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एक अप्रैल से नहीं चलेगी रामायण सर्किट और अन्य गाड़ियां? रेलवे बोर्ड ने आस्था पर चलाया हथौड़ा!
प्रधानमंत्री के सपने को चकनाचूर करेगा रेलवे बोर्ड, आईआरसीटी की याचना का बोर्ड के अधिकारियों पर असर नहीं

आकाश श्रीवास्तव

नई दिल्ली, 11 जनवरी 2022

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना था कि भारत के जो सांस्कृति, धार्मिक और सभ्यता वाले नगर और आस्था के केंद्र हैं उन्हें भारतीय रेलगाड़ियों के जरिए सीधे जोड़ा जाए। और इसकी जिम्मेदारी आईआरसीटीसी यानि भारतीय रेलवे खानपान और पर्यटन निगम को दी गयी। प्रधानमंत्री के सपने को पूरा करने के लिए आईआरसीटी ने कमर कसी और उन तमाम रेलगाडियों को विशेष नाम के जरिए चलाना शुरू किया। इसमें विशेष रूप से रामायण सर्किट ट्रेन, भारत दर्शन, ज्योर्तिलिंग दर्शन, चारधाम दर्शन, बौद्ध सर्किट, गुरू कृपा जैसी कई रेल गाड़ियां शामिल हैं जिन्हें आईआरसीटी वर्तमान में संचालित कर रहा है। ये रेलगाडियां भारत की सभ्यता, संस्कृति और आस्था से जुड़े स्थलों को आमजन को दर्शन करा रही हैं।

लेकिन रेलवे बोर्ड अब इन गाडियों के संचालन को नेस्तानबूत करने के लिए तानाशाही कदम उठा चुका है और ये अब तमाम गाड़ियां इतिहास के कोने में सिमटकर रह जाएंगी, जहां इनके अस्तित्व को रेलवे बोर्ड का दीमक चाटकर खत्म कर देगा। जीं हां ये सभी गाड़ियां एक अप्रैल से नहीं चल पाएंगी। यदि इन गाड़ियों का संचालन होगा भी तो किराया इतना बढ़ा दिया जाएगा कि आम आदमी के लिए इन गाड़ियों से भारत के जो आस्था के केंद्र हैं वहां तक पहुंचना एक सपने के अलावा और कुछ नहीं रह जाएगा। हमने इस बारे में प्रधानमंत्री कार्यालय से जुड़े जो सूचना अधिकारी हैं उनसे फोन पर संपर्क करने की कोशिश की आईआरसीटी और रेलवे बोर्ड के बीच चल रही इस एक तरफा फैसले की कहानी का संज्ञान क्या प्रधानमंत्री कार्यालय को है, तो जो सूचना अधिकारी कार्यालय से जुड़े हुए हैं उन्होंने न तो फोन उठाया और न ही वाट्सअप मैसेज का कोई जवाब दिया। खैर आइए अब आगे थोड़ा विस्तार से जानते हैं।

रेल मंत्रालय या रेलवे बोर्ड भी कह सकते हैं, को भारतीय रेलवे खानपान और पर्यटन निगम यानि (आईआरसीटीसी) द्वारा चलाई जा विशेष धार्मिक, आस्था और सांस्कृति स्थलों को जोड़ने वाली ये रेलगाडियां रास नहीं आ रही हैं। रेल मंत्रालय इनका नाम बदलकर किराया इतना बढ़ाने पर तुल गया है कि भारत दर्शन और तीर्थ स्थलों की यात्रा करना निम्न ही नहीं, उच्च मध्यम वर्ग की हैसियत से भी बाहर हो जाएगा। जाहिर सी बात है यह कदम रेलवे बोर्ड में बैठे वरिष्ठ अधकारियों की मानसिक उपज की ही देन है कि जिनकी सलाह की वजह से इन रेलगाड़ियों के संचालन पर पूर्ण ग्रहण लगने जा रहा है। मंत्रालय वर्तमान भारत दर्शन ट्रेनों का नाम बदलकर भारत गौरव रखने पर विचार कर रहा है, साथ ही इनका किराया लगभग ढाई गुना से साढ़े तीन गुना बढ़ाने की तैयारी कर चुका है। आईआरसीटी की लाख याचना करने के बाद भी रेलवे बोर्ड के अधिकारियों के कान में जूं तक नहीं रेगी। और साफ तौर से आईआरसीटीसी को कह दिया है कि एक अप्रैल से इन गाड़ियों का किराया मौजूदा किराए की जगह ढाई गुना से लगभग साढ़े तीन गुना बढ़ा दिया जाएगा। 
यदि इन शब्दों में कहें कि इन गाडियां का किराया नहीं बढ़ाया गया तो इन गाड़ियों को बंद कर दिया जाएगा और इनकी जगह भारत गौरव रेलगाड़ियां चलायी जाएंगी। जिनका किराया मौजूदा जो गाड़ियां चल रही हैं उनसे ढाई से साढ़े तीन गुना लगभग बढ़ा दिया जाएगा। अब सवाल यह उठता है कि रेलवे बोर्ड आस्था पर व्यापार करने के लिए क्यों अमादा है।
हम यहां पर जो तमाम बातें कह रहे हैं उसके पत्र हमारे पास मौजूद हैं, जिनसे इस तरह की खबरें निकलकर आयी हैं। साथ ही रेलवे बोर्ड ने यह भी कहा है कि इन गाडियों की जो मौजूदा किराया है वह 31 मार्च 2022 तक लागू रहेगी। हम यहां स्पष्ट कर दें कि आईआरसीटीसी अपनी लोकप्रियता, आस्था सर्किट ट्रेनों की सफलता को देखते हुए किराए बढ़ाना नहीं चाहता, लेकिन मंत्रालय के आला अधिकारियों के आगे आईआरसीटी की एक नहीं चल रही है। रेलवे बोर्ड के अधिकारियों के आगे आईआरसीटी असहाय और लाचार हो गया है। आइए थोड़ा आपको तकनीकी रूप से समझाने की कोशिश करते हैं।

भारत दर्शन रेल में फिलहाल ज्योतिर्लिंग दर्शन, चार धाम दर्शन, बौद्ध सर्किट, गुरु कृपा आदि रेल गाड़ियां चल रही हैं। इनमें सबसे नया और लोकप्रिय आकर्षण है श्री रामायाण यात्रा ट्रेन, जो 7 नवंबर से शुरू की गयी है। भारत दर्शन ट्रेन में स्लीपर क्लास में क्रमश: लगभग 800-900 रुपये प्रति दिन, थर्ड एसी 1500 रुपये प्रतिदिन, सेकेंड एसी 4800 रुपये प्रतिदिन और फर्स्ट एसी 6000 रुपये प्रतिदिन जैसे सामान्य किराये रखे गए हैं।

अब उपर जो मौजूदा किराया बताया गया है उनमें लगभग ढाई गुना से साढ़े तीन गुना बढ़ाने की घोषणा रेलवे बोर्ड कर चुका है। इस तरह से देखा जाए तो सबसे कम किराया जो मौजूदा समय में है वह 8 से 9 सौ की जगह 21 सौ से 27 सौ और एसी का सबसे कम किराया 48 सौ से 18 हजार के बीच हो जाएगा। हम बता दें कि श्री रामायण यात्रा 17 दिन के टूर का किराया सेकेंड एसी में 82 हज़ार 950 और डीलक्स में एक लाख 2095 रुपये प्रति व्यक्ति है। इसमें पूरी यात्रा का टिकट, खाना-पीना, हर धार्मिक स्थल के स्टेशन से होटल तक ले जाने और शहर घुमाने की व्यवस्था, यात्रियों की सुरक्षा और बीमा आदि शामिल है। अब इन इनमें लगभग 4 गुना तक बढ़ोत्तरी होने वाली है। यानि आप बयासी हजार और एक लाख के किराए में 4 से गुणा कर दीजिए। रेलवे बोर्ड के मनमाने पन से उपरोक्त किराया 3.20 लाख से 4 लाख के ऊपर पहुंच जाएगा। अब आप बताइए कि महंगाई के आज के दौर में रेलवे बोर्ड के इस फैसले के बाद कितने तीर्थ यात्री यात्रा करेंगे?

रेलवे बोर्ड द्वारा 23 नवंबर को आईआरसीटीसी को भेजे गए पत्र के अनुसार निगम को फर्स्ट एसी कोच का अब हर साल लगभग 60 लाख रुपये प्रयोग शुल्क, स्टेबल शुल्क, तय हॉलेज और वेरिएबल हॉलेज शुल्क और पॉवर शुल्क प्रतिदिन प्रतिकोच देना होगा। इसी तरह बाकी सभी श्रेणियों सेकेंड, थर्ड एसी, एसी चेयर कार, स्लीपर क्लास के शुल्क भी बढ़ जायेंगे। भारत दर्शन में अभी फर्स्ट एसी में 6 हजार रुपये प्रति यात्री प्रतिदिन रेलवे को देना पड़ता है, नयी दरों के हिसाब से कम से कम 25 हजार रुपये प्रतिदिन प्रतियात्री किराया रखने पर ही मंत्रालय को 60 लाख रुपये सालाना प्रति कोच दे पायेंगे। 

निगम का कहना है कि किराये बढ़ाने पर भारत गौरव ट्रेन भी पैलैस ऑन व्हील जैसी महंगी और आम व्यक्ति की पहुंच से बिल्कुल बाहर हो जाएगी। आईआरसीटीसी ने मंत्रालय को फैसले पर दोबारा विचार का अनुरोध किया और कहा कि यह करोड़ों भक्तों की आस्था जुड़ा मामला है बोर्ड इस पर बिचार करे। लेकिन आईआरसीटी की लाख याचना करने पर भी बोर्ड के अधिकारियों पर कोई असर नहीं पड़ा। हम यहां बता दें कि आईआरसीटी द्वारा चलायी जाने वाली विशेष रेलगाडियों के माध्यम से प्रतिवर्ष लगभग 50 हजार लोगों को भारत के सांस्कृतिक, धार्मिक और पौराणिक स्थलों का भ्रमण और दर्शन कराया जाता है। आईआरसीटी इन गाडियों के परिचालन के लिए रेलवे को प्रति रेलगाड़ी के हिसाब से एक दिन का किराये के तौर पर लगभग 25 लाख रूपए का भुगतान करता है।

अब सवाल यह पैदा होता है यदि रेलवे बोर्ड अपने अड़ियन और मनमाने पन की वजह यदि इन गाड़ियों का नाम बदलकर किराया लगभग चार गुना तक बढ़ा देता है तो उसका असर क्या होगा। क्या भारत का आम श्रद्धालु इन गाड़ियों से आस्था की डुबकी लगा पाएगा? यदि नहीं तो नुकसान किसका होगा, आईआरसीटी, रेलवे या फिर आम आदमी का। क्योंकि कहीं नहीं कहीं परोक्ष और अपरोक्ष रूप से इन गाड़ियों के संचालन से लाखों लोगों का रोजी रोटी जुड़ा हुआ यदि इसका संचालन प्रभावित हुआ तो उसकी भरपाई कौन करेगा? 

नोट- इससे जुड़ी कुछ और रिपोर्ट आगे की स्टोरी में...



संग्रहित तस्वीर।





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