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मुख्यमंत्री योगी ने भी नहीं सुनी एक पत्रकार की फरियाद, दबंगों का हो गया कब्जा
एसपी से लेकर डीएम तक और मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक किया गुहार!

गिरीश चंद्र मौर्या

प्रतापगढ़, इलाहाबाद और नई दिल्ली से एक साथ

उत्तर प्रदेश में भाजपा के शासन वाले राज्य में और योगी आदित्यनाथ जैसे मुख्यमंत्री के राज में न तो पत्रकार सुरक्षित हैं, न उसका घर सुरक्षित है और न परिवार सुरक्षित है। यह बात उस पत्रकार की हो रही है जो भारत सरकार से मान्यता प्राप्त हैं और लगभग 21-22 साल से राष्ट्रीय राजधानी में पत्रकारिता कर रहे हैं। पड़ोस के दबंगों ने गुंडई के बल पर आकाश के घर के जमीन पर जबरन कब्जा करके निर्माण कर लिया और रास्ता बंद कर दिया। और अभी भी आकाश के घर वालों को धमकी दे रहे हैं। हम यह भी बता दें कि उ.प्र. के वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से आज से तकरीबन एक दशक पहले संबंधित खबरों को लेकर आकाश की फोन पर अक्सर बात हुआ करती थी। जो अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बिल्कुल याद नहीं होगा।


दिल्ली के पूर्व पुलिस आयुक्त और उपराज्यपाल के साथ (बीच में आकाश) मीडिया कवरेज के दौरान।

इससे बड़ी बिड़म्बना और क्या हो सकती है। पत्रकार आकाश श्रीवास्तव ने दबंगों से अपनी जमीन की सुरक्षा को लेकर सभी संबंधित अधिकारियों, संबंधित जिले के मंत्रियों प्रदेश के दोनों उप मुख्यमंत्रियों, और मुख्यमंत्री तक को पत्र लिखा लेकिन मौजूदा भाजपा सरकार के किसी अधिकारी और मंत्री ने आकाश के इस गुहार की सुनवाई नहीं की। न ही दबंगों पर किसी तरह की कोई कार्रवाई की गयी।  इससे बड़ी बात और क्या हो सकती है कि उ.प्र, में योगी सरकार के राज्य में संविधान का चौथा स्तंभ कहे जाने वाले अब पत्रकार उनका परिवार, उनका घर जमीन कुछ भी सुरक्षित नहीं है। न ही कोई सुनवाई है चाहे आप जिससे अपनी बात कह लें। यह मामला उ.प्र. के प्रतापगढ़ जिले के पट्टी तहसील के तहत आने वाले गांव रामपुरबेला का है। जहां दबंगों और गुंडों ने जोर जबरजस्ती से एक पत्रकार के घर की सामने की जमीन पर निर्माण करके कब्जा कर लिया। मामला पत्रकार आकाश श्रीवास्तव के घर का है। जो देश की राजधानी दिल्ली में पिछले लगभग 22 सालों से पत्रकारिता कर रहे हैं और पीआईबी (मान्यता प्राप्त) पत्रकार हैं।

आकाश श्रीवास्तव के घर पर उनके 75 साल के वृद्ध माता पिता रहते हैं। उनके पड़ोस के रहने वाले अशोक श्रीवास्तव, शीतला प्रसाद श्रीवास्तव, गंगा प्रसाद श्रीवास्तव, काशी प्रसाद श्रीवास्तव, माता प्रसाद श्रीवास्तव, आदित्य श्रीवास्तव जो सभी एक ही परिवार के हैं ने उनके घर की जमीन पर जबरन गुंडई और बाहुबल के जरिए कब्जा कर लिया और निर्माण कार्य करके सैकड़ों साल पुराने रास्ते को अवरुद्ध कर दिया। इस संदर्भ में जब उन सभी को रोकने की कोशिश की गयी तो उपरोक्त सभी लोग गाली गलौज और मार-पीट पर उतारे हो गए। पूरे गुंड़ई और दबंगई के बल पर निर्माण करके कब्जा कर लिया। यह एक दिन की बात नहीं है आए दिन उपरोक्त इस तरह की शांति भंग करते रहते हैं। जबकि जिस जमीन पर दबंगों द्वारा कब्जा किया गया है उसे आकाश के पिता श्री बनवारी लाल श्रीवास्तव ने सन् 1990 में एक तीसरे पक्ष से खरीदा था। जो एक स्टॉम पेपर पर आपसी समझौते के रूप में लिखिततौर पर मौजूद है। दबंगों ने कब्जा करके आकाश श्रीवास्त के वृद्ध पिता को अपनी जमीन छोड़ने पर मजबूर कर दिया।


संसद भवन में समाचार संकलन के दौरान।

इस संदर्भ में पीड़ित और पत्रकार आकाश श्रीवास्तव ने प्रतापगढ़ के पुलिस अधीक्षक और जिलाधिकारी से बात करने की कोशिश की लेकिन दोनों अधिकारियों ने बात तक नहीं की। ईमेल और वाट्सअप के जरिए किए गए शिकायत पत्र पर कोई सुनवाई नहीं हुई न ही कार्रवाई की गयी। उसके बाद मामले की शिकायत उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक के कार्यालय और उनके जनसंपर्क अधिकारी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विवेक त्रिपाठी से की गयी। वो भी कुछ नहीं किए। बाद में पीआरओ होते हुए भी फोन ही उठाना छोड़ दिया।


केंद्रीय मंत्री डॉक्टर हर्ष वर्धन के साथ

वाट्सअप और एसएमएस के जरिए इस बारे में कई बार उ.प्र. के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक आनंद कुमार, कानून व्यवस्था से बार बार की गयी लेकिन उन्होंने कोई जवाब आज तक नहीं दिया। उन्हें शिकायत ईमेल, वाट्सअप, के जरिए की गयी लेकिन आज तक उनके तरफ से कोई उत्तर नहीं मिला। उ.प्र. पुलिस और पुलिस महानिदेशक को ट्टविटर हैंडल पर भी इस अराजकता की सूचना दी गयी लेकिन वहां भी शिकायत करने बेकार गया।
पत्रकार आकाश श्रीवास्तव ने दिल्ली से जाकर संबंधित थाने में पुलिस निरीक्षक से मिलने की कोशिश की। लेकिन वो मिले ही नहीं। इस मामले में पट्टी के तहसीलदार से भी शिकायत की गयी लेकिन उन्होंने भी मामले में किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं की। उसके बाद उ.प्र. के मुख्यमंत्री कार्यालय में ट्विटर हैंडल, ईमेल के जरिए शिकायत की वहां भी कोई सुनवाई नहीं हुई। शिकायत की प्रति मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी गयी लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार से भी एक पत्रकार होने के नाते मदद लेने की कोशिश की गयी लेकिन वहां से भी कोई फायदा नहीं मिला।
प्रदेश के दोनों मुख्यमंत्रियों केशव प्रसाद मौर्या और दिनेश शर्मा से भी सोशल मीडिया और ट्विटर के जरिए अपनी बात कहने की कोशिश की गयी लेकिन उन दोनों के भी कान में जू नहीं रेगी। एक पीड़ित और पत्रकार होने के नाते इस संदर्भ में आकाश ने अपने क्षेत्र के विधायक और उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री राजेंद्र प्रसाद सिंह उर्फ मोती सिंह से भी शिकायत की लेकिन उनसे से भी किसी प्रकार की कोई मदद नहीं मिली। यही नहीं प्रतापगढ़ के ही रहने वाले प्रदेश के राज्यमंत्री महेंद्र सिंह से बात करने की कोशिश की गयी लेकिन उन्होंने बात सुनने से ही इंकार कर दिया।

कभी दिल्ली में भाजपा के मीडिया मैनेजर रहे और प्रवक्ता रहे और अब प्रदेश के कैबिनेट मंत्री श्रीकांत शर्मा से भी मदद लेने की कोशिश की गयी लेकिन उन्होंने भी कोई बात नहीं सुनी। योगी राज में ये हाल उस पत्रकार की है जो देश की राजधानी में पत्रकारिता के जरिए देश की सेवा कर रहा है।  पीड़ित और पत्रकार आकाश श्रीवास्तव ने अपनी गुहार तहसील और थाने से लेकर जिलास्तर और देश की राजधानी लखनऊ में संबंधित सभी अधिकारियों और शासनाध्यक्षों से करने की कोशिश की लेकिन किसी ने आकाश की पुकार नहीं सुनी।


पत्रकार आकाश से जब बात की गयी तो जबरजस्त तनाव और हताश निराश में लग रहे आकाश श्रीवास्तव ने कहा अब तो बस ऊपर वाले पर ही भरोशा है जो सबसे ऊपर है और सबका मालिक है जो एक दिन इन दबंगों को जरूर सजा देगा। क्योंकि योगी राज में एक पत्रकार ने सभी लोगों के दरवाजे खटखटाए लेकिन किसी ने नहीं सुनी मेरी बात। न ही दबंगों के दबंगई से छुटकारा दिलाने में किसी तरह की मदद की जिससे न्याय मिल सके।


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