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रेलवे के 182 नंबर का गलत इस्तेमाल करने वालों से रेलवे कर्मी परेशान!
इंटरसेप्ट भी हो रहा है रेलवे का यह १८२ सहायता नंबर

आकाश श्रीवास्तव

थर्ड आई वर्ल्ड न्यूज़

नई दिल्ली

रेल यात्रा के दौरान आपके या आपके किसी भी सहयात्री के साथ कोई असामाजिक तत्व अपराधिक कृत्य करते हैं, तो रेल मंत्रालय द्वारा देश में 182 नंबर की सहायता केंद्र स्थापित किया गया है। इस नंबर पर कॉल करके आप अपनी शिकायत रेलवे पुलिस के साथ दर्ज करवाने के लिए 182 को फोन करते हैं। आपकी शिकायत तुरंत नजदीकी रेलवे पुलिस स्टेशन तक पहुँचा दी जाती है। यही नहीं इस सहायता नंबर पर आपको यात्रा से जुड़ी आपराधिक या आपात प्रकार की शिकायत के लिए किसी भी स्टेशन पर रुकने या उतरने की कोई आवश्यकता नहीं पड़ती है।


लेकिन रेल यात्रियों के लिए चल रहे सहायता नंबर 182 में आए दिन नियंत्रण कक्ष में बैठे कर्मचारियों को कई तरह की समस्याओं से दो चार होना पड़ रहा है। सूत्रों के अनुसार 182 पर आने वाले फोन कॉल 90 प्रतिशत फर्जी होते हैं। दिल्ली मंडल के नियंत्रण कक्ष जिसका केंद्र नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के पास है यहां पर रोजाना औसतन 500 फोन कॉल आते हैं जिसमें लगभग 100 फोन कॉल ऐसे होते हैं जो कार्रवाई करने लायक होते हैं। यही नहीं देश के अन्य हिस्सों में बने रेलवे के 182 नंबर सहायता केंद्रों की कामोवेश स्थिति यही है। हम बता दें कि दिल्ली मंडल का दायरा सहारनपुर का बाहरी क्षेत्र यानि टपरी से लेकर गाजियाबाद, पलवल, रेवाड़ी बाहरी, भटिंडा बाहरी और अंबाला बाहरी क्षेत्र तक आता है। सूत्रों ने बताया कि 182 पर आने वाले रोजाना फोन कॉल में 75 प्रतिशत मसकरी करने वाले शरारती तत्वों के होते हैं। बाकी के 15 प्रतिशत के फोन कॉल ऐसे होते हैं कि कोई गैस बुक कराने, कोई आधार से लिंक करवाने, कोई बैंक से संबंधित जानकारी के लिए 182 पर फोन करता है।

सूत्रों के जरिए पता चला है कि जो इस तरह के फोन आते हैं उसमें कुछ मोबाइल कंपनियों और कुछ अन्य एजेंसियों के भी सहायता नंबर 182 हैं जिसकी वजह से आपस में नंबर इंटरसेप्ट हो रहे हैं और सहायता केंद्र पर बैठे अधिकारियों और कर्मचारियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रेलवे सुरक्षा बल यानि आरपीएफ के सूत्रों के अनुसार इस समस्या के बारे में रेलवे के उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है लेकिन कोई कार्रवाई अभी तक नहीं हुई है। इसमें सबसे बड़ी समस्या शरारती तत्वों से जुड़ी हुई है।


क्योंकि जो इंटरसेप्ट होकर कॉल आती है उसमें सामने वाला मांफी मांगकर फोन को काट देता है। लेकिन जो शरारती तत्व हैं उनसे सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। क्योंकि उन्हें पता है कि यह रेलवे यात्रियों के लिए बनाए गए सहायता केंद्र का नंबर है फिर भी वो ऊटपटांग बातें करते हैं। शरारती तत्वों को जब पता होता है कि महिला इस समय नियंत्रण कक्ष में है तो आश्लील बातें और बदतमीजी करने से भी नहीं बाज आते। इस मसले पर आरपीएफ सूत्रों का कहना है कि जिस तरह पुलिस का 100 नंबर पर लोग फोन करने से पहले 10 बार सोचते हैं उसी तरह का डर 182 पर फोन करने वालों का भी होना चाहिए।


जो शरारती तत्व 182 का गलत उपयोग करने के लिए फोन करते हैं उनके ऊपर कार्रवाई करने की व्यवस्था होनी चाहिए। जैसे 100 नंबर पर पुलिस करती है। यही नहीं 182 नियंत्रण कक्ष को और अत्याधुनिक तकनीकि से लैस करने की भी जरूरत है। जिससे इस नंबर का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की जा सके। इस समस्या से निजात देने के लिए सूचना तकनीकि का बेहतर उपयोग करने की जरूरत है। रेल सूत्रों के अनुसार रेलवे के लिए बनाए गए 182 के अलावा और किसी निजी और सरकारी निकाय के पास ऐसा नंबर नहीं होना चाहिए।



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