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छत्तीसगढ़

विशाखापट्टनम के बाद छत्तीसगढ़ में गैस लीक, ७ मजदूर अस्पताल में भर्ती

थर्ड आई वर्ल्ड न्यूज़ टीम

नई दिल्ली

७ मई २०२०

वैश्विक महामारी कोरोना वायरस का सामना कर रहे भारतीयों के लिए गुरुवार का दिन अच्छा नहीं रहा। कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच देशवासियों को गैस त्रासदी जैसी विपदा का भी सामना करना पड़ा। सुबह विशाखापत्तनम के पॉलिमर फैक्ट्री में गैसे लीक के चलते 10 लोगों की मौत और हजारों के बीमार होने के ठीक बाद गैस लीक के एक और हादसे की खबर आई है। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में एक पेपर मिल में गैस लीक (Gas leak in chhattisgarh) के चलते मजदूरों के बीमार होने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनमें से 3 की हालत गंभीर है।


रायगढ़ के एसपी संतोष सिंह ने बताया कि मजदूर मिल में एक टैंक की सफाई कर रहे थे। इसी दौरान वे खतरनाक गैस के संपर्क में आए और गंभीर रूप से बीमार होने के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है। रायगढ़ के कलेक्टर यशवंत कुमार दिन के करीब 3 बजे एसपी के साथ पीड़ितों से मिलने पहुंचे। दोनों अधिकारियों ने बताया कि मिल के मालिक ने शुरुआत में जानकारी मिलने के बाद उसे छिपाने की कोशिश की और पुलिस को सूचना नहीं दी। मिल मालिक के खिलाफ मामला दर्ज करने की घोषणा भी अधिकारियों ने की।

पुलिस अधिकारी ने बताया कि कोरोना वायरस से बचाव के लिए लागू लॉकडाउन के कारण मिल बंद थी। मिल मालिक मिल चालू करने के लिए सफाई का कार्य कर करा रहा था। इसी दौरान यह हादसा हुआ। सफाई के दौरान सात मजदूर किसी जहरीली गैस के संपर्क में आए और बीमार हो गए। घटना के बाद उन्हें स्थानीय अस्पताल ले जाया गया। बाद में इनमें से तीन की हालत गंभीर होने पर उन्हें रायपुर भेज दिया गया। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि घटना की जानकारी मिलने के बाद फॉरेंसिक विशेषज्ञों के दल को घटनास्थल के लिए रवाना किया गया है जिससे घटना के कारणों के बारे में जानकारी मिल सके। आंध्र प्रदेश के तटीय शहर विशाखापत्तनम में एक फैक्ट्री से जहरीली गैस लीक होने से हुए हादसे में अब तक 11 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि हजारों लोग बीमार हैं। AIIMS के निदेशक ने बताया की इस गैस की चपेट में आने से सेन्ट्रल नर्वस सिस्टम बुरी तरह खराब हो सकता है। सुनने की क्षमता भी खत्म हो सकती है और दिमागी संतुलन खत्म हो सकता है।


एलजी पॉलीमर इंडस्ट्री में करीब ढाई बजे जहरीली रासायनिक गैस का रिसाव शुरू हुआ। नायडूथोटा के आरआर वेंकटपुरम इलाके में जहां यह फैक्ट्री स्थित है, उसके आस-पास के करीब 3 किलोमीटर क्षेत्र में लोग सड़कों पर बेहोश होकर गिरने लगे, आंखें जलने लगीं और कुछ लोगों को शरीर पर छाले पड़ने की समस्या भी हुई। आनन-फानन में प्रशासन ने 5 गांवों को खाली करा लोगों को सुरक्षित स्थान पर भेजा, प्रशासन की ओर से इलाके में राहत का काम जारी है। स्थानीय पुलिस के साथ एनडीआरएफ की टीम भी मौके पर मौजूद है।


इससे पहले शुक्रवार तड़के आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में अपने-अपने घरों के अंदर सोए लोगों के लिए अचानक सांस लेना दूभर होने लगा। इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, 1 बच्चा समेत 3 लोगों की मौत हो चुकी थी। यह सब एक केमिकल फैक्ट्री में जहरीली गैस की रिसाव के चलते हुआ।

यूनियन कार्बाइड कंपनी से मिथाइल आइसो साइनाइट गैस लीक हुई थी। भोपाल गैस त्रासदी में करीब 5 लाख लोग प्रभावित हुए थे। स्थानीय लोग आज भी बताते हैं कि 1 घंटे के अंदर ही हजारों लोगों की मौत हो गई थी। रात को सोए लोग अगले दिन की सुबह नहीं देख पाए। चारों तरफ सिर्फ चीख-पुकार मची हुई थी। भोपाल गैस त्रासदी के 36 साल हो गए हैं। हर साल घटना की वर्षी पर लोगों की यादें ताजा हो जाती हैं। आज भी प्रभावित इलाकों में जहरीली गैस का असर है। गैस पीड़ित लोगों की दूसरी और तीसरी पीढ़ी किसी न किसी बीमारी की चपेट में है। ज्यादातर बच्चे आज भी मानसिक रूप से विकलांग पैदा लेते हैं।

आज भी भोपाल गैस त्रासदी की चपेट में आए लोगों का दर्द कम नहीं हुआ है। पीड़ितों को आज तक सही मुआवजा नहीं मिला है, इन्हें उचित मुआवजा दिलाने के लिए कई संगठन संघर्ष कर रहे हैं। भोपाल गैस त्रासदी पीड़ितों के लिए बने अस्पताल में इनका इलाज भी सही से नहीं होता है। जानकारी के अनुसार इस फैक्ट्री से 40 टन गैस का रिसाव हुआ था। बताया जाता है कि फैक्ट्री के टैंक नंबर 610 में जहरीली गैस मिथाइल आइसो साइनाइट में पानी मिल गया था। इसके बाद रासायनिक प्रक्रिया हुई और टैंक पर दबाव बना। प्रेशर की वजह से टैंक खुल गया और गैस लीक हो गई।


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