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रेलगाड़ियों को चलाने के लिए कर्षण-ऊर्जा ओपन-एक्सेस के माध्यम से खरीदी जायेगी

आकाश श्रीवास्तव

थर्ड आई वर्ल्ड न्यूज़

नई दिल्ली, ३० नवंबर २०१९

भारतीय रेल को विद्युत अधिनियम के अंतर्गत वर्ष 2015 से डीम्ड लाइसेंसी का दर्जा प्रदान किया गया है। डीम्ड लाइसेंसी का दर्जा प्राप्त होने के पश्चात क्षेत्रीय रेलों ने बिजली वितरण कम्पनियों की सहभागिता के बिना ही दर-आधारित-बोली अथवा द्वि-पक्षीय व्यवस्थाओं के द्वारा विद्युत निर्माण कम्पनियों से ओपन एक्सेस के माध्यम से सीधे ही बिजली खरीदना शुरू कर दिया है।


इसके फलस्वरूप एक महत्वपूर्ण परिवर्तन यह आया है कि भारतीय रेल को अब बिजली उपभोक्ता की बजाय विद्युत-वितरण कम्पनी के रूप में पहचाना जाने लगा है। ओपन एक्सेस के माध्यम से बिजली खरीदने की दिशा में उठाए गए कदमों पर अमल करते हुए उत्तर रेलवे ने पंजाब राज्य में ओपन एक्सेस के माध्यम से बिजली की खरीद शुरू कर दी है। 11 कर्षण वितरण स्टेशनों के लिए लगने वाली 35 मेगावाट बिजली को इस प्रणाली के माध्यम से खरीदा जा रहा है। विशेष बात यह है कि उत्तर रेलवे को पंजाब के बिजली बिल पर सालाना 56 करोड़ रूपये की बचत होगी। यह राशि पंजाब राज्य के कुल बिजली बिल का लगभग 33% है। कर्षण उप स्टेशन उपरि उपस्करों को विद्युत की आपूर्ति करते हैं जिनसे रेलगाड़ियों को चलाया जाता है।

इससे पहले उत्तर रेलवे ने ओपन एक्सेस प्रणाली से हरियाणा (53 मेगावाट), दिल्ली (14 मेगावाट) और उत्तर प्रदेश (130 मेगावाट) राज्यों में सीधे ही बिजली की खरीद शुरू कर दी है । इस कड़ी में पंजाब के शामिल हो जाने के पश्चात उत्तर रेलवे की कुल ऊर्जा आवश्यकता का 94%, जोकि सालाना लगभग 1100 मेगावाट है, इस प्रणाली के माध्यम से खरीदा जायेगा जिससे पुनरावृति आधार पर सालाना 250 करोड रूपये की बचत होगी।





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