कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय उ.प्र. कर्मचारियों के वेल्फेयर संगठन ने उ.प्र. के शिक्षा मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक सभी से गुहार लगाई है कि ऐसे असंगत निर्णय न लिया जाय जिससे लोगों की रोजी रोटी छिने लेकिन इसका भी फिलहाल कोई असर दिखाई नहीं देता है। कस्तूरबा गांधी के हजारों शिक्षकों को कुछ समझ में नहीं आ रहा है कि वो अपनी बात किसे कहें, जिससे इस तरह के फैसले को रोका जा सके।


यह भी सही है कि विजय किरण आनंद की सारी प्रतिभा सिर्फ कस्तूरबा गांधी विद्यालय में कार्यरत कर्मचारियों को परेशान करने उन्हें नौकरी से निकालने जैसे फरमान में ही दिखाई दे रही है। जबकि प्राथमिक विद्यालय एवं अन्य शैक्षिक विभाग में उनकी कोई सकारात्मक प्रतिभा और ऊर्जा दिखाई नहीं देती।



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