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कैट ने प्रधानमंत्री से व्यापारियों को विशेष पैकेज देने की मांग की

आकाश श्रीवास्तव

थर्ड आई वर्ल्ड न्यूज़

नई दिल्ली

आगामी केंद्रीय बजट के सन्दर्भ में कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक ज्ञापन भेजकर देश में छोटे व्यापारियों के व्यापार को और अधिक सरल बनाने एवं व्यापार करने के बेहतर अवसर प्रदान करने के लिए आगामी बजट में या उससे पूर्व सुविधाओं का एक पैकेज देने का आग्रह किया है। कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने प्रधानमंत्री को भेजे ज्ञापन में कहा है की जीएसटी में पंजीकृत प्रत्येक व्यापारी का 10 लाख रुपये तक का एक्सीडेंट बीमा सरकार करे जैसा की उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश के व्यापारियों के लिया किया है।


व्यापारियों को कम्प्यूटरीकृत करने के लिए कंप्यूटर एवं उससे सम्बंधित सामान खरीदने हेतु सब्सिडी दी जाए। ज्ञातव्य है की देश में अभी तक केवल 35 % व्यापारी ही अपने व्यापार में कंप्यूटर का उपयोग करते हैं जबकि सरकार के पूर्ण डिजिटल हो जाने के कारण बाकी के 65 प्रतिशत व्यापारियों को कंप्यूटर से जोड़ना आवश्यक है ! कैट ने यह भी आग्रह किया है की देश के रिटेल व्यापार के लिए एक राष्ट्रीय व्यापार नीति बनाई जाए और घरेलू व्यापार की देख रेख के लिए एक आंतरिक व्यापार मंत्रालय का गठन किया जाए। एक लम्बे समय से लंबित ई कॉमर्स पालिसी को तुरंत लागू किया जाए तथा एक निष्पक्ष एवं पारदर्शी ई कॉमर्स पोर्टल खोलने में सरकार व्यापारियों की सहायता करे।

ई कॉमर्स व्यापार को संचालित करने के लिए एक रेगुलेटरी अथॉरिटी का गठन किया जाए वहीँ रिटेल व्यापार को संचालित करने के लिए एक रिटेल रेगुलेटरी अथॉरिटी का भी गठन किया जाए। देश में लगभग 7 करोड़ छोटे व्यवसायी हैं जो लगभग 30 करोड़ लोगों को आजीविका देते हैं तथा प्रति वर्ष लगभग 42 लाख करोड़ रुपये का व्यापार करते हैं ! कैट ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है की रिटेल सेक्टर की वित्तीय एवं सामजिक स्तिथि पर देश भर में एक सर्वे कार्य जाए तथा सर्वे रिपोर्ट के आधार पर व्यापारियों के लिए नीतियां एवं योजनाएं बनाई जाएँ।


खंडेलवाल ने यह भी आग्रह किया है की व्यापारियों को रियायती ब्याज दर पर बैंकों से क़र्ज़ मिलना चाहिए। अभी तक केवल 5 प्रतिशत व्यापारी ही बैंक अथवा वित्तीय संस्थानों से क़र्ज़ प्राप्त कर पाते हैं जबकि बचे 95 प्रतिशत व्यापारी अपनी वित्तीय जरूरतों के लिए या तो निजी कर्जदाता, रिश्तेदार अथवा अपने निजी स्रोतों पर ही निर्भर रहते हैं ! उन्होंने यह भी कहा की रियायती ब्याज दर पर क़र्ज़ की सुविधा व्यापारियों के कर्मचारियों को भी मिलनी चाहिए।


खंडेलवाल ने यह भी आग्रह किया की मुद्रा योजना में बैंकों का सीधा रोल समाप्त किया जाए और नॉन बैंकिंग फाइनेंस कम्पनी एवं माइक्रो फाइनेंस इंस्टीट्यूशन के माध्यम से लोगों को लोन लिया जाए तथा प्राइवेट मनीलेंडर को पंजीकृत कर उनके द्वारा भी क़र्ज़ दिया जाए वहीँ बैंक इन संस्थानों को रियायती दर पर क़र्ज़ दे। कैट ने यह भी आग्रह किया है की देश के घरेलू व्यापार को बढ़ावा देने एवं उसे व्यवस्थित तरीके से संचालित करने के लिए सरकार एक ट्रेड प्रमोशन कॉउन्सिल का गठन करे जो सरकार एवं व्यापारियों के बीच एक सेतु का काम करे।

कैट ने यह भी आग्रह किया है की व्यापारियों और उपभोक्ताओं के बीच डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए सभी प्रकार के डेबिट अथवा क्रेडिट कार्ड के उपयोग पर कोई शुल्क नहीं लगाना चाहिए। वर्तमान में बैंक 1 % से 2 % का शुल्क लगाते हैं जिससे डिजिटल भुगतान हतोत्साहित होता है। डिजिटल भुगतान का उपयोग करने पर कर में छूट तथा अन्य अनेक प्रकार के लाभ दिए जाएँ। उन्होंने यह भी आग्रह किया की देश में महिला उद्यमियों को प्रोत्साहित करने के लिए एक विशेष महिला उद्यमी योजना चलाई जानी चाहिए। दिल्ली एवं मुंबई सहित अन्य शहरों में मकान मालिक और किरायेदारों के विवाद को देखते हुए एक संतुलित राष्ट्रीय किरायेदारी क़ानून बनना चाहिए जिसे सभी राज्य समान रूप से अपने राज्य में लागू करें।



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