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देश एवं राजनीति

देश की सबसे बड़ी सुरंग देश को समर्पित, प्रधानमंत्री ने किया उद्घाटन
जम्मू और श्रीनगर की दूरी ३१ किमी कम हुई, ढाई घंटे की बचत

आकाश श्रीवास्तव

चेनानी-नाशरी, सुरंग की जगह से

२ अप्रैल २०१७

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2 अप्रैल 2017 को भारत के सबसे लंबे राजमार्ग सुरंग चेनानी-नाशरी जो जम्मू-कश्मीर है देश को समर्पित किया। 9 किमी लंबी चेनानी-नाशरी सुरंग देश की सबसे लंबी हाईवे-टनल है। इस सुरंग का निर्माण में लगभग ढाई हजार करोड़ रूपए खर्च हुए हैं। रामबन और उधमपुर जिलों को जोड़ने वाली इस सुरंग के जरिए जम्मू से श्रीनगर के बीच की यात्रा में 31 किमी की दूरी कम हो जाएगी। यानि करीब ढाई घंटे समय की बचत होगी। इस सुरंग को दक्षिण-पूर्व एशिया की सबसे बड़ी और अत्याधुनिक सुंरग कहा जा रहा है।


भारत के सबसे लंबे राजमार्ग सुरंग चेनानी-नाशरी।

यह सुरंग चार साल के रिकॉर्ड समय में तैयार की गई है। सुरंग की खासियत है कि इसे चलाने के कोई मानवीय हस्तक्षेप नहीं करना पड़ता यानी इसका संचलान पूरी तरह से मैकेनिकल है। इसमें एक्सिडेंट या आग की स्थिति में बचाने के लिए विश्वस्तरीय सुविधाएं हैं। साथ ही इसमें बचाव के लिए समानांतर 9 किमी लंबी सुरंग बनाई गयी है। इस पूरे निर्माण के लिए 19 किलोमीटर की खुदाई की गई है। सुरंग को याता-यात के लिए खोल देने के बाद श्रीनगर और जम्मू के बीच की दूरी 31 किलोमीटर से कम हो गयी है।। इसके साथ ही करीब ढाई घंटे जम्मू श्रीनगर के बीच के सफर पूरा करने में कम लगेंगे। यह सुरंग एनएच ए-1 पर बनी हुई है। यह भारत का सबसे बड़ा रोड टनल तो है साथ ही दक्षिण एशिया की भी सबसे बड़ी सुरंग कही जा रही है। टनल बनाने वाली कंपनी के कर्मचारियों ने इसे पूरा करने के लिए दिन-रात एक कर दिया।

इस टनल के तैयार हो जाने से हर मौसम में बिना किसी रुकावट के सफर किया जा सकेगा फिर चाहे भारी बर्फबारी हो या बारिश। अब मात्र जम्मू से श्रीनगर की दूरी सड़क मार्ग से 6 घंटे में पूरी की जा सकती है। अत्याधुनिक तकनीक से इस टनल का निर्माण किया गया है। हम बता दें खुदाई का काम पूरा होने के बाद खुद सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी इसका मुआयना करने पहुंचे थे। इस टनल के साथ साथ इतनी ही लंबी एक स्केप टनल बनाई गयी है। जिसका इस्तेमाल यातायत के लिए नहीं बल्कि आपातकालीन के दौरान होगा। मुख्य टनल को इस एस्केप टनल से जोडने के लिए 29 पैसेज रोड बनाए गए हैं। इसके साथ ही टनल में ITCS यानी Integrated Tunnel Control System बनाया गया है। यानी एक ही सिस्टम से वैंटिलेशन, फायर कंट्रोल, सिग्नल सिस्टम, कम्यूनिकेशन और इलेक्ट्रीक्ल कंट्रोल्स होगें. सीसीटीवी के जरिये टनल के भीतर ट्रैफिक पर नजर रखी जाएगी। 9 किलोमीटर लंबे इस टनल में गाड़ियों से निकलने वाले धुएं के प्रदूषण को लेकर वेंटिलेशन के भी खास इंतजाम किए गए हैं।


पूरी टनल के निर्माण में अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है। टनल की खुदाई के लिए NATM यानी  New Austrian Tunneling Method का इस्तेमाल किया गया। टनल की खुदाई में 7 साल लग गए. 2011 में एक साथ मुख्य टनल और एस्केप टनल की खुदाई शुरु की गई थी जो 2015 में पूरी हुई। देश के आर्थिक विकास में यह टनल मील का पत्थर साबित होगी। 2 अप्रैल 2017।




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