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सेना अपने विशेष कमांडोज को और खतरनाक बनाएगी

थर्ड आई वर्ल्ड न्यूज़

नई दिल्ली

१ मार्च २०१७

भारतीय सेना अपने विशेष कार्रवाई बल को और ज्यादा खतरनाक बनाने के लिए कमर कस ली है। इसके लिए काफी वक्त से लंबित सेना के आधुनिकीकरण से जुड़ी खरीद-फरोख्त में तेजी लाई जा रही है। बता दें कि बीते कुछ वक्त में भारतीय सेना सीमा पार जाकर आतंकियों के ठिकानों पर कई कामयाब सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया है। इनमें से एक जून 2015 का मामला है, जब म्यांमार में उग्रवादियों का कैंप तबाह किया गया। दूसरी सर्जिकल स्ट्राइक बीते साल सितंबर में लाइन ऑफ कंट्रोल के पार आतंकियों के लॉन्चपैड्स पर की गई।


रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने मंगलवार को बताया कि सेना के हथियारों से जुड़ी खरीद-फरोख्त के मकसद से कंपनियों का चुनाव करने के लिए सात टेंडर्स निकाले गए हैं। इनके जरिए असाल्ट राइफल्स, स्नाइपर राइफल्स, जनरल परपज मशीन गन्स, हल्के रॉकेट लॉन्चर्स, शॉटगन्स, पिस्टल्स, नाइट विजन डिवाइस और गोला बारूद आदि खरीदे जाएंगे। सूत्रों के मुताबिक 'बीते हफ्ते अमेरिका, इजरायल, स्वीडन समेत कई देशों की कंपनियों से प्रस्ताव मंगवाए गए हैं। खरीद प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरी करने की कोशिश है। वहीं, एक अलग प्रॉजेक्ट के तहत, 120 लाइट स्ट्राइक वीइकल्स खरीदने के लिए ट्रायल्स चल रहे हैं। स्पेशल फोर्सेज के लिए इन वीइकल्स को हेलिकॉप्टरों के जरिए ढोया जा सकेगा।' इससे पहले, भारत सरकार ने कई इमर्जेंसी डील्स के तहत आर्मी, नेवी और वायुसेना के लिए करीब 20 हजार करोड़ रुपये के गोला बारूद और अन्य कलपुर्जों की खरीद को मंजूरी दी है। सेनाएं किसी जंग में तुरंत उतरने और कम से कम 10 दिन तक बड़े पैमाने पर ऑपरेशंस चलाने के लिए तैयार रहें, ऐसा सुनिश्चित करने के मकसद से यह कदम उठाया गया है।

13 लाख सैनिकों से सुसज्जित भारतीय सेना में बेहद प्रशिक्षित स्पेशल कमांडोज हैं। इनमें 9 पैरा स्पेशल फोर्सेज और 5 पैरा एयरबोर्न बटैलियन भी शामिल हैं। हर यूनिट में 620 सैनिक होते हैं। इन कमांडोज को स्पेशल फोर्सेज का हिस्सा बनने के लिए बेहद कड़े मानसिक और शारीरिक प्रशिक्षण से गुजरना पड़ता है। चूंकि, कमांडोज की संख्या सीमित है, इसलिए खरीदारी की सीमा और लागत भी बेहद कम है। उदाहरण के लिए 9 एमएम की 500 पिस्तौल और 1120 असॉल्ट राइफलों की खरीद के लिए टेंडर निकाले गए हैं। सूत्र के मुताबिक, अगर खरीदे गए हथियार कारगर साबित हुए तो बाद में कई बड़े सौदे किए जाएंगे। ऐसा नहीं है कि हमारे कमांडोज के पास आधुनिक हथियारों की कमी हो। उनके जखीरे में इजरायल मेड 5.56mm TAR-21 असॉल्ट राइफल्स, 7.62mm स्नाइपर राइफल्स, यूएस मेड एम4ए1 कार्बाइन और स्वीडिश कार्ल गुस्ताव रॉकेट लॉन्चर्स शामिल हैं। 9 जून 2015 को म्यांमार में उग्रवादी संगठनों के ठिकानों पर ऑपरेशंस के दौरान हल्के और आधुनिक हथियारों की जरूरत महसूस की गई।




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