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त्रिपुरा वेस्ट के डीएम की गुंडागर्दी का चर्चा पूरे देश में
शोसल मीडिया में आने के बाद, डीएम का हुआ निलंबन

थर्ड आई वर्ल्ड न्यूज़ नेटवर्क

अगरतला 29 अप्रैल 2021

त्रिपुरा के अगरतला के मानिक्या कोर्ट मैरिज हाल में शादी का कार्यक्रम चल रहा था। कोरोना संक्रमण काल में तय की गई गाइडलाइन के उल्लंघन की जानकारी मिलने पर West Tripura के DM शैलेश यादव वहां पहुंच गए। यहां तक तो सब ठीक था..लेकिन इसके बाद डीएम ने जो किया, वह शर्मसार करने वाला है। डीएम की बाड़ी लंग्वेज से लग रहा था वो डीएम नहीं बल्कि अपने जिले के सबसे बड़े गुंडे हैं। सबसे पहले उन्होंने आधिकारिक आदेश की कॉपी फाड़ी... और फिर मेहमानों को भेड़ बकरियों की तरह डंडे से हांकना शुरू कर दिया। चाहे मेहमान हों, पंडित हों, खाना खा रहे लोग हों या फिर दूल्हा ही क्यों ना हो...साहब ने किसी को नहीं बख्शा। यहां तक  डीएम साहब ने पुलिस कर्मियों को भी गाली दी और सबको सस्पेंड करवाने की धमकी भी। फिलहाल डीएम की निलंबन की खबर है। साथ ही उनसे माफी भी मंगवाई गयी।


डीएम की समूची कार्रवाई देखकर यही एहसास हो रहा था कि डीएम ही जिले का राजा है। मैं जिले का राजा हूं उनके मन में ये भाव कैमरे पर साफ रूप से दिख रहा था। आजादी से पहले अंग्रेजों के जमाने में राजस्व वसूली की प्रथा जो हम सुनते आए हैं कुछ वैसा ही व्यवहार त्रिपुरा के डीएम शैलेश कुमार यादव ने किया है। आप जनता के सेवक हैं डीएम साहब तो फिर 'अपुन इच भगवान है' वाली फीलिंग कैसे घुस जाती है। डीएम हैं तो किसी को भी थप्पड़ मार देंगे। ये अधिकार आपको कहां से मिल गया। शादी समारोह में घुसकर पुरुषो, महिलाओं बच्चों और बुजुर्गों को हड़काना। शादी में शामिल होने आए लोगों पर पुलिसकर्मियों से लाठी भजवाना। ये कहां की अफसरशाही है। ट्रेनिंग के दौरान आपलोग जो जनता की सेवा की शपथ लेते हैं वह शपथ कहां भूल गए आप। आपने अपने व्यवहार से ब्यूरोक्रेसी पर तो काला धब्बा लगा दिया है। डीएम शैलेष से पूछना चाहिए कि दूल्हे की गर्दन में हाथ लगाना कहां का नियम है, शादी करा रहे पंडित को थप्पड़ मारना कौन सा कानून है। आप डीएम हो तो कुछ कुछ भी करोगे अपने को जिले का भगवान मान लोगे। हो सकता है नियमों का उल्लंघन हुआ हो लेकिन ये कौन सा तरीका है नियमों का पालन कराने का। किसी को भी इस तरह से सरेआम बेइज्जत कर देंगे क्या आप? कम से कम जिसकी शादी हो रही है उनको तो बख्श देते आप। आप दूल्हे की गर्दन में हाथ लगा कर बाहर कर रहे हैं। दुल्हन को भी स्टेज से उतार दिया। शादी में यदि सीमित लोगों को अनुमति है तो क्या उस सीमित संख्या में दुल्हा- दुल्हन नहीं आते हैं क्या? अरे डीएम साहब कम से कम मैरिज हॉल में शामिल उन छोटे-छोटे बच्चों के बारे में तो सोचा होता। डरे हुए बच्चे आपकी भभकी से अपनी मां का हाथ पकड़े दुबके सिमटे से हॉल के बाहर जा रहे थे। उन बच्चों का क्या कसूर था।

सवाल उठता है कि बारात में शामिल लोगों की कोई गरिमा नहीं है क्या जिन्हें भेड़ बकरियों की तरह हांक कर बाहर निकाला जा रहा है। ऊपर से बदतमीजी से बातचीत अलग। आप डीएम हैं तो किसी से भी बदतमीजी से बातचीत करने का अधिकार कहां से मिल जाता है। लोग बैठकर खाना खा रहे हैं, उन्हें बेइज्जत करके मैरिज हॉल से बाहर निकालना...ये कौन सी अफसरगिरी है। मैरिज हॉल पर छापा ऐसे मारा जैसे वहां कोई आतंकी घटना हुई हो या आतंकियों के छुपे होने की जानकारी मिली हो। शादी में शामिल मेजबान लोग परिमिशन की बात कहते हैं तो आप खुद का जारी किया परमिशन लेटर ही फाड़ देते हैं। ऑन कैमरा ये प्रशासनिक अधिकारियों की ये कौन सी छवि गढ़ रहे हैं। त्रिपुरा में प्रशासनिक अधिकारी शायद ही आपकी इस हरकत से खुद को गौरवान्वित महसूस कर पा रहे होंगे।


जो बेहूदगी वाला काम डीएम शैलष यादव ने किया है उसकी माफी तो बिल्कुल ही नहीं दी जा सकती। डीएम ने अपनी मांफी में कहा कि मेरा मकसद किसी की भावनाओं को आहत करना नहीं था। मैं शादी रुकवाने के लिए माफी मांगता हूं। इससे आपका ये हरकत या बेहूदगी कही से भी कम नहीं हो जाती है। आप उन बच्चों और महिलाओं को कसूरवार हैं जिन्हें बिना किसी वजह के डर का सामना करना पड़ा। आपके इस मांफी मांगने से आपके अंदर अफशरशाही की जो भावना है कि मैं ही सब कुछ हूं जो चाहूं कर सकता हूं वह कर सकता हूं खत्म नहीं होती




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