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दिल्ली के यमुना नदी पर नए रेल पुल निर्माण के लिए उ.रे, ने कसी कमर
२०१९ तक कार्य को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया

आकाश श्रीवास्तव

थर्ड आई वर्ल्ड न्यूज़

३० दिसंबर २०१७

उत्‍तर रेलवे द्वारा इन दिनों पूर्वी भाग से मुख्‍य शहर को जोड़ने में प्रमुख भूमिका निभाने वाले पुराने यमुना पुल के स्‍थान पर नये यमुना पुल का निर्माण किया जा रहा है, जिसके लिए वर्ष 1997-98 में 137 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत पर  स्‍वीकृति दी गई थी। चूंकि पुराने के साथ-साथ नया पुल सलीमगढ़ किले के नजदीक से गुजरता है अतएव  इसे ए.एस.आई से क्‍लीयरेंस की आवश्‍यकता थी जिसके कारण कार्य आरंभ होने में विलंब हुआ। भारतीय पुरात्‍तव सर्वेक्षण के विरोधों के बाद रेलवे द्वारा नए पुल के अपरोच एलाइनमैंट में परिवर्तन किया गया जो सलीमगढ़ किले के नजदीक खुलता है, जो एक संरक्षित स्‍मारक है । अब नेशनल मोन्‍यूमैंट अथोरिटी से एन.ओ.सी. प्राप्‍त कर ली गई है और कार्य पूरे जोर शोर से किया जा रहा है, जिसे जून 2019 में कार्य को पूरे किए जाने  की संभावना है।


पुराने यमुना पुल जिसे लोहा पुल कहते हैं आइए एक नज़र संक्षिप्‍त इतिहास पर डालते हैं:  लाल किला के निकट  पुराना रेल सह यमुना पुल (लोहा वाला पुल) का निर्माण वर्ष 1866 में ब्रिटिश सरकार के ईस्‍ट इंडिया रेलवे द्वारा £ 16,16,335  की लागत से दिल्‍ली को कोलकता से जोड़ने के प्रोजेक्‍ट के रूप में एकल लाईन ब्रिज के तौर पर आरंभ किया था। यह 202.5 फीट के 12 स्‍पैन से तथा इसके अंतिम दो स्‍पैन 34.5 फीट के बने है। इसे वर्ष 1913 में दोहरी लाईन में £ 14,24,900  की अतिरिक्‍त लागत से बदला गया। सड़क यातायात के लिए रेल लाईन के नीचे रोड डैक बनाया गया। ब्रिटिश कंपनी ब्रेथवेट एंड कंपनी (इंडिया) लि. के भारी एक्‍सल लोड के  परिचालन की सुविधा के लिए वर्ष 1933-34 में  £ 23, 31,386  की लागत से स्‍टील गर्डर को बदला गया। यमुना नदी पर पुल का निर्माण नदी में आने वाली बाढ़ को ध्‍यान में रखकर डिजायन किया गया था। उस समय खतरे के निशान का स्‍तर 672 फीट (एम.एस.एल. के ऊपर) माना गया था एवं इसके अनुसार ऊपर वाले पियर लेवल को 677 फीट तथा निचले गर्डर को 680.6 फीट रखा गया था। इसमें कुल 11 पियर हैं तथा सभी पियर के फाउंडेशन लेवल अलग –अलग है।

सबसे निचला फाउंडेशन 615 फीट के लेवल पर है जो पियर नं. 6 है। फाउंडेशन ईट की  दीवारों से बनी है तथा फाउंडेशन पियर नं. 2,8,9 एवं 11 के फाउंडेशन पत्‍थर के स्‍ट्रेटा पर टिके हैं। कई वर्षों से पुल ने कई बाढ़ें देखी हैं। उपलब्‍ध रिकार्डों के अनुसार पुल को पहली बार वर्ष 1956 में बंद किया गया, जब बाढ़ का स्‍तर 677 फीट दर्ज किया गया था। इसके बाद पुल को वर्ष 1978 में बंद किया गया था जब बाढ़ का स्‍तर 681 फीट दर्ज किया गया था । इसके बाद पुल को वर्ष 1988,1995,1997,1998, 2000, 2001, 2002, 2008, 2010 एवं 2013 में बाढ़ खतरे के निशान से ऊपर बहने के कारण कुछ दिनों के लिए पुल को बंद कर दिया गया था। पुल के पुराना हो जाने के कारण वर्तमान में गाडि़यों को 30 कि.मी. प्रति घंटे की प्रतिबंधित गति से चलने की अनुमति दी गई है।


कार्य की गति के लिए फेब्रीकेशन वर्कशाप लगाई गयी


उत्‍तर रेलवे के महाप्रबंधक विश्‍वेश चौबे ने इस कार्य को शीघ्र अतिशीघ्र पूरा करने हेतु निर्देश जारी किए हैं। आर.एन.सिंह मंडल रेल प्रबंधक, दिल्‍ली ने कहा कि फाउंडेशन कार्य तथा नए पुल के पियर का कार्य पूरा कर लिया गया है तथा स्‍टील सुपर स्‍ट्रक्चर का कार्य प्रगति पर है जिसके लिए प्रगति मैदान के निकट नए पुल के लिए 6000 मैट्रिक टन के 26 स्‍टील गर्डर के फेब्रीकेशन के लिए एक आधुनिक वर्कशाप लगाया गया है। वर्कशाप में क्‍वालिटी कंट्रोल उपायों को आर.डी.एस.ओ. की स्‍वीकृति मिल गई है जो रेल मंत्रालय के अधीन आर एवं डी इकाई है।

एक गर्डर का फेब्रीकेशन पूरा कर लिया गया है तथा वर्कशाप में इसे ट्रायल के लिए जोड़ लिया गया है और इसका परिणाम संतोष जनक पाया गया है । दूसरे गर्डर के फेब्रीकेशन का कार्य लगभग पूरा कर लिया गया है । उन्‍होंने आगे कहा कि साईट पर गर्डर को लगाने का कार्य केंटीलीवर तरीके से जल्‍दी ही आरंभ किया जाएगा । इस नए पुल को कुल 137 करेाड़ रुपये (अनुमानित) लागत पर जून 2019 तक पूरा  कर दिये जाने की संभावना है ।

नए पुल की शुरूआत हो जाने पर गाडि़यों को नए पुल की ओर शिफ्ट कर दिया जाएगा जबकि सड़क यातायात का आवागमन पुराने पुल पर पूर्ववत जारी रहेगा। रेलवे, पुराने पुल को हेरिटेज स्ट्रक्चर के रूप में संरक्षित करने पर विचार कर रहा है।इसके अतिरिक्‍त, रेलवे पुराने पुल को सड़क यातायात के परिचालन एवं रख-रखाव के लिए राज्‍य सरकार को सौंपने पर भी विचार कर रहा है।


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