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सबसे प्रतिष्ठित और बेदाग राजनेताओं में से एक हैं मोती सिंह
प्रतापगढ़ के प्रतिष्ठित राजनेताओं में गिने जाते हैं राजेंद्र प्रताप उर्फ मोती सिंह

आकाश श्रीवास्तव

नई दिल्ली और प्रतापगढ़ से एक साथ

थर्ड आई वर्ल्ड न्यूज़

उ.प्र. का प्रतापगढ़ जिला वैसे तो सूबे का सबसे पिछड़ा जिला कहा जाता है लेकिन यह जिला अपनी कई खूबियों की वजह से भी जाना जाता है। प्रतापगढ़ जिला आंवले के उत्पादन के लिए पूरे देश दुनिया में प्रसिद्ध है। जिले ने कई ऐसे राजनेताओं को दिया जिनकी चर्चा पूरे सूबे और देश में होती है। उन्हीं में से एक नाम है राजेंद्र प्रताप सिंह उर्फ मोती सिंह का। जी हां आज हम अपने कॉलम “व्यक्तित्व में” उ.प्र. के प्रतापगढ़ जिले के जन-जन की जुबान पर रहने वाले और तीन बार उ.प्र. विधानसभा में अपनी चमक विखेर चुके मोती सिंह का कर रहे हैं जिनका असली नाम राजेंद्र प्रताप सिंह है। लेकिन वो मोती सिंह के नाम से पूरे क्षेत्र में विख्यात हैं। अपनी सौम्यता, वाणी की मधुरता और व्यवहार कुशलता की वजह से मोती सिंह की उ.प्र में अन्य राजनेताओं की तुलना में लोकप्रियता कहीं बहुत ज्यादा है यही कारण है कि वो क्षेत्र के सबसे जनप्रिय नेता के रूप में जाने जाते हैं। यही कारण है कि भाजपा ने उन्हें पट्टी विधानसभा क्षेत्र से अपना उम्मीदवार बनाया है।


मोती सिंह वरिष्ठ भाजपा नेता, पट्टी विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के उम्मीदवार।

उनकी सबसे बड़ी विशेषता लोगों के बीच में सहजता से उपलब्धता है। आम लोगों के दुख दर्द को वो भली भांति समझते हैं और अपनी पूरी क्षमता के साथ लोगों की समस्याओं का हल करवाने का पूरा प्रयास करते हैं। यही कारण है पूरे प्रतापगढ़ जिला विशेष रूप से अपने राजनीतिक क्षेत्र में वे आमजन के बीच अत्यंत लोकप्रिय हैं। चापलूसी की तिकड़मबाज से दूर रहने वाले मोती सिंह की 2013 के लोकसभा चुनावों में प्रतापगढ़ की लोकसभा सीट से खड़े होने की पूरी संभावना थी कि वे वहां से चुनाव लड़ेंगे। लेकिन अचानक अपना दल और भाजपा की गठबंधन होने की वजह से यह सीट भाजपा ने अपना दल को दे दिया। भाजपा के प्रति यह उनकी वफादारी और ईमानदारी थी कि उन्होंने इसका कोई विरोध नहीं किया और पार्टी के आदेश को सिर माथे लगाकर भाजपा के मिशन 272 प्लस में जी जान से जुट गए। मोती सिंह की क्षेत्र में पकड़ और मेहनत का फल था कि अपना दल के बाहरी उम्मीदवार जौनपुर जिले के मूल निवासी हरबंश सिंह जिनका सारा कारोबार मुंबई में है को अपना पूरा समर्थन दिया और उनकी जीत के लिए जी जान से जुट गए।

परिणाम आशा के अनकूल रहा। हरबंश सिंह प्रतापगढ़ की सीट से लोकसभा पहुंच गए। मोती सिंह यदि पार्टी से बगावत करके चुनाव लड़े होते तो उनकी जीत को कोई रोक नहीं सकता था। लेकिन अपने आदर्श मूल्यों को उन्होंने कभी गिरने नहीं दिया। मोती सिंह का जन्म 21 अक्टूबर 1954 को प्रतापगढ़ के सबसे प्रतिष्ठित व्यवसायी माने जाने वाले जिन्हें भरतसिंह गांधी के नाम से जाना जाता है माता कौशल्या सिंह के आंगन में हुआ। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से राजनीतिक विज्ञान और कानून शास्त्र में स्नातक की डिग्री हासिल की। पेश से व्यवसायी उनका परिवार बहुत बड़ा है, लेकिन निजी परिवार में तीन बेटियां, एक बेटा और पत्नी हैं।


जन-जन में सहज पहुंच की वजह से भी क्षेत्र में लोकप्रिय राजनेता हैं।

मोती सिंह पट्टी विधानसभा क्षेत्र से तीन बार चुनाव जीत चुके हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक कैरियर की शुरूआत 1983 में प्रतापगढ़ जिले के पट्टी तहसील के अंतर्गत आने वाले मंगरौरा ब्लॉक से शुरू किया। ब्लॉक प्रमुख पद के लिए हुए चुनाव में उनकी भारी जीत हुई। 1988 में वे दोबारा इसी ब्लॉक से ब्लॉक प्रमुख के लिए चुने गए। 1990 में उ.प्र विधानसभा परिषद के सदस्य चुने गए। उन्होंने 1996, 2002, और 2007 के विधानसभा चुनावों में अच्छे मतों से जीत हासिल की। 2003 में उन्हें राजनाथ सिंह के मंत्रिमंडल में प्रदेश का कृषि राज्य मंत्री बनाया गया।


पिछले कई दशक से हार-जीत की परवाह किए बिना क्षेत्र के लोगों से मिलते रहे हैं।

हम आपको बता दें कि मोती सिंह ने 1989 में पहली बार इंडियन नेशनल कांग्रेस की सीट से चुनाव लड़े लेकिन जनता दल के उम्मीदवार राम लखन से चुनाव हार गए। उन्होंने दावा किया कि उनकी यह हार मतों की गिनती में हुई तकनीकी गड़बड़ियों के वजह हुई जिसमें मतों की गणना में जानबूझकर गल्तियां की गयी जिससे विरोधी की जीत हो सके। उन्होंने अपनी इस हार को अदालत में चुनौती भी दी।

बाद में वे भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए और 1996 में भारतीय जनता पार्टी की टिकट पर चुनकार विधानसभा में अपनी दस्तक दी। उसके बाद 2002 और 2007 में भी जीत हासिल की। 2007 के विधानसभा चुनावों में उन्होंने लगभग 30 (29.74 प्रतिशत के) प्रतिशत के मार्जिन से भाजपा की टिकट पर शानदार जीत हासिल की, लेकिन 2012 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में महज 117 मतों से समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार से चुनाव हार गए। उन्हें 2012 विधानसभा के चुनाव में कुल 61278 मत हासिल हुए। अपनी इस हार को उन्होंने अदालत में चुनौती भी दी। जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि मतों की गणना करने में हेराफेरी की गयी। फिलहाल मोती सिंह इस समय 2017 में उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए अपनी और भाजपा की जीत के लिए दिन-रात जी जान से जुटे हुए हैं।


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