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सेहत की बातें

मधुमेह, दिल की बीमारी ने बढ़ाई जैतून तेल की मांग

नई दिल्ली

२ जुलाई २०१३

हाल के दिनों में भारत जैतून के तेल के एक बड़े बाजार के रूप में उभरा है। इसका सबसे बड़ा कारण देश में मधुमेह, उच्च रक्तचाप और दिल की बीमारियों के बढ़ रहे मामले हैं। इंडियन ऑलिव एसोसिएशन के आंकड़ों के अनुसार, 31 मार्च, 2013 को समाप्त हुए पिछले वित्तीय वर्ष में भारत में जैतून तेल का आयात 66 फीसदी बढ़कर 11,916.76 टन हो चुका है।

इंडियन ऑलिव एसोसिएशन के अध्यक्ष वी. एन. डाल्मिया ने आईएएनएस को बताया, "भारत में जैतून के तेल की मांग बढ़ने का एक कारण लोगों में मधुमेह, उच्च रक्तचाप और दिल की बीमारियों जैसी स्वास्थ्य समस्याओं का बढ़ना है।" उन्होंने कहा कि साल 2012-13 में जैतून तेल का आयात विश्व की बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देशों में से सबसे ज्यादा भारत में बढ़ा है। जापान में जैतून तेल का आयात 29 फीसदी, चीन में 17 फीसदी और ब्राजील में 16 फीसदी तक ही बढ़ा है।

जैतून के तेल में वसा की मात्रा बेहद कम होने के कारण इसे स्वास्थ्य की दृष्टि से फायदेमंद माना जाता है। इससे दिल की बीमारियां, मधुमेह और उच्च रक्तचाप का खतरा कम होता है। इसके अलावा एंटी ऑक्सिडेंट की पर्याप्त मात्रा कैंसर से लड़ने और जीवन प्रत्याशा को बढ़ाने में भी मददगार है।

डाल्मिया ने कहा कि खासकर शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य को लेकर आम लोगों में जागरूकता बढ़ने और लोगों की क्रय शक्ति बढ़ने से भी देश में जैतून तेल की मांग बढ़ी है। देश में जैतून तेल के सबसे बड़े आयातकों में से एक डाल्मिया कॉन्टिनेंटल के अध्यक्ष वी. एन. डाल्मिया ने कहा कि साल दर साल जैतून तेल की बढ़ रही मांग साल 2012-13 में बढ़कर 66.36 फीसदी तक जा पहुंची है। उन्होंने कहा, "जैतून तेल की इसके उत्पादक राष्ट्रों में 40 फीसदी तक मूल्य वृद्धि के बावजूद देश में इसकी मांग बढ़ी है।" विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक साल 2015 तक दिल की बीमारी भारत में अकेली सबसे बड़ी जानलेवा बीमारी रह जाएगी। एजेंसी।








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