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अमेज़न एवं फ्लिपकार्ट भारत के ई कॉमर्स व्यापार को निजी सम्पत्ति बनाने के खेल में हैं – कैट

आकाश श्रीवास्तव

थर्ड आई वर्ल्ड न्यूज़

नई दिल्ली, २७ दिसंबर २०१९

ई-कॉमर्स बाजार और भारत के खुदरा व्यापार के उपनिवेशवाद के खिलाफ अपना गुस्सा और आक्रोश प्रदर्शित करते हुए आज देश भर में व्यापारियों ने बड़ी संख्या में कन्फ़ेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडिया ट्रेडर्ज़ (कैट) के बैनर तले देश भर के लगभग 500 शहरों में एक दिन की भूख हड़ताल की। कैट ने न केवल अमेज़ॅन और फ्लिपकार्ट बल्कि परिवहन, रसद, यात्रा, घर खरीदने, उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं और अन्य वर्गों में काम करने वाली अन्य ई-कॉमर्स कंपनियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने की व्यापारियों ने सरकार से माँग की।


कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा की हम चाहते हैं कि भारतीय ई कामर्स बाजार सभी प्रकार की अनुचित व्यापारिक कुप्रथाओं से मुक्त हो और जब तक सरकार इन कम्पनियों के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं करती है तब तक हमारा राष्ट्रीय आंदोलन जारी रहेगा दिल्ली में आज जंतर मंतर पर भूख हड़ताल की गई जिसमें दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के व्यापारियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया और राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि की के आंदोलन से भयभीत होकर, अमेज़ॅन और फ्लिपकार्ट दोनों अब व्यापारी के अनुकूल होने और छोटे व्यापारियों को अपने पोर्टल पर आने के लिए एक ड्रामा करने की कोशिश कर रहे हैं। और वे देश भर छोटे व्यापारियों को कह रहे हैं की वो उन्हें बड़ा करेंगे ।यह पूरी तरह से बेतुका है क्योंकि उनके प्लेटफार्मों पर पहले से ही लाखों व्यापारी हैं और उन्हें देश को यह बताने देना चाहिए कि कितने छोटे व्यापारी उनकी मदद से बड़े हुए हैं।

वे विशुद्ध रूप से पसंदीदा विक्रेता प्रणाली में शामिल हैं और उनकी बिक्री का 80% से अधिक केवल पिछले 10-15 वर्षों से उनके 10-15 पसंदीदा विक्रेताओं द्वारा किया जाता है। व्यापारी उनके झंझट में नहीं पड़ने वाले हैं। भरतिया और खंडेलवाल दोनों ने कहा कि ये कंपनियां आदतन आर्थिक अपराधी हैं। जिनके पास देश के ई-कॉमर्स और खुदरा व्यापार को नियंत्रित करने और एकाधिकार करने का षड्यंत्र है और यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि एमएसएमई मंत्रालय ने इन कंपनियों के साथ साझेदारी करने की घोषणा की है जो सरकार की एफडीआई नीति के ख़िलाफ़ काम कर रहे हैं । 7 करोड़ व्यापारी एमएसएमई मंत्रालय के इस तरह के किसी भी कदम का ज़ोरदार तरीक़े देश भर में विरोध करेंगे ।





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