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भारत ई-कामर्स मोनोपोली का शिकार न हो – कैट

आकाश श्रीवास्तव

थर्ड आई वर्ल्ड न्यूज़ नेटवर्क

नई दिल्ली, 12 सितंबर 2020

 देश में ई-कॉमर्स नीति की जल्द घोषणा का आग्रह करते हुए,कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट)के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने आज कहा देश के ई- कामर्स व्यापार में संस्थागत निवेशकों और उनके बीच विभिन्न ई-कॉमर्स कम्पनियों के बीच एक दूसरे के पोर्टल में निवेश से वे कामर्स में कोई एकाधिकार न हो, सरकार को यह सुनिशचित करना आवश्यक है । अगर यह देखा नहीं गया तो ई कामर्स व्यापार में पूंजीवाद का बोलबाला होगा  जो छोटे व्यापारियों के लिए एक मौत की घंटी होगा।


इस तरह की कार्रवाइयां कुछ ही हाथों में खुदरा व्यापार को सीमित करेंगी और एक एकाधिकार की स्थिति पैदा कर सकती हैं, जो ई-कॉमर्स के बुनियादी सिद्धांतों को नुकसान पहुंचा सकती है और न केवल व्यापारियों के लिए बल्कि उपभोक्ताओं के लिए भी बेहद हानिकारक साबित हो सकती है।बड़ी ई-कॉमर्स कम्पनियाँ को अपने ऑफलाइन प्रतिद्वंद्वियों को व्यापार से बाहर करना आसान होगा ।इसलिए, ई-कॉमर्स के लिए एक नीति और एक नियामक तंत्र की आवश्यकता है जो भारत के ई-कॉमर्स परिदृश्य में मौजूद असमानताओं और विसंगतियों को दूर कर सके और सभी वर्गों  के लिए एक समान स्तर की व्यापारिक प्रतिस्पर्धा का क्षेत्र बना सके।

कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी सी भरतिया और राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि कैट ई कॉमर्स बाजार जी अवधारणा का विरोध नहीं करता है,लेकिन इसके साथ ही ऑफ़लाइन खुदरा विक्रेता जो अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं उन्हें किसी भी अनुचित प्रतिस्पर्धा का सामना नहीं करना चाहिए, यह भी देखना जरूरी है। बी.सी.भरतिया एवं खंडेलवाल ने कहा कि भारत का पूरा खुदरा क्षेत्र तेज़ी से बढ़ रहा है। किसी भी नीति या विनियामक तंत्र की अनुपस्थिति में भारतीय ई-कॉमर्स बाज़ार ई कॉमर्स कम्पनियों के लिए एक खुला खेल का मैदान बन गया है, जहाँ सरकार के मूलभूत दिशानिर्देशों की धज्जियां उड़ाते हुए भी ई-कॉमर्स कम्पनियाँ अपने खुद के बनाए नियमों के अनुसार खेल खेल रहे हैं।


उन्होंने आगे कहा कि देश में लगभग 7 करोड़ छोटे व्यवसाय हैं जो लगभग 40 करोड़ लोगों को रोजगार प्रदान करते हैं और लगभग 50 लाख करोड़ रुपये का वार्षिक व्यवसाय उत्पन्न करते हैं।कोरोना लॉकडाउन की अवधि के दौरान ई-कॉमर्स की इस बाज़ार में हिस्सेदारी 24% तक बढ़ गई और लगभग 42% शहरी सक्रिय इंटरनेट उपयोगकर्ता ई-शॉपर्स पर शॉपिंग करते हैं इस बात का प्रतीक है की जो भारत में ई-कॉमर्स व्यवसाय भविष्य का तेज़ी से उबरता हुआ बाज़ार है।




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