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खेल-खिलाड़ी

किवियों ने बढ़ाई टीम इंडिया की चिंता
सेमीफाइनल के लिए जीतने होंगे सभी मुकाबले

तसमीन हैदर

१६ मार्च २०१६

टी ट्वेंटी विश्व कप की शुरुआत टीम इंडिया  इतने निराशाजनक अंदाज में करेगी इसकी कल्पना शायद ही किसी क्रिकेम प्रेमी ने की हो टूर्नामेंट के पहले ही मैच में भारतीय टीम को न्यूजीलैंड से 47 रनों की शर्मनाक शिकस्त झेलनी पड़ी ... हांलाकि मेजबानों के सामने कोई पहाड़ सा लक्ष्य नहीं था, उसे सिर्फ 127 रन बनाने थे, लेकिन पूरी टीम 18.1 ओवरों में ही निपट गई .... सबसे मजबूत बैटिंग लाइन-अप रखने वाली टीम इंडिया महज 79 रनों पर ही ढ़ेर हो गई।


फोटो फाइल उपयोग के लिए।

आंकड़ों और रिकार्ड के लिहाज़ से देखा जाए तो ..टूर्नामेंट के पहले मैच या किसी सीरीज के शुरुआती मुकाबले में टीम इंडिया की हार ज्यादा हैरान करने वाली नही लगती ... विगत कुछ सालों से अक्सर ये देखा गया है कि शुरुआती मुकाबलों में पिछड़ने के बावजूद टीम इंडिया वापसी करने मे सफल हुई है .... लेकिन सवाल ये नहीं है .. असल प्रश्न ये है कि नागपुर के टर्निंग ट्रैक पर भारतीय बल्लेबाज़ न्यूजीलैंड के कम अनुभवी स्पिन आक्रामण के सामने इतनी बुरी तरह संघर्ष करते क्यों दिखाई दिये ?... कम से कम खिताब की सबसे मजबूत दावेदार टीम से तो इस तरह के प्रदर्शन की उम्मीद नहीं की जा सकती ... और वो भी उस स्थिति में जबकि टीम इंडिया ना सिर्फ मेजबान बल्कि डिफेंडिंग चैम्पियन की हैसियत से प्रतियोगिता में भाग ले रही हो.. निराशा की एक वजह ये भी है कि मौजूदा टीम में अब भी कई ऐसे खिलाड़ी हैं जो पहले टी ट्वेंटी विश्व कप विजेता टीम का भी हिस्सा रह चुके हैं .. लेकिन वो भी कुछ खास नहीं कर पाए। टीम इंडिया की हार के बाद विकेट की आलोचना भी होने लगी है . पिच के व्यवहार को लेकर वैसे भी भारतीय कप्तानों का नागपुर ज्यादा रास नहीं आता है ...पूर्व कप्तान सौरव गागुली और धोनी को इसका कई बार अनुभव हो चुका है। हांलाकि धोनी ने इस बार विकेट से ज्यादा टीम की खराब बल्लेबाजी को हार का लिए दोषी ठहराया, लेकिन कई पूर्व क्रिकटर्स ने पहले मैच के लिए तैयार किये गए विकेट को टी ट्वेंटी विश्व कप के उदघाटन मैच के लिए उपयुक्त नहीं माना ... पूर्व पाकिस्तानी कप्तान वसीम अकरम ने कहा कि “विश्व कप के पहले मैच में इस तरह का विकेट देखकर उन्हे काफी हैरानी हुई ”

लेकिन विकेट के व्यवहार से ज्यादा हैरानी भारतीय बल्लेबाजों के प्रदर्शन से हुई ... मौजदा सत्र में टीम इंडिया के  चोटी के सभी बल्लेबाज़ों ने अपनी ख्याति के अनुरूप ही प्रदर्शन किया है ..एशिया कप की खिताबी जीत हो या आस्ट्रेलिया में वन डे सीरीज़ या फिर श्रीलंका और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ घरेलू सीरीज़ सभी में भारतीय बल्लेबाजों ने ढेरों रन बनाए ... वावजूद इसके नागपुर के विकेट पर कोई भी बल्लेबाज टिक कर खेलता हुआ नहीं दिखाई दिया ..कोहली और धोनी ने रन तो बनाए, लेकिन जिस संयम और आक्रमकता की दरकार थी वो दोनों की बल्लेबाजी में नहीं दिखाई दिया। धोनी ने मैच के बाद हार के कारणों का जिक्र करते हुए कहा कि बल्लेबाज परिस्थितियों के अनुरूप खुद को नहीं ढाल पाए .. दरअसल मौजूदा टीम के लिए ये लाख टके का सवाल है ...ये पहला अवसर नहीं है जब टीम इंडिया की मजबूत बैटिग लाइन अप गेंदबाजों की सहायक पिच पर संघर्ष करती दिखाई दी हो ... टी ट्वेंटी में भारतीय बल्लेबाजों का जो तीन सबसे निराशाजनक प्रदर्शन है , वो सारे मुकाबले पिछले एक साल के अंदर ही खेले गए हैं ..न्यूजीलैंड के हाथों मिली हार से पहले श्रीलंका के कम अनुभवी तेज गेंदबाजों ने पूणे के हरे भरे विकेट पर भारतीय बल्लेबाजों को इसी तरह परेशान किया था।


ये दोनों स्थितियां कम से कम एक चैम्पियन टीम के लिए तो संतोषजनक नहीं कही जा सकती ... विषम परिस्थितियों से उबारने का हुनर ही किसी टीम को विश्व चैम्पियन बनाता है  .. ऐसा नहीं है कि इस टीम को ये हुनर नहीं आता हो ... ये सब इसमें परांगत है .. बड़े टूर्नामेंट और बड़े मुकाबलों में कैसे बेहरतर प्रदर्शन किया जाता है ये इन्हे बखूबी पता है ...और कई अवसरों पर उन्होने इसे साबित भी किया है ... किवियों के हाथों परास्त होने के बाद टीम का आगे का रास्ता थोड़ा मुश्किल जरुर हो गया है , लेकिन ये लक्ष्य असंभव नहीं है ... सेमीफाइनल में पहुंचने के लिए टीम इंडिया को अब अपने बाकी बचे सभी तीन मुकाबलों में जीत दर्ज करनी होगी ... इनमें से एक मुकाबला तो चिर प्रतिद्वंदी पाकिस्तान और दूसरा मुकाबला पहली बार टी ट्वेंटी विश्व कप का खिताब जीतने का सपना पाल रही आस्ट्रेलिया टीम से होगा ... टीम इंडिया का आगे का सफर पूरी तरह विराट कोहली, रोहित शर्मा और कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की बैटिंग पर ही निर्भर करेगा ... यदि बाएं हाथ के तीनों बल्लेबाज़ यानी शिखर धवन, युवराज और रैना से इन्हे थोड़ा भी सहयोग मिल गया तो टीम इंडिया को अंतिम चार में जगह  बनाने से रोकना किसी भी टीम के लिए आसान नहीं होगा ...जहा तक प्रशन गेंदबाजों के प्रदर्शन का है तो घरेलू परिस्थितियों का लाभ उठाने में टीम का मौजूदा एटैक सक्षम है .. अनुभवी नेहरा और अश्विन की अगुवाई सभी गेंदबाज अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन सफलतापूर्वक कर रहे हैं ... फील्डिंग अभी भी टीम इंडिया का मजबूत पक्ष है .. बस जरुरत है खेल के इन तीनों पक्षों को सही तरीके से इस्तेमाल करने की।




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