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म.प्र. में पत्रकारों पर हमले और किसी तरह की उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं - मुख्यमंत्री

मनीष श्रीवास, जबलपुर

साथ में थर्ड आई वर्ल्ड न्यूज टीम नई दिल्ली

5 जनवरी 2019

मध्य प्रदेश में पत्रकारों पर आए दिन हो रहे हमलों को लेकर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने गंभीर रुख अपनाया है। उन्होंने ऐलान किया है कि पत्रकारों के साथ अभद्रता व उन पर हमला करने वालों की खैर नहीं। ऐसे लोगों को जेल व जुर्माना दोनों की सजा दी जाएगी। मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार के गठन के बाद जहां मुख्यमंत्री अपनी पूर्व की घोषणाओं को लेकर इन दिनों सुर्खियों में हैं, वहीं उन्होंने देश के चौथे खंभे की मजबूती को लेकर भी कुछ बातें कही हैं।


कमलनाथ ने कहा है कि पत्रकार हमारे समाज का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जो विपरीत परिस्थितियों में भी देश-दुनिया की खबरों को जनता तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। इसके बावजूद तमाम लोगों द्वारा आए दिन कवरेज के दौरान पत्रकारों को डराने, धमकाने,  मारपीट व जान से मारने की कोशिश की जाती है। कई मामलों में तो हत्या तक कर दी जाती है। साथ ही पत्रकारों पर जबरदस्ती आपराधिक मुकदमे दर्ज करने के प्रकरण संज्ञान में आते रहते हैं। ऐसे में पत्रकारों का उत्पीड़न करने वालों पर सख्त कार्रवाई की वकालत करते हुए सीएम ने कहा कि उत्पीड़नकर्ता चाहे बदमाश हों, शासन-प्रशासन से जुड़े हों या फिर राजनीतिक दलों से जुड़ें क्यों न हों, दोषियों को 24 घंटे के अंदर जेल भेजनी की कार्रवाई के साथ पचास हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया जाएगा। साथ ही दोषियों को आसानी से जमानत भी नहीं मिलेगी। वहीं पीड़ित की शिकायत को अनदेखा करने वाले अधिकारी व कर्मचारी भी कार्रवाई की जद में आएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी समस्या होने पर पत्रकार उनसे मुलाकात कर अपनी बात रख सकते हैं। एमपी वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष राधावल्लभ शारदा ने मीडिया को बताया कि एमपी के पत्रकार सीएम के फैसले का स्वागत करते हैं, लेकिन सीएम जबतक पत्रकारों के हित में पूर्व से लागू कानून व अपने नए निर्देशों (भविष्य में बनने वाले कानून) का कड़ाई से पालन नहीं करवाते, तब तक पत्रकारों को न्याय नहीं मिलने वाला, कानून का पालन धरातल पर होगा तो पत्रकारों के साथ घट रही वारदातें कम हो जाएंगी।


गौरतलब है कि हाल ही में छत्तीसगढ़ के सीएम ने भी पत्रकारों की सुरक्षा से जुड़ा कानून बनाने की बात कही थी। दोनों राज्यें की तरफ से पत्रकारों से जुड़े कानून बनाने की बात तब और महत्वपूर्ण हो जाती है, जब हाल ही में जारी एक वैश्विक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में पत्रकारिता को असुरक्षित पेशा बताते हुए पत्रकारों की हत्या के मामले में भारत को पांचवे पायदान पर रखा गया है।




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