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पांच में से तीन राज्यों में भाजपा का हारना तय?
ढाई साल में भाजपा की केंद्र सरकार कसौटी पर खरी नहीं उतरी

आकाश श्रीवास्तव

थर्ड आई वर्ल्ड न्यूज़

नई दिल्ली, २० जनवरी २०१७

केंद्र में भाजपा की अगुवाई वाली मोदी सरकार के नेतृत्व में पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों का बिगुल बज चुका है। जो मोदी सरकार की किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं है। भाजपा के लिए इन पाचों राज्य में उत्तर प्रदेश सबसे अहम है। इन पांच राज्यों में भाजपा को बहुमत मिलेगा इसमें संदेह होना लाजमी है। क्योंकि मोदी सरकार के ढाई साल के काम का भाजपा चाहे जितना ढिंढोरा पीट ले लेकिन आम जनता की कसौटी पर मोदी सरकार खरी नहीं उतर सकी है। चाहे वह मंहगाई का मुद्दा हो, चाहे वह बेरोजगारी का मुद्दा हो, फिर कश्मीर और पाकिस्तान का मुद्दा हो मोदी सरकार नाकाम हो चुकी है। ऊपर से नोटबंदी के चक्कर में आम आदमी को जो परेशानी हुई है और जो हो रही है उससे लोगों में मोदी सरकार के प्रति अब भारी रोष तो है ही। यही नहीं हिंदुओं का एक प्रमुख वर्ग आयोध्या में भगवान राम के मंदिर के निर्माण के प्रति भाजपा की उदासीन रवैये से भी दुखी और नाराज है। जो इन चुनावों (विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में) में भारतीय जनता पार्टी को भुगतना पड़ सकता है।


2014 में नरेंद्र मोदी का धुंआधार प्रचार विकास को लेकर था। दूसरा पहलू बेरोजगारी, मंहगाई के खिलाफ था। इन सारे मुद्दों पर मोदी सरकार जीतने के बाद जनता की कसौटी पर खरी नहीं उतर सकी है। यूपीए सरकार के राज में कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल था। पिछले ढ़ाई साल में कच्चे तेलों की कीमत में भारी गिरावट हुई उसका फायदा भी आम जनता को नहीं मिला। आटा, दाल, चीनी और तेल की कीमतों पर आज तक नियंत्रण नहीं लगा। न ही इसका कोई जवाब संबंधित मंत्रियों के पास है। इसका भी खामियाजा चुनावों में भाजपा को भुगतना पड़ सकता है। रही-सही कसर नोटबंदी ने निकाल दी है। नोटबंदी का पहल भले ही सही रहा हो, लेकिन इसमें सबसे ज्यादा परेशानी आम जनता को उठानी पड़ी है। यही नहीं पंक्ति में खड़ा होकर मरने वाला व्यक्ति भी आम आदमी था। इसमें कोई अमीर आदमी नहीं मरा। नोटबंदी का दूसरा पहलू यह भी था कि ढाई हजार के लिए जहां आम लोगों की दिनचर्या अस्त-व्यस्त हो गयी वहीं खास लोगों के पास करोड़ों की नई करेंसी पहुंचने लगी। इसका भी आभास आम आदमी को है जिसका खामियाजा केंद्र की मोदी सरकार को भोगना पड़ सकता है।
उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के लिखी-लिखाई स्क्रिप्ट को भी भाजपा शायद समझ नहीं पायी। समाजवादी पार्टी में चल रहे झगड़े से भाजपा खुश थी। अब उसका फायदा भी भाजपा को नजर आता नहीं दिख रहा है। भाजपा को उत्तर प्रदेश के ग्रामीण आंचलों में नोटबंदी के शुरुआती दिनों में जनता का समर्थन देखने को मिला था, लेकिन अब लोग नोटबंदी को लेकर विपक्ष की तरह सवाल करते हैं और जिस तरह लोकसभा चुनाव में सीधे मोदी के पक्ष में खड़े दिखाई देते थे, उसके उलट पीएम मोदी को तमाम असुविधाओं के लिए दोषी ठहराते हैं। नोटबंदी को लेकर किसानों में निराशा है। तमाम दिक्कतों के लिए लोग मोदी सरकार को दोषी ठहराते हैं और स्थानीय ग्रामीण बैंकों पर धांधली का आरोप लगाते हैं। एक किसान ने बताया, 'हमें फसलों में खाद डालने तक के पैसे नहीं मिल पा रहे हैं। हम अपने ही पैसे निकालने के लिए आज भी कतार में खड़े होते हैं जहां बैंकों के बाहर तैनात पुलिसवाले हमें अपराधियों की तरह देखते हैं। बैंक के मैनेजर पीछे के रास्ते से नोट बड़े-बड़े लोगों को देते हैं और हमें खाली हाथ लौटना पड़ता है।' एक दूसरे किसान खुन्नू ने बताया, 'हमने पहले नोटबंदी का समर्थन किया था, क्योंकि कहा जाता था इससे कालाधन आएगा। कहां है कालाधन? सरकार ने किसानों को कोई फायदा नहीं पहुंचाया। बीज और खाद महंगे होते जा रहे हैं और हमारी फसलों की कीमत घटती जा रही है।'

एक अन्य किसान का कहना है कि सरकार ने जो ब्याज दरों में छूट दी है वह भी ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के लिए नहीं है। वे होम लोन नहीं लेते हैं और किसान क्रेडट कार्ड पर लिए गए कर्ज की ब्याज दरों में कोई छूट नहीं दी गई है। गांव में लोगों को उम्मीद थी कि नोटबंदी के बाद उनके कर्ज माफ कर दिए जाएंगे, लेकिन पीएम मोदी की लखनऊ रैली में नोटबंदी का जिक्र न होने से लोग खासे निराश दिखाई दिए। पीएम मोदी की रैली में शामिल होने वाले संतोष ने कहा, 'हम रैली में इसीलिए गए थे कि नोटबंदी के बाद प्रधानमंत्री हमें कोई बड़ा तोहफा देंगे, लेकिन उन्होंने इसपर कोई बात ही नहीं की। सरकार ने हमें परेशान किया और इसका कोई फायदा नहीं निकला।' भाजपा के लिए आने वाले पांच राज्यों के चुनावों में उत्तर-प्रदेश, पंजाब और मणिपुर में जीत असंभव सी है। रही बात उत्तराखंड और गोवा की तो वहां भी जीत आसान नहीं है। 19 जनवरी 2017।




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