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रेल इंजीनियरिंग की अद्भुत रचना है दुनिया का सबसे ऊंचा पुल
सामरिक दृष्टि से भारत के लिए मील का पत्थर साबित होगी यह रेल परियोजना

आकाश श्रीवास्तव

चिनाब, जम्मू-कश्मीर से लौटकर

थर्ड आई वर्ल्ड न्यूज़, ९ मई २०१७

भारतीय रेलवे जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी पर दुनिया का सबसे ऊंचा और भारत का  सबसे महत्वाकांक्षी रेल पुल बना रही है। 359 मीटर उंचा यह पुल फ्रांस के एफिल टावर से भी 35 मीटर ऊंचा है। जबकि कुतुबमीनार की ऊंचाई महज 73 मीटर है। पुल की उम्र 120 साल निर्धारित किया गया है। इस रेल लाइन के बीच में कई सुरंगों में से एक सबसे लंबी 11.2 किलोमीटर लंबी रेल सुरंग भी बनाया जा रहा है जो एशिया की सबसे लंबी रेल सुरंग होगा। यह रेल पुल निर्माण सबसे दुर्गम स्थलों शिवालिक और त्रिकुटा पहाड़ियों की सीने को भेदकर तैयार किया जा रहा है। जिसमें इंजीनियरों, तकनीशियनों और कामगारों को कई विपरीति प्राकृतिक स्थितियों गुजरना पड़ रहा है। जो भारतीय रेल इंजीनियरिंग के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती भरा कार्य है।


दुनिया का सबसे ऊंचा पुल भारत में तैयार हो रहा है।

साल 2019 तक इसके तैयार हो जाने की उम्मीद है। इस पुल के निर्माण में 1200 करोड़ रुपये की लागत आने की संभावना है। चिनाब नदी पर बन रहा अर्धचंद्र आकार के इस बड़े ढांचे के निर्माण में लगभग 25 हजार टन विशेष प्रकार के इस्पात का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस रेल लाइन के बन जाने से बारामूला से जम्मू की दूरी साढ़े छह घंटे में तय होगी जो अभी सड़क मार्ग से तय करने में करीब 14-15 घंटे लगते हैं। यह पुल जहां पूरे भारत को कश्मीर घाटी से जोड़ेगा वहीं यह पुल देश की सुरक्षा की दृष्टि से भी मील का पत्थर साबित होने जा रहा है। इस पुल के बन जाने के बाद देश का समूचा हिस्सा कश्मीर घाटी से सीधे रेल मार्ग के जरिए जुड़ जाएगा। यह पुल कटरा और बनिहाल के बीच 111 किलोमीटर के इलाके को जोड़ेगा। जिसका 97 किमी का हिस्सा सुरंगों और पुलों से होकर गुजरेगा। यह परियोजना उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक परियोजना का हिस्सा है। हम बता दें कि विश्व का दूसरा सबसे ऊंचा रेलपुल चीन के बेईपैन नदी पर बना शुईबाई रेलवे पुल है जिसकी ऊंचाई 275 मीटर है।

चिनाब पर बन रहे दुनिया के इस सबसे ऊंचे पुल का निर्माण ऐसा किया जा रहा है कि जो 260 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली हवा को झेल सकेगा। परियोजना में कोंकण रेलवे के मुख्य प्रबंध निदेशक ने थर्ड आई वर्ल्ड न्यूज़ को बताया कि इस पुल का निर्माण कश्मीर रेल लिंक परियोजना का सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा है और पूरा होने पर यह इंजीनियरिंग का एक अजूबा होगा। इसके वर्ष 2019 में पूरा होने की उम्मीद है। ऐसी आशा है कि यह इलाके में पर्यटकों के आकर्षण का एक केंद्र बनेगा। निरीक्षण के मकसद के लिए पुल में एक रोपवे होगा।  पुल की सुरक्षा के लिए भी पर्याप्त व्यवस्था की गई है। जम्मू कश्मीर चिनाब नदी पर भारतीय इंजीनियरिंग के अद्भुत नमूने और संसार के सबसे ऊंचे रेलवे पुल को सैलानियों के आकर्षण का केन्द्र बनाया जाएगा। भारतीय रेलवे और जम्मू कश्मीर पर्यटन राज्य के रियासी जिले में बनने वाले चिनाब नदी के पुल पर बंजी जम्पिंग सहित अनेक वाटर स्पोर्ट्स सुविधाओं को विकसित करेगा।


सुरंगों को तैयार करने में कई दिक्कतों का सामना हो रहा है।

चिनाब पुल के निर्माण को अंजाम तक पहुंचाने में लगे कोंकण रेल निगम लिमिटेड (केआरसीएल) के प्रबंध निदेशक संजय गुप्ता ने यहां यात्रा पर गए पत्रकारों के एक प्रतिनिधिमंडल से बातचीत में बताया कि चिनाब के पुल पर एक बंजी जम्पिंग प्लेटफॉर्म का भी निर्माण किया जाएगा। इसके साथ ही चिनाब नदी में वाटर स्पोर्ट्स सुविधाओं को विकसित किया जाएगा। गुप्ता के अनुसार चिनाब पुल के दोनों ओर बक्कल और कौड़ी गांवों के लिए रेलवे स्टॉपेज होगा। सलाल-ए और सलाल-बी स्टेशन इन गांवों और आसपास के क्षेत्र को रेलवे लिंक उपलब्ध कराएंगे। चिनाब पुल के आसपास के हरी भरी वादियों में पुल से तकरीबन चार किलोमीटर दूर एक स्थान का चयन किया गया है, जहां आधुनिक सुख सुविधाओं से युक्त रिसोर्ट बनाए जाएंगे। इस स्थान से पुल का संपूर्ण दृश्य बड़ा ही मनमोहक दिखेगा।
 
आठ तीव्रता वाले भूकंप के झटकों को भी झेल जाएगा यह पुल
फुटबॉल के मैदान के आधे क्षेत्रफल के बराबर ऐसी ही बुनियाद अभी श्रीनगर की ओर वाले उत्तरी छोर पर डाली जा रही है। परियोजना निदेशक राजेन्द्र कुमार के मुताबिक यह क्षेत्र भूगर्भीय हलचल की दृष्टि से जोन चार में आता है, लेकिन पुल का निर्माण सर्वाधिक हलचल वाले जोन पांच की जरूरतों के हिसाब से किया गया है। यह पुल रिक्टर पैमाने पर आठ तीव्रता के झटके को आसानी से झेल लेगा।


266 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली तेज हवा को भी झेल लेगा पुल
यह पुल 266 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली तेज हवा को सहने में सक्षम होगा। रेलवे पुल में हवा की रफ्तार नापने के लिए सेंसर भी लगाएगा। 90 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक हवा की रफ्तार होने पर सिग्नल लाल हो जाएगा और रेल संचालन को रोक दिया जाएगा। आतंकवादी गतिविधियों या तोडफोड़ की अन्य गतिविधियों की आशंका के कारण इसे इतना सुरक्षित बनाया गया है कि 40 किलोग्राम तक के टीएनटी विस्फोट से इस पुल का बाल भी बांका नहीं होगा।

निर्माण में 63 मिमी मोटा विशेष ब्लास्ट प्रूफ स्टील का हुआ है इस्तेमाल
पुल में 63 मिमी मोटा विशेष ब्लास्ट प्रूफ स्टील इस्तेमाल किया जा रहा है। पुल के खंभे इस तरह से डिजाइन किए गए हैं कि वे धमाकों को झेल सकें। साथ ही खंभों पर ऐसा पेंट होगा जो कम से कम 15 साल चलेगा। पुल की निगरानी के लिए सुरक्षाकर्मियों की तैनाती होगी। साथ ही आपातकालीन स्थिति में पुल और यात्रियों की रक्षा के लिए एक ऑनलाइन निगरानी और चेतावनी प्रणाली लगाई जाएगी। जम्मू श्रीनगर रेलवे लिंक परियोजना में चिनाब पुल को भारतीय रेलवे इंजीनियरिंग में दूसरा सबसे अहम मील का पत्थर माना जाता है।


पर्यटक रात में अद्भुत नजारे का लुफ्त उठा सकेंगे
रात में रोशनी से जगमगाते पुल के नीचे नौकाविहार भी बड़ा ही रोमांचक अनुभव होगा। करीब 17 मीटर चौड़े इस पुल पर फुटपाथ और साइकिल मार्ग भी बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर पर्यटन के आकर्षणों में यह एक अनोखा स्थान होगा जो सैलानियों को एक खास एहसास देने के साथ-साथ भारतीय रेलवे पुल इंजीनियरिंग की विकास यात्रा में एक बड़ा मील का पत्थर होगा। वर्ष 2004 में शुरू हुए इस पुल के निर्माण का काम अगले साल दिसंबर तक पूरा हो जाएगा। हालांकि, पुल के चालू होने की औपचारिक तिथि मार्च 2019 रखी गई है। सालों से आई तमाम अड़चनों को दूर करते हुए अब कोंकण रेलवे कार्पोरेशन लिमिटेड एवं एफ्कॉन के इंजीनियर विदेशी परामर्शदाताओं के निर्देशन में तेजी से काम में लगे हैं और जम्मू की ओर वाले नदी के दक्षिणी छोर पर करीब साढ़े तीन सौ मीटर की ढलान को पक्का करने के साथ ही पुल के अद्र्धचंद्राकार आर्च की बुनियाद डाली जा चुकी है।


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