ताज़ा समाचार-->:
अब खबरें देश-दुनिया की एक साथ एक जगह पर-->

प्रमुख समाचार

जीआरपी को रेलवे की सेवा से मुक्त किया जाए – उमाशंकर झा, आरपीएफ एसो.
'आरपीएफ को अपराधों की जांच और अपराधियों के खिलाफ अभियोजन चलाने का अधिकार मिले’

आकाश श्रीवास्तव

नई दिल्ली

थर्ड आई वर्ल्ड न्यूज़

ऑल इंडिया आरपीएफ (रेलवे सुरक्षा बल) एसोसिएशन ने सरकार से मांग की है कि जीआरपी (राजकीय रेलवे पुलिस बल) को रेलवे और रेल यात्रियों की सुरक्षा से मुक्त किया जाए। एसोसिएशन के प्रधान सचिव उमा शंकर झा ने थर्ड आई वर्ल्ड न्यूज़ बेब चैनल से कहा कि रोजाना लगभग तीन करोड़ यात्रियों को देश के एक कोने से दूसरे कोने ले आने-जाने वाली भारतीय रेलवे की जाल देश में लगभग 65 हजार किमी में फैली हुई है। यात्रा के दौरान यात्री और उसकी संपत्ति की क्षति होने पर भरपाई की जिम्मेदारी रेलवे की है। जबकि अपराध दर्ज करने और अपराधियों के खिलाफ अभियोजन चलाने का अधिकार सिर्फ जीआरपी को दिया गया है। यात्रा के दौरान सामान की क्षति होने पर उसकी भरपाई की जिम्मेदारी जीआरपी अथवा राज्य के पास नहीं है। उन्होंने सरकार से मांग की है जब रेलवे की खुद की सुरक्षा बल आरपीएफ है तो रेलवे में होने वाले सारे अपराधों की जांच और अपराधियों के खिलाफ विधिक अभियोजन चलाने का कानूनी अधिकार भी आरपीएफ को सरकार दे। जिससे रेलवे में होने वाले अपराधों पर अंकुश लगाया जा सके और पीड़ित यात्री को मदद पहुंचायी जा सके, उसकी क्षतिपूर्ति की जा सके। यह काम सिर्फ आरपीएफ को पूर्ण वैधानिक शक्ति देने से ही संभव है।


उन्होंने कहा कि यह काम जीआरपी के जरिए नहीं हो सकता है। रेलवे में जीआरपी की दखलनदाजी से सिर्फ रेलवे में अपराध बढ़ ही रहे हैं। उन्होंने साफ तौर से कहा कि चूंकि जीआरपी राज्यों की पुलिस होती है इसलिए जीआरपी की अपराधियों के साथ होने वाले सांठ-गांठ की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि शायद यही कारण है कि जीआरपी की रेलवे में दखलनदाजी से रेलवे के अपराधों में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है लेकिन उसकी भरपाई यात्रियों को नहीं मिल पा रही है। उन्होंने कहा कि जीआरपी की रेलवे में लाने का सबसे पहले विरोध 1967-68 में लोकसभा में तत्कालीन रेल राज्यमंत्री डॉक्टर रामसुभग सिंह ने किया था। उन्होंने रेलवे में आईपीएस अधिकारियों को डीप्यूटेशन पर लाने का भी विरोध किया था। जिसका समर्थन उस समय के रेलमंत्री ने भी किया था। उन्होंने ने कहा कि रेलवे में अलग से लगभग 175 आईपीएस अधिकारियों की जो व्यवस्था की गयी है उसकी रेलवे को कोई जरूरत ही नहीं है।

उन्होंने कहा यह काम आरपीएफ अधिकारी आराम से कर सकते हैं यदि उन्हें विधिक शक्ति दे दी जाए। एक प्रश्न के जवाब में उन्होंने कहा कि जीआरपी चूंकि राज्यों कि पुलिस है इसलिए वह मनमानी करती है। आए दिन इसका उदाहरण दिखाई देता रहता है। रेलवे में यात्रा करते समय यदि किसी यात्री की सामान की चोरी हो गयी तो व्यक्ति को पता तब चलता है जब उसका स्टेशन आने वाला होता है या आ चुका होता है। तब तक रेलगाड़ी कई सीमाओं को पार कर चुकी होती है। जीआरपी में यदि वह रिपोर्ट लिखवाने जाता है तो उससे तरह-तरह के सवाल पूछकर इतना परेशान कर दिया जाता है कि वह थक हारकर रिर्पोट लिखवाने की हिम्मत ही नहीं जुटा पाता है। अंत में अपराध दर्ज नहीं होता है। इससे राज्य और रेलवे दोनों खुश होते हैं।


उमाशंकर झा, प्रधान सचिव, ऑल इंडिया आरपीएफ एसोसिएशन।

क्योंकि जब अपराध दर्ज नहीं होगा तो पीड़ित यात्री को क्षतिपूर्ति नहीं हो पाएगी। इससे राज्य जिसकी जीआरपी है वो खुश इधर रेलवे खुश, इन दोनों के चक्कर में मरता है सिर्फ देश का आम आदमी। एसोसिएशन के प्रधान सचिव ने कहा कि राज्य इसलिए जीआरपी को रेलवे से हटाने का विरोध करते हैं क्योंकि राज्यों (वहां) के स्थानीय नेता जीआरपी का गलत इस्तेमाल करके रेलयात्रा, रेल संपदा का दुरूपयोग करते हैं। जिनकी वजह से आम रेलयात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है और रेलवे को भी वित्तीय नुकसान सहना पड़ता है। उन्होंने कहा पूरी दुनिया की रेलवे के पास अपनी खुद की पुलिस की तरह अधिकार प्राप्त सुरक्षा बल है। सिर्फ भारतीय रेलवे एक ऐसी रेलवे है जिसके सुरक्षा बल (आरपीएफ) के पास कोई कानूनी शक्ति नहीं है। इसलिए हालात ऐसे बने हुए हैं और आदमी पिस रहा है।



जरा ठहरें...
चूहों ने कुतर डाला एटीएम में लाखों रूपए के नोट
एक मुलाकात के बाद जम्मू कश्मीर की सरकार हुई धराशायी
मोदी और योगी ‘राज’ में अटल बिहारी का पुश्तैनी घर खंड़हर में हो गया तब्दील!
आज देश बीजेपी के 2-3 लोगों और आरएसएस का गुलाम हो गया है - राहुल गांधी
उ.रे. ने सघन टिकट जांच अभियान शुरू किए
पूर्वोत्तर में होगा रेल नेटवर्क का विस्तार, रेलवे ने कसी कमर!
मुफ्त गैस कनेक्शन के पीछे सरकार का खेल, 8 करोड़ को दो 80 करोड़ से लो!
शाह के बेटे की संपत्ति एक साल में १६ हजार गुना बढ़ी -कांग्रेस
कांग्रेस ने कहा बुलेट ट्रेन का समझौता 2013 में ही हुआ था, मोदी देश को बरगला रहे हैं!
19 साल बाद भी रेल हादसे का मुआवजा वही है!
 
 
Third Eye World News
इन तस्वीरों को जरूर देखें!
Jara Idhar Bhi
जरा इधर भी

Site Footer
इस पर आपकी क्या राय है?
मोदी सरकार के तीन साल के कार्यकाल से आप खुश हैं?
हां
नहीं
कह नहीं सकते
 
     
ग्रह-नक्षत्र और आपके सितारे
शेयर बाज़ार का ताज़ा ग्राफ
'थर्ड आई वर्ल्ड न्यूज़' अब सोशल मीडिया पर
 फेसबुक                                 पसंद करें
ट्विटर  ट्विटर                                 फॉलो करें
©Third Eye World News. All Rights Reserved.