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मोदी मैजिक, अब 782 की गैस 994 रुपये में देगी सरकार!

आकाश श्रीवास्तव

थर्ड आई वर्ल्ड न्यूज़

नई दिल्ली

टाटा की नैनो कार गुजरात सहित पूरे देश में भले ही फ्लॉप हो गई हो, परन्तु लगता है केन्द्र की एनडीए सरकार को ‘नैनो’ से लगाव हो गया है। पहले तो केन्द्र सरकार ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में हर पखवाड़े में होने वाले परिवर्तन को दैनिक स्तर पर यानी नैनो से भी छोटा अर्थात माइक्रो स्तर पर लागू कर दिया ताकि लोगों को पता ही न चले कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कितनी बढ़ोतरी हुई। इतना काफी नहीं था, तो अब केन्द्र सरकार ने नैनो टेक्नोलॉजी अपनाते हुए रसोई गैस के एक सिलेंडर के तीन हिस्से करते हुए १४.२ किलो के सिलेंडर के बजाय अब ५ किलो के छोटे सिलेंडर ग्राहकों के लिए प्रस्तुत किए हैं।


इस छोटे सिलेंडर की कीमत होगी लगभग ३५० रुपये। सामान्य गुणा-भाग करने से पता चलता है कि ५-५ किलो के तीन सिलेंडर ग्राहकों को १०५० रुपये में पड़ेंगे। १४.२ किलो के एकगैस सिलेंडर की कीमत दिल्ली में ७८३ रुपये है, जो अब ५-५ किलो के तीन सिलेंडर के हिसाब से बढ़कर करीब १,००० रुपये हो जाएगी। जानकारी के अनुसार जनता के पैसों के दम पर अपना खजाना भरने वाली इंडियन ऑयल कंपनी (आईओसी) के चेयरमैन संजीव सिंह ने घोषणा की है कि उज्जवला योजना के तहत गैस सिलेंडर मिलने में लोगों को हो रही मुश्किल और ऊंची कीमत की वजह से अब ५ किलो के रसोई गैस सिलेंडर दिए जाएंगे, जिसकी अनुमानित कीमत होगी ३५० रुपये। उनका कहना है कि इस छोटे सिलेंडर के भाव से गरीबों की जेब पर कोई असर नहीं पड़ेगा। पहली नजर में सरकार की यह योजना सीधी, सरल और जनोन्मुखी लगती है। लेकिन सचमुच क्या ऐसा है? वास्तव में यदि हिसाब लगाएं तो ५ किलो का एक सिलेंडर सरकार ३५० रुपये में देगी।

फिलहाल जो १४.२ किलो का सिलेंडर मिल रहा है, उसकी कीमत राजधानी दिल्ली में ७८३ रुपये है, जो आम तौर पर करीब महीने भर चलता है। इस हिसाब से एक गरीब या मध्यम वर्ग के परिवार को ५-५ किलो को ३ सिलेंडर एक महीने में लेने पड़ेंगे। इन तीन सिलेंडरों की कीमत को जोड़ें तो ३५० रुपये प्रति सिलेंडर के हिसाब से १०५० रुपये होता है। यदि १४.२ किलो के वर्तमान सिलेंडर के ७८३ रुपये के भाव के अनुसार देखें तो पांच किलो के सिलेंडर का भाव २७६ रुपये से अधिक नहीं होना चाहिए। इसके बजाय अब ग्राहकों को ३५० रुपये चुकाने पड़ेंगे। साफ है कि प्रति ५ किलो गैस पर ७४ रुपये का बोझ गरीबों के सिर डाल दिया गया है।


और तो और एक महीने में ३ सिलेंडर तो लेने ही पड़ेंगे, तो १५ किलो के हिसाब से कुल १०५० रुपये चुकाने पड़ेंगे। छोटे-बड़े सिलेंडर के इस खेल में गरीब-मध्यम वर्ग परिवारों को फायदा हुआ या फिर सारा लाभ सरकार डकार गई? सरकार की इस घोषणा का स्वागत करने वाले यदि हिसाब लगाएं तो मालूम होगा कि ५ किलो वाला सिलेंडर महीने के आखिर में महंगा ही पड़ेगा। कयोंकि इसमें ७८२ रुपये के स्थान पर लोगों की जेब से जाएंगे १०५० रुपये। यानी करीब ३०० रुपये अधिक। हालांकि आम लोग तो यही सोचेंगे कि उन्हें तो ३५० रुपये जितनी कम कीमत में गैस सिलेंडर उपलब्ध होने वाला है। लेकिन यह सिलेंडर १४.२ किलो का नहीं बल्कि मात्र ५ किलो का ही होगा और उपभोग के अनुसार प्रति महीने करीब ३ सिलेंडर लाने पर हर महीने २५० से ३०० रुपये अतिरिक्त ढीले करने होंगे।


अब सोचिए जरा, क्या इसे बेहतर योजना कहें या जनविरोधी योजना? राजनैतिक सूत्रों के मुताबिक सरकार की नीति ऐसी है कि लोगों को महंगाई का एहसास नहीं होना चाहिए। जैसे कि पहले पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने पर बावेला मच जाता था, फिर सरकार के किसी बीरबल रूपी अफसर की चतुराई को लागू करते हुए १५ दिन के बजाय कीमतों में प्रति दिन परिवर्तन करने का निर्णय लिया गया। मजे की बात यह है कि कीमतों में परिवर्तन की जानकारी पेट्रोल पंप मालिकों को देर रात दी जाती है ताकि कीमतों में बढ़ोतरी का मीडिला में हल्ला न मचे। अब आलम यह है कि लगभग १५-२० दिनों के बाद लोगों को यह जानकारी मिलती है कि ईंधन की कीमतों में तो आग लग चुकी है। विडंबना यह कि जनता की ‘आह’ को सुन सके, ऐसे सरकारी कानों में ‘मैल’ भर चुका है। जनता नींद से जागे, तब तक तो सरकारी खजाने में करोड़ों-अरबों की रकम चुपके से समा जाती है।

इस तरह, माना जा रहा है कि गैस सिलेंडर के इन ‘इनोवेटिव’ प्रयोग के नाम पर लोगों को शीशे में उतारने का यह सरकारी प्रयास है। कुल मिलाकर, ५ किलो के सिलेंडर की यह स्कीम लोगों को महंगी ही पड़ने वाली है। इस बीच, आईओसी के चेयरमैन संजीव सिंह ने कहा है कि इस योजना को कई चुनिंदा स्थानों पर क्रियान्वित किया जाएगा। दूसरी समस्या सिक्योरिटी कीमत की है। बड़े सिलेंडर के लिए सिक्योरिटी कीमत में केन्द्र सरकार १,२५० रुपये का अनुदान देती है। दो छोटे सिलेंडरों की सिक्योरिटी कीमत १,६०० रुपये होगी।

इस संबंध में सरकार के साथ वार्ता चल रही है। गैस कनेक्शन वाला आम परिवार प्रति वर्ष ७.६ सिलेंडर लेता है, जबकि उज्जवला योजना का ग्राहक औसतन ३.८ सिलेंडर लेता है। हालांकि, छोटे सिलेंडर की योजना शुरू होने से इसमें इजाफा हो सकता है। उज्जवला योजना के तहत फिलहाल ३.३० करोड़ गैस कनेक्शन दर्ज हैं। इसमें ४४ फीसदी हिस्सा अनुसूचित जाति और जनजाति का है।


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