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देश एवं राजनीति

कोरोना संकट: प्रधानमंत्री ने 20 लाख करोड़ रूपए पैकेज की घोषणा की!
देश को स्वलंबी बनाने के लिए प्रधानमंत्री ने 5 पिलर बनाए जाने की घोषणा की!

आकाश श्रीवास्तव

थर्ड आई वर्ल्ड न्यूज़

नई दिल्ली, 12 मई 2020

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश को संबोधित किया। प्रधानमंत्री ने देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक बड़ी घोषणा की है। प्रधानमंत्री ने 20 लाख करोड़ रूपए के पैकेज की घोषणा की है। 20 लाख करोड़ रूपए की यह आर्थिक पैकेज भारत की कुल जीडीपी की 10 प्रतिशत है। सुबह से ही लोग उनके संबोधन का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। पीएम मोदी ने देश को संबोधित करते वक्त सबसे पहले देशवासियों को नमन किया। उसके बाद उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमण से मुकाबला करते हुए दुनिया को 4 महीने से ज्यादा समय बीत गया। इस दौरान तमाम देशों के 42 लाख से ज्यादा लोग करुणा से संक्रमित हुए पौने तीन लाख लोगों से ज्यादा की दुखद मृत्यु हुई है।


प्रधानमंत्री ने मोदी ने देश की अर्थव्यस्था में उछाल लाने के लिए पांच पिलर्स का जिक्र किया। पीएम मोदी ने कहा, 'आत्मनिर्भर भारत की ये भव्य इमारत, पाँच पिलर पर खड़ी होगी। पहला पिलर अर्थव्यवस्था एक ऐसी इकॉनॉमी जो जरूर बदलाव नहीं बल्कि क्वांटम जंप होगा।' दूसरा पिलर ढांचागत व्यवस्था को एक ऐसा संरचना होगा जो आधुनिक भारत की पहचान बने। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भारत में अनेक परिवारों ने अपने परिवार जनों को खोया है। मैं सभी के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करता हूं। उन्होंने कहा साथियों एक वायरस ने दुनिया को तहस-नहस कर दिया। विश्व भर में करोड़ों जिंदगियों को संकट का सामना कर रही है। सारी दुनिया जिंदगी बचाने में जंग में जुटी हुई है। उनका यह संबोधन राज्यों  के मुख्य मंत्रियों से बात करने के ठीक अगले दिन हो रहा है।

उन्होंने कच्छ भूकंप का जिक्र करते हुए कहा कि मैंने अपनी आंखों के सामने कच्छ भूकंप के वे दिन देखे हैं। हर तरफ सिर्फ मलबा ही मलबा। सब कुछ ध्वस्त हो गया था। ऐसा लगता था मानो कच्छ मौत की चादर ओढ़कर सो गया हो। उस समय कोई भी नहीं सोच सकता था कि हालत बदल पाएंगे। लेकिन देखते ही देखते कच्च उठ खड़ा हुआ। कच्छ चल पड़ा। कच्छ बढ़ चला। यही हम भारतीयों की संकल्पशक्ति है। हम ठान लें तो कोई लक्ष्य असंभव नहीं है। कोई राह मुश्किल नहीं है। आज तो चाह भी और राह भी है। यह है भारत को आत्मनिर्भर बनाना। भारत की संकल्पशक्ति ऐसी है कि भारत आत्मनिर्भर बन सकता है।


प्रधानमंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत की यह इमारत चार पिलर पर खड़ी होगी। पहला पिलर- इकॉनमी। एक ऐसी इकॉनमी जो इंक्रिमेंटल चेंज नहीं क्वांटम जंप लाए। दूसरा पिल-इंफ्रास्ट्रक्चर। ऐसा इन्फ्रास्ट्रक्चर जो आधुनिक भारत की पहचान बने। तीसरा पिलर हमारा सिस्टम। ऐसा सिस्टम जो बीती शताब्दी की नहीं, बल्कि इक्कसवीं सदी के सपनों को साकार करने वाले टेक्नॉलजी ड्रिवन व्यवस्थाओं पर आधारित हो।


प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में आगे कहा कि तीसरा पिलर है हमारी प्रणाली यानी व्यवस्था। एक ऐसा सिस्टम जो बीती शताब्दी की रीति-नीति नहीं, बल्कि 21वीं सदी के सपनों को साकार करने वाली तकनीकी ड्राइवन व्यवस्था पर आधारित होगा। उन्होंने चौथे पिलर का जिक्र करते हुए कहा कि हमारी आबादी दुनिया की सबसे बड़ी आबादी लोकतंत्र में हमारी Vibrant Demography हमारी ताकत है। आत्मनिर्भर भारत के लिए हमारी ऊर्जा का स्रोत है।

प्रधानमंत्री ने पांचवे पिलर की जिक्र करते हुए कहा कि हमारी अर्थव्यवस्था में डिमांड और सप्लाई चेन का जो चक्र है, जो ताकत है, उसे पूरी क्षमता से इस्तेमाल किए जाने की जरूरत है। प्रधानमंत्री ने कहा कि जब कोरोना संकट शुरु हुआ तब भारत में एक भी पीपीई (PPE) किट नहीं बनती थी। एन-95 मास्क का भारत में नाममात्र उत्पादन होता था। आज स्थिति ये है कि भारत में ही हर रोज 2 लाख PPE और 2 लाख एन-95 मास्क बनाए जा रहे हैं।


एक राष्ट्र के रूप में आज हम एक बहुत ही अहम मोड़ पर खड़े हैं। इतनी बड़ी आपदा, भारत के लिए एक संकेत लेकर आई है, एक संदेश लेकर आई है, एक अवसर लेकर आई है। जब हम इन दोनों कालखंडो को भारत के नजरिए से देखते हैं तो लगता है कि 21वीं सदी भारत की हो, ये हमारा सपना नहीं, ये हम सभी की जिम्मेदारी है। लेकिन थकना, हारना, टूटना-बिखरना, मानव को मंजूर नहीं है। सतर्क रहते हुए, ऐसी जंग के सभी नियमों का पालन करते हुए, अब हमें बचना भी है और आगे भी बढ़ना है। भारत जब आत्मनिर्भरता की बात करता है, तो आत्मकेंद्रित व्यवस्था की वकालत नहीं करता। भारत की आत्मनिर्भरता में संसार के सुख, सहयोग और शांति की चिंता होती है। भारत की प्रगति में तो हमेशा विश्व की प्रगति समाहित रही है। भारत के लक्ष्यों का प्रभाव, भारत के कार्यों का प्रभाव, विश्व कल्याण पर पड़ता है।

यही हम भारतीयों की संकल्पशक्ति है। हम ठान लें तो कोई लक्ष्य असंभव नहीं, कोई राह मुश्किल नहीं और आज तो चाह भी है, राह भी है। ये है भारत को आत्मनिर्भर बनाना। आज हमारे पास साधन हैं, हमारे पास सामर्थ्य है, हमारे पास दुनिया का सबसे बेहतरीन टैलेंट है, हम उत्तम उत्पाद बनाएंगे, अपनी गुणवत्ता  और बेहतर करेंगे, सप्लाई चेन को और आधुनिक बनाएंगे, ये हम कर सकते हैं और हम जरूर करेंगे। टीबी हो, कुपोषण हो, पोलियो हो, भारत के अभियान का असर दुनिया पर पड़ता ही है। इंटरनैशनल सोलर अलांयंस ग्लोबल वॉर्मिंग के खिलाफ भारत की दुनिया को सौगात है। इंटरनैशनल योग दिवस की पहल मानव जीवन को तनाव से मुक्ति दिलाने के लिए भारत का उपहार है।


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