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'योगी सरकार के कार्य नहीं कारनामे बोल रहे हैं'

लखनऊ

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में नई सरकार का गठन हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले चुनाव के दौरान अपने भाषणों में कई मौकों पर इस बात का जिक्र किया था कि पिछली अखिलेश सरकार के काम नहीं, कारनामे बोल रहे हैं, लेकिन योगी सरकार के 100 दिनों के कार्यकाल में लाख कोशिशों के बावजूद काननू-व्यवस्था पर नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। विपक्षी दल कह रहे हैं कि योगी सरकार के काम नहीं 'कारनामे' ही बोल रहे हैं। उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने अपने 100 दिन पूरे कर लिए हैं। अपने इस शुरुआती कार्यकाल में आदित्यनाथ ने कई अभूतपूर्व फैसले लिए, जबकि इनमें कुछ ऐसे भी थे, जिन्होंने विवादों को जन्म दिया।


योगी सरकार ने सत्ता में आते ही प्रदेश की महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा को लेकर एंटी रोमियो स्क्वाड का गठन किया था, लेकिन गठन के साथ ही इस स्क्वाड की कार्यप्रणाली पर ही सवाल उठने लगे। इस मुद्दे पर विपक्षी नेताओं ने भी योगी सरकार को जमकर घेरने की कोशिश की़, बाद में सरकार और पुलिस प्रशासन को स्क्वाड के लिए दिशा निर्देश जारी करने पड़े। कानून-व्यवस्था में सुधार के उद्देश्य से योगी सरकार ने प्रदेश पुलिस व्यवस्था में बड़ा फेरबदल करते हुए रेंज में डीआईजी की जगह आईजी, जोन में आईजी की जगह एडीजी नियुक्त किए, लेकिन इसका जमीनी स्तर पर कोई असर दिखाई नहीं पड़ रहा है। उलटे इस योजना को लेकर सरकार को मायावती मॉडल पर चलने के आरोप लगे रहे हैं। बिजली के मुद्दे पर योगी सरकार ने ऐलान किया कि जिला मुख्यालयों को 24 घंटे, तहसीलों में 20 घंटे और गांवों को 18 घंटे बिजली दी जाएगी। वैसे कागजों पर योगी सरकार जिला मुख्यालयों पर 24 घंटे बिजली जरूर दे रही है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है। आलम यह है कि लखनऊ जैसे बड़े शहर में बिजली उपलब्ध होने के बाद भी एक-दो घंटे की कटौती बिजली विभाग को करनी पड़ती है, ताकि तार और ट्रांसफॉर्मर न फुक जाएं। कुछ यही हाल योगी सरकार के शहरों में 24 घंटे और गांवों में 48 घंटे में ट्रांसफॉर्मर बदलने के फरमान का भी हो रहा है।

लापरवाही का आलम यह है कि बिजली मंत्री श्रीकांत शर्मा ने खराब टांसफॉर्मर बदलें अभियान शुरू किया है। उन्होंने कहा कि खराब टांसफॉर्मरों को जल्द से जल्द बदला जाएगा।  विधानसभा चुनाव में भाजपा का सबसे बड़ा वादा लघु एवं सीमांत किसानों की कर्जमाफी था। योगी सरकार ने पहली कैबिनेट बैठक में कुछ शर्तो के साथ वादे पर अमल किया। इसके मुताबिक, 31 मार्च, 2016 तक प्रदेश में लघु व सीमांत किसानों द्वारा लिए गए फसलों के ऋण की एक लाख रुपये की सीमा तक माफ करने का फैसला किया गया। किसानों की कर्जमाफी को लेकर कांग्रेस के प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने आईएएनएस से कहा, "100 दिनों के भीतर योगी सरकार ने एक भी वादा पूरा नहीं किया है। सरकार बनते ही किसानों का 36 हजार करोड़ रुपये का ऋण माफ किया गया, लेकिन अभी तक एक भी किसान का पूरा कर्ज माफ नहीं हो पाया है।"


उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था का हाल इतना बुरा है कि भाजपा कार्यकर्ता, विधायक, सांसद ही चुनौती बनकर पुलिस के सामने खड़े हो रहे हैं। योगी सरकार के काम नहीं कारनामे बोल रहे हैं। योगी सरकार ने सत्ता में आने के बाद अखिलेश सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना लखनऊ के गोमती रिवर फ्रंट पर जांच बैठा दी है। सरकार के नेताओं ने इसमें काफी भ्रष्टाचार और लूट होने की बात कही, लेकिन शुरुआती जांच में सिर्फ सरकारी अफसरों को ही दोषी माना गया। रिपोर्ट में अखिलेश सरकार के किसी भी मंत्री को इसमें दोषी नहीं माने जाने के संकेत मिले हैं। सपा प्रवक्ता सुनील साजन ने आईएएनएस से कहा, "भाजपा का हर वादा छलावा साबित हुआ है। प्रधानमंत्री ने कहा था कि अखिलेश सरकार के कारनामे बोल रहे हैं। पिछले 100 दिनों में अब किसके कारनामे बोल रहे हैं। जनता योगी सरकार की हकीकत जान चुकी है।"


बिजली के मुद्दे को लेकर साजन ने कहा कि वर्तमान सरकार ने बिजली के क्षेत्र में कुछ नहीं किया है। जो हो रहा है, वह सब अखिलेश सरकार की देन है। नया कुछ नहीं हुआ है। भाजपा के प्रदेश महासचिव विजय बहादुर पाठक ने हालांकि विरोधियों के तर्क को खारिज किया। उन्होंने कहा, "पिछले 100 दिनों में जनसुनवाई को लेकर योगी सरकार पूरी तरह समर्पित रही है। सभी जगहों पर एक बेहतर महौल बना है।" पाठक ने कहा, "उप्र में कानून-व्यवस्था एक बड़ी चुनौती थी, उसपर त्वरित कार्रवाई हुई है। इसे लेकर लगातार काम हुआ है। जनता बदलाव महसूस करे, इसके लिए काम हुआ है और आगे भी कानून-व्यवस्था सही रहे, इसके लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे।" 29 जून 2017


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