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देश में बनेगा पहला संस्कृत विश्वविद्यालय!
संस्कृत बोलने से कम होता है कोलेस्ट्राल और मधुमेह...!

आकाश श्रीवास्तव

थर्ड आई वर्ल्ड न्यूज़

नई दिल्ली, १४ दिसंबर २०१९

लोकसभा ने गुरुवार को देश में तीन मानद संस्कृत विश्वविद्यालयों को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा प्रदान करने वाले केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय विधेयक 2019 को मंजूरी दे दी है। इससे पहले मोदी सरकार ने 4 दिसंबर को केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय विधेयक को मंजूरी दे दी। यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में लिया गया। कैंबिनेट की बैठक के बाद सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने यह जानकारी दी।


संस्कृत बोलने से मधुमेह और कोलेस्ट्राल कम होता है: उधर इस विधेयक पर चर्चा के दौरान भारतीय जनता पार्टी के सांसद गणेश सिंह ने दावा किया कि अमेरिका आधारित एक शिक्षण संस्थान के अनुसंधान के अनुसार रोजाना संस्कृत भाषा बोलने से तंत्रिका तंत्र मजबूत होता है और मधुमेह तथा कॉलेस्ट्रॉल कम होता है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के एक अनुसंधान के अनुसार अगर कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग संस्कृत में की जाए तो यह अधिक सुगम हो जाएगी। मध्य प्रदेश के सतना से भाजपा सांसद गणेश सिंह ने कहा कि इस्लामी भाषाओं समेत दुनिया की 97 फीसदी भाषाएं संस्कृत पर आधारित हैं। उन्होंने कहा कि इन भाषाओं की बुनियाद संस्कृत रही है। वहीं विधेयक पर चर्चा के दौरान भाजपा के सत्यपाल सिंह ने कहा कि संस्कृत आदि भाषा है और सभी भाषाओं के मूल में संस्कृत है। वेदों और संस्कृत से भारत का आधार है। उन्होंने कहा कि संस्कृत देवों और पूर्वजों की भाषा है और यह वैज्ञानिक भाषा है एवं सर्वमान्य है।

इससे पहले केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा, ‘हमारी 3 संस्कृत डीम्ड यूनिवर्सिटी है. इन 3 संस्कृत डीम्ड यूनिवर्सिटी की एक सेंट्रल यूनिवर्सिटी होगी’। उन्होंने इसे एक अच्छी और महत्वपूर्ण पहल बताया और कहा कि यह संस्कृत की पहली केंद्रीय यूनिवर्सिटी होगी। इस विधेयक के तहत नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान  और श्री लाल बहादुर शास्त्री विद्यापीठ के साथ-साथ तिरुपति स्थित राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिया गया है। मुझे पूर्ण विश्वास है की केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा पाने के बाद यह संस्थान एक नए उत्साह के साथ संस्कृत भाषा के संरक्षण, संवर्धन और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।


केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय विधेयक 2019 पर बहस का जवाब देते हुए कहा कि इन विश्वविद्यालयों का उद्देश्य छात्रों को संस्कृत की शिक्षा देना है, जिससे उनको संस्कृत भाषा-साहित्य का ज्ञान प्राप्त हो और वे देश के विकास में सहायक बन सकें. संस्कृत को देश की आत्मा बताते हुए मानव संसाधन विकास मंत्री ने कहा कि अतीत में भारत को विश्वगुरु बनाने में इस भाषा का योगदान रहा है. बहस की शुरुआत में उन्होंने कहा कि जर्मनी के 14 विश्वविद्यालयों समेत 100 देशों के 250 विश्वविद्यालयों में संस्कृत भाषा की पढ़ाई होती है।


केंद्रीय मानव संशाधन मंत्री ने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री के नेतृत्व में आज संस्कृत भाषा के उत्थान, प्रचार-प्रसार एवं संस्कृत की गुणवत्तापरक, नवाचार युक्त शिक्षा देने के संकल्प के साथ 3 डीम्ड विश्वविद्यालयों को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिए जाने संबंधी विधेयक को लोकसभा में पारित किया। उन्होंने कहा कि सरकार संस्कृत के साथ ही तमिल, तेलुगू, बांग्ला, मलयालम, गुजराती, कन्नड़ आदि सभी भारतीय भाषाओं को सशक्त करने की पक्षधर है और सभी को मजबूत बनाना चाहती है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान, श्री लाल बहादुर शास्त्री विद्यापीठ और राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ तिरुपति तीनों महत्वपूर्ण संस्थान हैं जिन्हें केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा प्रदान करने का प्रस्ताव लाया गया है।

केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय विधेयक 2019 लोकसभा में ध्वनिमत से पारित हुआ। अन्य केन्द्रीय विश्वविद्यालय की भांति संस्कृत के लिए समर्पित ये विश्वविद्यालय भी सम्बन्धित विषयों के अध्ययन-अध्यापन एवं अनुसंधान की दिशा में पूर्ण स्वायत्तता के साथ कार्य करेगें तथा भारतीय संस्कृति की ज्ञान परम्परा में निहित विज्ञानपरक उपलब्धियों का नियोजन करेगें।



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