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खुदरा और निर्माण में सौ फीसदी एफडीआई की मंजूरी

नई दिल्ली

११ जनवरी २०१८

प्रमुख क्षेत्रों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को उदार बनाने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को सिंगल ब्रांड खुदरा कारोबार (एसबीआरटी) और निर्माण विकास में 100 फीसदी विदेशी निवेश को मंजूरी दे दी तथा एयर इंडिया में 49 फीसदी एफडीआई को मंजूरी दे दी। इसके अलावा, सरकार ने यह भी निर्णय लिया कि विदेशी संस्थागत निवेशकों और पोर्टफोलियो निवेशकों का पॉवर एक्सचेंज में प्राथमिक बाजार के माध्यम से मौका दिया जाए और एफडीआई नीति में 'मेडिकल डिवाइसों' की परिभाषा में भी बदलाव किया है। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया, ताकि एफडीआई नीति को आसान बना कर ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा दिया जाए। एक आधिकारिक बयान में कहा गया है, "इसके बदले, निवेश, आय और रोजगार में वृद्धि के लिए एफडीआई का निवेश बढ़ेगा।" वर्तमान एफडीआई नीति के तहत सिंगल ब्रांड रिटेल व्यापार में 49 फीसदी का निवेश स्वचालित मार्ग से तथा उससे अधिक का निवेश 100 फीसदी तक सरकार की मंजूरी के बाद करने का प्रावधान था।

बयान में कहा गया, "अब यह फैसला किया गया है कि सिंगल ब्रांड खुदरा व्यापार में स्वचालित मार्ग से 100 फीसदी विदेशी निवेश की अनुमति होगी।" मंत्रिमंडल ने इसके अलावा टाउनशिप, हाउसिंग, अवसंरचना और रियल एस्टेट ब्रोकिंग सेवाओं संबंधी निर्माण विकास क्षेत्र में भी 100 फीसदी एफडीआई की अनुमति दे दी है। बयान में कहा गया है, "यह फैसला किया गया है कि रियल एस्टेट ब्रोकिंग सेवा रियल एस्टेट कारोबार के तहत नहीं आता है, इसलिए यह स्वचालित मार्ग से 100 फीसदी एफडीआई प्राप्त करने के योग्य है।"

वर्तमान नीति के तहत, विदेशी एयरलाइंस को अनुसूचित और गैर-निर्धारित हवाई परिवहन सेवाएं संचालित करने वाली भारतीय कंपनियों में सरकारी अनुमोदन मार्ग के तहत निवेश करने की अनुमति थी, जो कि उनके पेड-अप कैपिटल के 49 प्रतिशत की सीमा तक है। हालांकि, यह एयर इंडिया पर लागू नहीं था, जिसका अर्थ था कि विदेशी एयरलाइंस पूर्णत: सरकारी स्वामित्व वाली राष्ट्रीय एयरलाइंस में निवेश नहीं कर सकती थी।

बयान में कहा गया है, "अब इस प्रतिबंध को खत्म करने और विदेशी एयरलाइनों को एयर इंडिया में अनुमोदन मार्ग के तहत 49 फीसदी तक निवेश करने की अनुमति दी गई है, जिसके तहत एयर इंडिया में विदेशी निवेश 49 प्रतिशत से अधिक होगा।"

पॉवर एक्सचेंजेस से संबंधित क्षेत्र में सरकार ने विदेशी संस्थागत निवेशकों और पोर्टफोलियो निवेशकों द्वारा प्राथमिक बाजारों के माध्यम से निवेश पर लगे प्रतिबंध को हटा दिया है। वर्तमान नीति के तहत, एफआईआई और एफपीआई खरीद केवल द्वितीयक बाजार तक ही सीमित थी। फार्मा सेक्टर में, कैबिनेट ने एफडीआई नीति में मेडिकल डिवाइसों की परिभाषा में संशोधन करने का निर्णय लिया।








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